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लखनऊ-नोएडा होंगे मेट्रोपोलिटन शहर, पुलिस आयुक्त को कमान, 40 थानों में लागू होगी प्रणाली

Mon, 13 Jan 2020 10:28 AM IST
शाहरुख खान महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 13 Jan 2020 10:28 AM IST
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Lucknow and Gautam Budh Nagar to will be declared metropolitan cities
yogi adityanath - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश की राजधानी लखनऊ व गौतमबुद्धनगर (नोएडा) जिले में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने पर सिद्धांत रूप में सहमति बन गई है। इसके लिए लखनऊ को पुलिस प्रशासन के लिहाज से दो हिस्सों लखनऊ नगर व ग्रामीण में बांटा जाएगा। 
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इसके बाद लखनऊ नगर व गौतमबुद्धनगर को मेट्रोपोलिटन शहर घोषित किया जाएगा। गृह विभाग ने नई व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए दो अलग-अलग कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी मिलना तय माना जा रहा है।
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सूत्रों ने बताया कि गृह विभाग ने दोनों शहरों में जनसंख्या व क्षेत्रफल में वृद्धि, अपराध जगत की बढ़ती चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने व सुदृढ़ कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने का तर्क दिया है। 
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साथ ही, भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 व दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली के प्रावधान का हवाला भी दिया है। इस व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए लखनऊ में दो पुलिस जनपद-लखनऊ नगर व लखनऊ ग्रामीण के गठन का प्रस्ताव किया गया है। 

लखनऊ नगर में 40 पुलिस थाने होंगे, जबकि लखनऊ ग्रामीण में पांच पुलिस थाने आएंगे। लखनऊ नगर के 40 थाने ही पुलिस कमिश्नर के दायरे में आएंगे। गौतमबुद्धनगर के 24 थाने पुलिस आयुक्त के दायरे में आएंगे।

लखनऊ नगर में पुलिस आयुक्त व अन्य अधिकारियों के 56 पद होंगे, जबकि गौतमबुद्धनगर में पुलिस आयुक्त सहित 38 पद होंगे। इन्हें मौजूदा उपलब्ध पदों से समायोजित किया जाएगा। 

सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-8 में प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लखनऊ नगर व गौतमबुद्धनगर को मेट्रोपोलिटन शहर घोषित करने की तैयारी कर ली है। दोनों महानगरीय क्षेत्रों में भविष्य में नए थाने सृजित करने व शामिल करने की भी मंजूरी ली जाएगी।

पुलिस जनपद लखनऊ ग्रामीण में वर्तमान पुलिस अधीक्षक की व्यवस्था लागू रहेगी। संबंधित पुलिस अधीक्षक पूर्व व्यवस्था के अनुसार अपने उप महानिरीक्षक व महानिरीक्षक को रिपोर्ट करते रहेंगे।

पुलिस आयुक्त लखनऊ नगर के नियंत्रण में आने वाले थाने

आलमबाग, अलीगंज, अमीनाबाद, आशियाना, बाजारखाला, बंथरा, चौक, कैंट, चिनहट, गोमतीनगर, गुडंबा, गाजीपुर, गौतमपल्ली, हसनगंज, हजरतगंज, हुसैनगंज, इंदिरानगर, जानकीपुरम, कैसरबाग, कृष्णानगर, महानगर, मानकनगर, मड़ियांव, नाका, पारा, पीजीआई, सआदतगंज, सरोजनीनगर, तालकटोरा, ठाकुरगंज, विभूतिखंड, विकासनगर, वजीरगंज, काकोरी, नगराम, महिला थाना, मोहनलालगंज, सुशांत गोल्फ सिटी, गोमतीनगर विस्तार।

पुलिस आयुक्त गौतमबुद्ध नगर के नियंत्रण में आने वाले थाने
सूरजपुर, कासना, नॉलेज पार्क, इकोटेक प्रथम, दनकौर, ग्रेटर नोएडा, बिसरख, इकोटेक तृतीय, बादलपुर, रबूपुरा, जेवर, जारचा, दादरी, सेक्टर-20, सेक्टर-39, एक्सप्रेस-वे, सेक्टर-58, सेक्टर-24, फेस-॥ ।, सेक्टर-49, फेस-॥ , महिला थाना, फेस-।, सेक्टर-142

आईजी या उससे वरिष्ठ अफसर होगा पुलिस आयुक्त
लखनऊ नगर में पुलिस आयुक्त प्रणाली के तहत राजपत्रित अधिकारियों के कुल 56 पद चिह्नित किए गए हैं। इनमें पुलिस आयुक्त पुलिस महानिरीक्षक या इससे उच्च रैंक का होगा। अपर पुलिस आयुक्त डीआईजी स्तर के होंगे। पुलिस उपायुक्त पुलिस अधीक्षक स्तर का, अपर पुलिस उपायुक्त अपर पुलिस अधीक्षक स्तर व सहायक पुलिस आयुक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के होंगे।
 

लखनऊ पुलिस आयुक्त के साथ इस तरह होगी नई टीम

  • पुलिस आयुक्त : पुलिस महानिरीक्षक या उच्च रैंक का होगा।
  • 02 संयुक्त पुलिस आयुक्त : दोनों पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी होंगे। एक कानून-व्यवस्था का काम देखेगा, दूसरा मुख्यालय का।
  • 10 पुलिस उपायुक्त : सभी पुलिस अधीक्षक स्तर के होंगे। पांच पुलिस उपायुक्त 5 जोन में होंगे। एक-एक उपायुक्त यातायात, अपराध, मुख्यालय, अभिसूचना व सुरक्षा तथा महिला अपराध से संबंधित मामले देखेगा।
  • 13 अपर पुलिस उपायुक्त : ये सभी अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के होंगे। इनमें एक स्टाफ ऑफिसर की जिम्मेदारी निभाएगा। 5 जोन में होंगे। एक-एक कानून-व्यवस्था, यातायात, अपराध, मुख्यालय, अभिसूचना व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगे।
  • 28 सहायक पुलिस आयुक्त: ये सभी पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी होंगे। इनमें 14 सर्किल में तैनात होंगे। एक कानून-व्यवस्था, तीन यातायात, दो अपराध, एक लाइन्स, दो लेखा व कार्यालय, एक अभिसूचना, दो सुरक्षा व दो महिला अपराध से संबंधित मामले देखेंगे।
  • सहायक रेडियो अधिकारी व मुख्य अग्निशमन अधिकारी के एक-एक पद होंगे।

गौतमबुद्धनगर पुलिस आयुक्त के साथ इस तरह होगी नई टीम

  • पुलिस आयुक्त : पुलिस महानिरीक्षक या उच्च रैंक का होगा
  • 2 अपर पुलिस आयुक्त : दोनों पुलिस उपमहानिरीक्षक स्तर के अधिकारी होंगे। एक कानून-व्यवस्था का काम देखेगा, दूसरा मुख्यालय का।
  • 7 पुलिस उपायुक्त : सभी पुलिस अधीक्षक स्तर के होंगे। तीन पुलिस उपायुक्त जोन में तैनात होंगे। एक-एक उपायुक्त यातायात, अपराध, मुख्यालय, महिला अपराध से संबंधित मामले देखेगा।
  • 9 अपर पुलिस उपायुक्त : ये सभी अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के होंगे। इनमें एक स्टाफ ऑफिसर की जिम्मेदारी निभाएगा। 3 जोन में होंगे। एक-एक कानून-व्यवस्था, यातायात, अपराध, मुख्यालय, अभिसूचना व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगे।
  • 17 सहायक पुलिस आयुक्त: ये सभी पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी होंगे। इनमें 10 सर्किल में तैनात होंगे। एक-एक कानून-व्यवस्था, यातायात, अपराध, लाइन्स, लेखा व कार्यालय तथा दो महिला अपराध से संबंधित मामले देखेंगे।
  • सहायक रेडियो अधिकारी व मुख्य अग्निशमन अधिकारी के एक-एक पद होंगे।

पुलिस आयुक्त व टीम को मजिस्ट्रेट का अधिकार

पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त को मजिस्ट्रेट के अधिकार दिए जाएंगे। पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट व अपर जिला मजिस्ट्रेट के समस्त अधिकार देने का प्रस्ताव है। संयुक्त पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त व सहायक पुलिस आयुक्त को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के अधिकार देने की योजना है। इसके अलावा पुलिस आयुक्त व उनकी टीम को विभिन्न अधिनियमों के लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट का अधिकार देने की योजना है।

कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में करेंगे शांति-व्यवस्था, गुंडा, गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई
पुलिस आयुक्त व उपायुक्तों को जिला प्रशासन से संबंधित तमाम अधिकार मिल जाएंगे। इसमें शांति-व्यवस्था, गुंडा, गैंगस्टर, अनैतिक व्यापार, पशु क्रूरता, विस्फोटक,, गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम सहित 15 अधिनियमों में कार्यकारी मजिस्ट्रेट की तरह कार्रवाई के अधिकार प्राप्त होंगे।

इन अधिनियमों के अंतर्गत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में करेंगे कार्रवाई 

1- दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-58 व अध्याय-8 (परिशांति कायम रखने के लिए और सदाचार के लिए प्रतिभूति) और अध्याय-10 (लोक व्यवस्था व शांति बनाए रखना)
2- यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 (यूपी अधिनियम संख्या, 8 सन 1971)
3- विष अधिनियम, 1919
4- अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956
5- पुलिस (द्रोह उद्दीपन) अधिनियम, 1922
6- पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम,1960
7- विस्फोटक अधिनियम, 1884
8- कारागार अधिनियम, 1894
9- सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923
10- विदेशी अधिनियम, 1946
11- गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम (अधिनियम) 1967
12- भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861
13- यूपी अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1944
14- यूपी अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 2005
15- यूपी गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986

इसलिए नई प्रणाली की जरूरत

- 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू हो सकती है। 2011 की जनगणना के अनुसार लखनऊ नगर की जनसंख्या 29,02,920 व गौतमबुद्धनगर की 16,48,000 हो चुकी थी।
- अपराधियों की कार्यप्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों में जटिल व आधुनिक होती जा रही है। ग्रामीण क्ष्ेात्र में कोई नया व्यक्ति आता है तो सभी को पता चल जाता है, लेकिन नगरों में पहचान छुपा कर रहना आसान है। अपराधियों के तौरतरीके  हाइटेक होते जा रहे हैं। तेज वाहनों से लूट, वाहन चोरी, छिनैती जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं।
- संगठित अपराधों में अब ड्रग्स व मानव तस्करी के अलावा साइबर अपराध, नकली कॉल सेंटर चलाकर देश-विदेश में ठगी करना, लॉटरी स्कैम चलाना आदि शामिल हो गए हैं। संगठित साइबर अपराध के रूप में आनलाइन ठगी भी हो रही है। ऐसी स्थिति में वर्तमान तकनीक अपर्याप्त सिद्ध हो रही है।
- कानून-व्यवस्था की चुनौतियों में भीड़ नियंत्रण व सरकारी तथा निजी संपत्ति की तोड़-फोड़ को प्रभावी तरीके से रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्था कमजोर साबित हो रही है। इन दोनों शहरों में यातायात व्यवस्था भी चुनौती बनी हुए हैं। बाजारों में पार्किंग व्यवस्था, पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए स्टॉपेज व रूट तय करना, सड़कों पर ठेले न लगें इसके लिए पुलिस व नगर निगम के बीच समन्वय की जरूरत है।
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