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अपील करने के अधिकार को नकारा नहीं जा सकता: हाईकोर्ट
Fri, 05 Apr 2019 07:58 AM IST
vivek shukla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 05 Apr 2019 07:58 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सेवा संबंधी एक मामले में अहम विधि व्यवस्था देते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति के अपील करने के अधिकार को किसी भी तरह नकारा नहीं जा सकता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की एक नजीर का हवाला देते हुए यह भी कहा कि अपील के कानूनी अधिकार से वंचित किया जाना कानून की स्थापित प्रक्रिया से इनकार किए जाने जैसा है।
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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह विधि व्यवस्था डॉ. अतिया खान की याचिका को मंजूर करते हुए दी। साथ ही याची को प्रदेश के राजकीय यूनानी कॉलेज में प्रवक्ता (तहफूजी व समाजी पिब) के पद के 5 अप्रैल से शुरू होने वाले साक्षात्कार में शामिल किए जाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग, प्रयागराज के सचिव को निर्देश दिया है कि याची को शुक्रवार से शुरू होने वाले साक्षात्कार में शामिल होने के आदेश दें।
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याची का कहना था कि उसने राजकीय यूनानी कॉलेज में प्रवक्ता पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया गया और उसे साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया। मगर अभ्यर्थन निरस्त करने की जानकारी आयोग से नहीं भेजा गया। जबकि इसकी जानकारी दिए जाने का नियम है।
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अपील के कानूनी हक को किसी भी तरह नकारा नहीं जा सकता
उधर, आयोग के वकील ने कहा कि साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने वाले अभ्यर्थियों की सूची वेबसाइट पर अपलोड की गई थी, ऐसे में यह माना जाना चाहिए था कि याची का अभ्यर्थन निरस्त हो गया है। इस पर कोर्ट ने कहा, चूंकि अभ्यर्थन निरस्त किए जाने की जानकारी देने का प्रावधान है। लिहाजा निरस्तीकरण मेमो दिया जाना चाहिए था, जिससे वह कारण जान सके और कानूनी अपील कर सके। कोर्ट ने कहा कि अपील के कानूनी हक को किसी भी तरह नकारा नहीं जा सकता।