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यूपी में बेटियां सुरक्षित नहीं: कांग्रेस अध्यक्ष ने योगी सरकार को कानून व्यवस्था पर घेरा, उठाए गंभीर सवाल
Sun, 04 Oct 2026 05:12 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Sun, 04 Oct 2026 05:12 PM IST
सार
कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने प्रदेश के कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए योगी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ भाजपा का नारा नहीं बल्कि चेतावनी थी अब स्थिति सबके सामने आ रही है।
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने आज जारी बयान में कहा है कि उत्तर प्रदेश को भाजपा सरकार ने बेटियों के लिए सर्वाधिक असुरक्षित प्रदेश बना दिया है। घर से स्कूल निकली बेटियां लौटकर घर नहीं आती हैं, बलात्कार का शिकार हो जाती हैं, फिर मौत के घाट उतार दी जाती हैं। अगर बच गईं तो गर्भवती हो जाती हैं और उसके बाद प्रसव पीड़ा से नाबालिग और उसके बच्चे की मौत हो जाती है। बीते दस वर्षों में प्रदेश सरकार के नकारेपन ने ऐसी दर्दनाक कहानियों की रक्तरंजित सुर्खियों से पूरे यूपी के चप्पे-चप्पे को पाट दिया है। अब यूपी की जनता कह रही है- जिसने यूपी का किया ये हाल, उसे और क्यों दें पांच साल।
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पिछले एक सप्ताह में सामने आई बुलंदशहर, बस्ती, बांदा, सोनभद्र, कौशाम्बी, ललितपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज, लखनऊ की घटनाओ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ इन घटनाओं का नहीं, पूरी व्यवस्था का है।
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उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के एक वर्ष में 66,381 मामले दर्ज हुए-यानी औसतन लगभग 182 मामले प्रतिदिन।
- इसी वर्ष उत्तर प्रदेश में 3,516 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए-औसतन लगभग 9.6 मामले प्रतिदिन।
- हत्या के 3,206 मामले दर्ज हुए-औसतन लगभग 8.8 हत्याएं प्रतिदिन।
- एसिड अटैक के 31 मामले दर्ज हुए-यानी औसतन लगभग हर 12 दिन में एक एसिड अटैक। इसके अलावा एसिड अटैक के प्रयास के मामले भी दर्ज हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी विगत 30 सितंबर 2026 को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने एक आपराधिक मामले की जांच में यूपी पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की है कि क्यों न “यूपी पुलिस को ही भंग कर दें।” देश की शीर्ष अदालतों द्वारा भी प्रदेश सरकार को फटकार लगाई गई किन्तु अभी तक उसका भी कोई असर नहीं दिख रहा है।
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प्रदेश अध्यक्ष के सरकार से सवाल
जब स्कूल से घर लौटती बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। पांच साल की बच्ची सुरक्षित नहीं है। 10 साल की बच्ची सुरक्षित नहीं है और नाबालिग छात्राओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, तो सरकार हाथ पर हाथ रखकर क्यों बैठी है? जो सत्ता बेटियों को सुरक्षित स्कूल, सड़क और घर नहीं दे सकती, उस सरकार को जनता उखाड़ फेंकेगी। बेटियां डर में नहीं, सम्मान और सुरक्षा के साथ जीना चाहती हैं।