लखनऊ अग्निकांड: 15 लोगों की मौत की जांच के लिए बनी SIT अब तक नहीं सौंप सकी रिपोर्ट; LDA कोर्ट में फैसला नहीं
Lucknow fire tragedy: घटना के बाद सभी जिलों में संचालित कोचिंग संस्थानों की चेकिंग शुरू हुई थी, जिसके बाद जहां आग से सुरक्षा के उपाय नहीं थे, उनको बंद करा दिया गया था।
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अलीगंज की अवैध इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत के मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट का पता नहीं चल रहा है। दो सदस्यीय एसआईटी से लेकर शासन तक के अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। एसआईटी ने किन विभागों और अधिकारियों-कर्मचारियों को दोषी पाया है, यह अब तक रहस्य बना हुआ है। वहीं अग्निकांड के बाद दो दिन तक प्रदेश में अवैध इमारतों के खिलाफ चला अभियान भी ठप हो चुका है।
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने जांच में सामने आए तथ्यों के बारे में शासन को अवगत करा दिया है, लेकिन अभी तक दोषियों पर कार्रवाई का सिलसिला शुरू नहीं हुआ है। प्रारंभिक जांच में जिन चार कर्मियों को निलंबित किया गया था, उनमें से दो के बगावती तेवरों के बाद हर कदम फूंक कर आगे बढ़ाया जा रहा है। शासन ने एसआईटी को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था, लेकिन 15 दिन बीतने के बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है। जानकारों के मुताबिक रिपोर्ट सौंपने में देरी का फायदा आरोपियों को मिल सकता है।
तमाम कोचिंग संस्थान बंद
घटना के बाद सभी जिलों में संचालित कोचिंग संस्थानों की चेकिंग शुरू हुई थी, जिसके बाद जहां आग से सुरक्षा के उपाय नहीं थे, उनको बंद करा दिया गया था। कई दिन बीतने के बाद भी उनको दोबारा खोला नहीं जा सका है। कोचिंग संस्थान ऑनलाइन क्लासेज चला रहे है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अलीगंज अग्निकांड : नहीं हो सका फैसला, कल फिर सुनवाई
अलीगंज अग्निकांड की पहली सुनवाई मंगलवार को एलडीए की विहित अधिकारी कोर्ट में हुई, पर कोई निर्णय नहीं हो सका। अदालत ने बिल्डिंग मालिक के वकील की मांग पर एक दिन का समय जवाब दाखिल करने के लिए और दिया है। अब बुधवार को फिर सुनवाई होगी और तभी तय होगा कि जिस अवैध बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान गई, उस पर बुलडोजर कब चलेगा?
बीती 22 जून को अलीगंज सेक्टर-डी के एनिमेशन सेंटर में आग लगने से 15 लोगों की जान चली गई थी। जांच में सामने आया था कि बिल्डिंग में आग से बचाव के लिए फायर सेफ्टी और सेट बैक जैसे जरूरी उपाय नहीं थे। इसके अलावा निर्माण भी अवैध था। आवासीय का मानचित्र पास कराकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था।
एलडीए की ओर से 23 जून को बिल्डिंग मालिक को नोटिस जारी किया गया था। मामले की पहली सुनवाई मंगलवार को एलडीए के विहित प्राधिकारी अतुल कुमार की लालबाग स्थित कोर्ट में हुई। माना जा रहा था कि ध्वस्तीकरण का आदेश हो जाएगा, लेकिन बिल्डिंग मालिक के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय देने की मांग की। कोर्ट ने इससे इन्कार करते हुए साफ किया कि जिस नोटिस का जवाब देने के लिए समय मांगा जा रहा है उस पर पहले ही 15दिन का समय दिया जा चुका है। ऐसे में अब और समय नहीं दिया जा सकता।
समय दिए जाने की मांग बार-बार दोहराने पर अदालत ने कहा कि एक दिन का समय और दिया जा सकता है, इससे ज्यादा नहीं। इस पर वकील ने दो दिन का समय देने की गुजारिश की, लेकिन कोर्ट ने एक दिन से अधिक का समय देने से इन्कार कर दिया। अब मामले की सुनवाई बुधवार को फिर एलडीए के विहित प्राधिकारी की कोर्ट में होगी।