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लखनऊ : गोमतीनगर में दिया 10 गुना बड़ा भूखंड, जाली दस्तावेजों से बिके भूखंड पर नक्शा की जांच शुरू
Mon, 09 Aug 2021 11:08 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 09 Aug 2021 11:08 AM IST
सार
एलडीए की प्रचलित जांच में एक से एक कारनामे सामने आ रहे हैं। विश्वासखंड की रजिस्ट्री की कॉपी कर बने जाली दस्तावेज से से विक्रांतखंड में भूखंड बेच दिया गया। ईडब्ल्यूएस के 30 वर्गमी के भूखंड के गोमतीनगर के विकल्पखंड में 300 वर्गमी का बना दिया गया।
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एलडीए
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
गोमतीनगर में भूखंडों के जाली दस्तावेज से बेचने या फर्जी समायोजन के बाद निर्माण शुरू कराने के लिए नक्शे भी स्वीकृत हो गए। वीसी अक्षय त्रिपाठी ने फ र्जीवाड़ा कर बेचे गए सभी भूखंड के लिए नक्शों के स्वीकृत होने की जांच कराने के लिए आदेश किया है। वीसी का कहना है कि ऐसे सभी नक्शे तत्काल निरस्त कर दिए जाएं जोकि जांच के अधीन भूखंड पर स्वीकृत हैं।
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वीसी ने बताया कि फर्जीवाड़ा कर भूखंड बेचने के प्रकरणों में रिपोर्ट मांगी गई है। अगले 48 घंटे में तीन प्रकरण में एफआईआर भी एलडीए कराएगा। इससे पहले सभी भूखंड के मानचित्र की जांच कराई जा रही है। फर्जी आवंटियों को कोई राहत नहीं मिले। इसके लिए जरूरी है कि पहले मानचित्र निरस्त किए जाएं। वहीं सचिव पवन गंगवार का कहना है कि अकेले गोमतीनगर के करीब 15 प्रकरण में जांच प्रचलित है। इनमें विकल्पखंड, विपुलखंड, विक्रांतखंड, विभूतिखंड, विरामखंड, विनम्रखंड, विनीतखंड के भूखंड शामिल हैं।
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एलडीए की प्रचलित जांच में एक से एक कारनामे सामने आ रहे हैं। विश्वासखंड की रजिस्ट्री की कॉपी कर बने जाली दस्तावेज से से विक्रांतखंड में भूखंड बेच दिया गया। अब शारदानगर योजना से ईडब्ल्यूएस के 30 वर्गमी के भूखंड के गोमतीनगर के विकल्पखंड में 300 वर्गमी का बना दिया गया। पूर्व वीसी सत्येंद्र सिंह यादव के समय में इसे पहले गोमतीनगर विस्तार और फिर गोमतीनगर में बदला गया। नियम यह है कि भूखंड समायोजन में बेहतर योजना और एक स्टेप से अधिक साइज में समायोजन नहीं किया जा सकता है। ऐसे में अधिकतम 45 वर्गमी का ही भूखंड समायोजन कर दिया जा सकता था।
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