खुलासा: गैंगरेप कांड का पंचनामा भी फर्जी
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मोहनलालगंज कांड में राजधानी पुलिस पोस्टमार्टम में ही पंचनामा करने में भी लापरवाही बरती। ‘अमर उजाला’ ने पंचनामा रिपोर्ट की जांच की और गवाहों से बात की तो पता चला कि गवाह बनाए गए पांच में से एक भी व्यक्ति ने शव देखा ही नहीं था।
मोहनलालगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर कमरुद्दीन खान और दरोगा मुन्नीलाल ने बलसिंहखेड़ा स्थित प्राथमिक विद्यालय से सटे एक ढाबे में बैठकर गवाहों से जबरन दस्तखत करा लिए।
पंचनामा में पुलिस ने बलसिंहखेड़ा गांव के सजीवन लाल यादव, गुड्डू, जैतीखेड़ा के सरोज कुमार, डेहुवा के पिंटू और परवर पश्चिम के इजहार अली को गवाह बनाया था। पंचनामा रिपोर्ट पर इन पांचों के दस्तखत हैं।
डेढ़ सौ मीटर दूर हुआ पंचनामा
हालांकि, बृहस्पतिवार को ‘अमर उजाला’ ने सभी गवाहों को ढूंढकर बातचीत की तो एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जिसने शव देखा हो।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जिस महिला दरोगा आराधना का पंचनामा में जिक्र है, वह भी मौके पर नहीं थी। जबकि पंचनामा रिपोर्ट में साफ लिखा है कि, ‘मृतका की लाज-हया को ध्यान में रखते हुए महिला एसआई आराधना द्वारा शव उलट-पलट कर दिखाया गया।’
नियम के मुताबिक पुलिस को पंचनामा रिपोर्ट मौके पर ही तैयार करनी होती है लेकिन घटनास्थल से करीब डेढ़ सौ मीटर दूर स्थित सजीवन लाल यादव के ढाबे पर बैठकर यह रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें एक गवाह सजीवन लाल को बनाया गया है।
पंचनामा के आधार पर पोस्टमार्टम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पंचनामा रिपोर्ट पर ही पोस्टमार्टम की कई जांचें तय होती हैं। पंचनामा में मृतक के शरीर पर जहां-जहां चोट के निशान बताए जाते हैं, उन्हें गंभीरता से देखा जाता है।
सूत्रों ने बताया कि हो सकता है कि महिला के शरीर पर कुछ अन्य चोटें भी रही हों जिनका जिक्र पंचनामा में न किया गया हो और पोस्टमार्टम में भी इस दिशा में ध्यान न दिया गया हो।
यह बोले पंच
डेहुआ गांव निवासी पिंटू निजी विद्यालय में ड्राइवर हैं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब साढ़े आठ बजे सूचना पाकर वह प्राथमिक विद्यालय के बगल में ढाबे पर जुटी भीड़ के पास पहुंचा। यहां दरोगा ने उससे एक कागज पर साइन करा लिए। बकौल पिंटू, उसने शव नहीं देखा न ही यह पता है कि किस कागज पर साइन कराए गए।
ढ़ाबे पर बैठ लिख दिया पंचनामा
-ढाबा संचालक सजीवन लाल यादव कहते हैं कि जब वह मौके पर पहुंचे तो चारों तरफ खून बिखरा देख हालत बिगड़ गई। उल्टियां करते हुए वह वापस आ गए। इसके बाद पुलिस उनके ढाबे पर ही बैठकर लिखापढ़ी की कार्रवाई करने लगी। सजीवन के मुताबिक उन्होंने शव की एक झलक देखी थी। दरोगा के कहने पर कागज में साइन कर दिए।
-बलसिंहखेड़ा के गुड्डू ने बताया कि सुबह शव देखकर जा चुके थे। दोपहर में दोबारा पहुंचे तो ढाबे पर भीड़ के पास खड़े हो गए। इसी दौरान दरोगा ने कागज पर साइन करा लिए। पूछने पर बोले, ‘फार्मेलिटी है।’ गुड्डू ने शव तो देखा था लेकिन पंचनामा के दौरान वह मौजूद नहीं थे।
पुलिसिया गवाह को कुछ नहीं पता
-जैतीखेड़ा के सरोज कुमार बेटी को स्कूल छोड़कर लौट रहे थे तभी ढाबे पर भीड़ लगी देखी। वारदात की जानकारी पाकर वह भी रुक गए। दरोगा ने कागज पर साइन करने को कहा तो मना कर दिया। लेकिन दरोगा ने उनसे जबरन साइन करा लिए। कौन मरा था? कैसे मरा था? वह कुछ नहीं जानते न ही देखा।
-परवर पश्चिम के इजहार अली ने कहा कि शव देखे बगैर पुलिस के कहने पर ही कागज में साइन कर दिए थे। पहले उन्होंने मना किया तो दरोगा ने समझाया। बोला, ‘अज्ञात बॉडी ले जाने की औपचारिकता है। कोई न पूछता है न जांच होती है। साइन कर दो।’ दरोगा के दबाव डालने पर ही उन्होंने कागज पर साइन किया था।