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लखनऊ अग्निकांड: बार-बार मिल रहे थे खतरे के संकेत, फिर भी नहीं जागे जिम्मेदार; अलीगंज में लापरवाही बनी काल

Tue, 23 Jun 2026 06:41 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 23 Jun 2026 06:41 AM IST
सार

पूरी बिल्डिंग में अग्नि सुरक्षा उपकरण भी नहीं थे। बिल्डिंग में अलीगंज पेट शॉप एंड क्लिनिक, हैक्सर स्टूडियो और कोचिंग सेंटर का संचालन हो रहा था। स्टूडियो और कोचिंग सेंटरों में रोजाना 30 से 40 बच्चे आते थे।

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Lucknow fire tragedy Despite repeated warning signs authorities remained silent
लापरवाही की आग में बुझ गईं जिंदगियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में बिल्डिंग के मालिक वीरेंद्र शुक्ला ने शुरू से ही खामियों को नजरअंदाज किया। वीरेंद्र ने न तो फायर एनओसी ली और न ही किरायेदारों को इसके लिए बोला। बिल्डिंग के निर्माण में भी नियमों का उल्लंघन किया गया। अवैध बिल्डिंग में आने-जाने का एक ही रास्ता था। इसकी वजह से आग लगने के बाद लोग बाहर नहीं भाग सके।

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खास बात ये है कि पूरी बिल्डिंग में अग्नि सुरक्षा उपकरण भी नहीं थे। बिल्डिंग में अलीगंज पेट शॉप एंड क्लिनिक, हैक्सर स्टूडियो और कोचिंग सेंटर का संचालन हो रहा था। स्टूडियो और कोचिंग सेंटरों में रोजाना 30 से 40 बच्चे आते थे। वहीं, पेट शॉप का मालिक कुछ दिनों के लिए लोगों के पालतू जानवर किराये पर भी रखता था। इसके यहां ग्राहकों का आना जाना रहता था। ऐसे में तीनों प्रतिष्ठानों में न तो स्मोक डिटेक्टर लगे थे और न ही फायर एक्सस्टिंग्यूशर लगे थे। 
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यही नहीं, अग्निकांड से पहले एमसीवी बार-बार संकेत दे रही थी। बार-बार एमसीवी गिरने (ट्रिप ) से ठप होने वाली बिजली के बारे में व्यावसायिक स्थल की देखरेख करने वाले जिम्मेदार से किरायेदारों ने शिकायत की थी। बावजूद इसके इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। भवन की देखरेख करने वाले ने अगर एमसीसी गिरने की जांच कराई होती तो शायद हादसा टल जाता।
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लॉक हो गया था बॉयोमीट्रिक से खुलने वाला गेट
पीड़ित परिवारों ने बताया कि एनिमेशन सेंटर का पूरा सेटअप ऑटोमेटिक था। गेट भी बॉयोमीट्रिक से ही खुलता था। आग लगते ही गेट लॉक हो गया था। पूरा सिस्टम फेल हो गया, इसके कारण भीतर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके और उनकी जान चली गई। पीड़ितों ने भवन मालिक और सेंटर संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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