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ज्यादा सैंपलिंग से लखनऊ में कोरोना संक्रमण पर अंकुश, कानपुर नगर दूसरे और आगरा तीसरे स्थान पर
Tue, 23 Jun 2020 02:17 PM IST
ishwar ashish
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 23 Jun 2020 02:17 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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क्या ज्यादा जांचें होने से लखनऊ में कोरोना की रफ्तार धीमी रही? यकीनी तौर पर भले ही इसका जवाब न हो, पर आंकड़े तो यही कहते हैं। लखनऊ में सबसे ज्यादा सैंपल लिए गए। यहां संक्रमण दर 2.08 फीसदी तो मृत्यु दर 1.70 फीसदी रही है। सैंपल जांच में दूसरे नंबर पर कानपुर नगर रहा। यहां संक्रमण दर 3.54 फीसदी तो मृत्यु दर 3.8 फीसदी रही।
आगरा तीसरे नंबर पर रहा। यहां संक्रमण दर 5.81 फीसदी तो मृत्यु दर 6.94 फीसदी रही। माना जा रहा है कि ज्यादा सैंपलिंग से संक्रमित के संपर्क में आने वालों की जांच ज्यादा हुई और संक्रमण का पता लगाना आसान हुआ। इसके बाद इलाके सील कराए जाने से संक्रमण की रफ्तार सुस्त हुई।
यूपी में लिए नमूनों में लखनऊ की हिस्सेदारी 7.76 प्रतिशत है। मरीजों के मामले में आंकड़ा 4.86 फीसदी है। प्रदेश में 10 हजार से अधिक सैंपल लेने वालों में सिर्फ आठ जिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 20 जून तक प्रदेश में पांच लाख 33 हजार 997 सैंपल लिए गए हैं। इसमें लखनऊ के 41,425 सैंपल हैं।
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आगरा तीसरे नंबर पर रहा। यहां संक्रमण दर 5.81 फीसदी तो मृत्यु दर 6.94 फीसदी रही। माना जा रहा है कि ज्यादा सैंपलिंग से संक्रमित के संपर्क में आने वालों की जांच ज्यादा हुई और संक्रमण का पता लगाना आसान हुआ। इसके बाद इलाके सील कराए जाने से संक्रमण की रफ्तार सुस्त हुई।
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यूपी में लिए नमूनों में लखनऊ की हिस्सेदारी 7.76 प्रतिशत है। मरीजों के मामले में आंकड़ा 4.86 फीसदी है। प्रदेश में 10 हजार से अधिक सैंपल लेने वालों में सिर्फ आठ जिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 20 जून तक प्रदेश में पांच लाख 33 हजार 997 सैंपल लिए गए हैं। इसमें लखनऊ के 41,425 सैंपल हैं।
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जिलों की स्थिति
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
27,162 नमूनों के साथ कानपुर नगर दूसरे और 19,542 सैंपलों के साथ आगरा तीसरे नंबर पर है। प्रदेश में कुल मरीज 17,731 हैं, जिसमें से 550 की मौत हो चुकी है। सैंपल लेने में ज्यादातर जिलों में कंजूसी बरती गई। टॉप तीन जिलों के अलावा गौतमबुद्ध नगर में 16,270, गाजियाबाद में 13,958, शाहजहांपुर में 13,698, प्रयागराज में 11,771 और मुरादाबाद में 10563, वाराणसी में 7674 और गोरखपुर में 5758 सैंपल लिए गए। अन्य जिले सैंपल लेने में 10 हजार का आंकड़ा नहीं छू पाए हैं।
32 जिलों में 5000 से भी कम सैंपल लिए गए। ऐसे में विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि जब सैंपल ही नहीं लिए जा रहे तो मरीजों की संख्या कम होना स्वाभाविक है। सीएमआे डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने कहा, राजधानी में मरीज ज्यादा हों, पर इस पर भी गौर करें कि यहां सबसे ज्यादा सैंपल कलेक्शन हुआ।
10 हजार से अधिक सैंपल लेने वाले जिलों में मरीजों की स्थिति देखें तो कानपुर में 962, आगरा में 1137 मरीज मिले हैं। इसमें कानपुर में 37 और आगरा मं 79 लोगों की मौत हो चुकी है। लखनऊ में अभी तक 15 लोगों की मौत हुई है। यहां कुल 863 मरीज मिले हैं।
32 जिलों में 5000 से भी कम सैंपल लिए गए। ऐसे में विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि जब सैंपल ही नहीं लिए जा रहे तो मरीजों की संख्या कम होना स्वाभाविक है। सीएमआे डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने कहा, राजधानी में मरीज ज्यादा हों, पर इस पर भी गौर करें कि यहां सबसे ज्यादा सैंपल कलेक्शन हुआ।
10 हजार से अधिक सैंपल लेने वाले जिलों में मरीजों की स्थिति देखें तो कानपुर में 962, आगरा में 1137 मरीज मिले हैं। इसमें कानपुर में 37 और आगरा मं 79 लोगों की मौत हो चुकी है। लखनऊ में अभी तक 15 लोगों की मौत हुई है। यहां कुल 863 मरीज मिले हैं।
यहां सबसे कम कलेक्शन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : ANI
प्रदेश में सैंपल कलेक्शन के मामले में कासगंज सबसे पीछे है। यहां सिर्फ 2,958 नमूने लिए गए हैं, जबकि यहां कुल मरीजों की संख्या 41 है। दूसरे नंबर पर एटा है, जहां 2962 सैंपल लिए गए। जिले में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 94 है। इसमें से छह की मौत हो चुकी है।
ज्यादा सैंपल लेने से नहीं बन पाई चेन
राजधानी में जिस तरह से गुच्छे के रूप में मरीज मिले, उसने कांटेक्ट ट्रेसिंग की पुख्ता रणनीति कारगर साबित की। सदर के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जहां मरीज मिले वहां आस-पास के लोगों की भी बड़ी संख्या में सैंपलिंग कराई। इससे कोराना का फैलाव कम रहा। सदर, ऐशबाग के बाद आरपीएफ- जीआरपी, पीएससी, सीएम हेल्पलाइन और डायल 112 में मरीज मिलते ही ज्यादा लोगों के सैंपल लिए गए।
ज्यादा सैंपल लेने से नहीं बन पाई चेन
राजधानी में जिस तरह से गुच्छे के रूप में मरीज मिले, उसने कांटेक्ट ट्रेसिंग की पुख्ता रणनीति कारगर साबित की। सदर के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जहां मरीज मिले वहां आस-पास के लोगों की भी बड़ी संख्या में सैंपलिंग कराई। इससे कोराना का फैलाव कम रहा। सदर, ऐशबाग के बाद आरपीएफ- जीआरपी, पीएससी, सीएम हेल्पलाइन और डायल 112 में मरीज मिलते ही ज्यादा लोगों के सैंपल लिए गए।