{"_id":"6a7b59c47c8ca9981f00c1e0","slug":"lu-pf-scam-at-lucknow-university-complaint-lodged-with-cm-yogi-adityanath-2026-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"LU: लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएफ घोटाला! सीएम योगी से शिकायत, 84 माह में सिर्फ 22 माह की रकम जमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
LU: लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएफ घोटाला! सीएम योगी से शिकायत, 84 माह में सिर्फ 22 माह की रकम जमा
Tue, 11 Aug 2026 10:50 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Tue, 11 Aug 2026 10:50 PM IST
सार
कर्मचारियों ने दावा किया है कि 84 माह में सिर्फ 22 माह की रकम जमा की गई है। इससे संविदा कर्मचारी व शिक्षक आक्रोशित हैं। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
विज्ञापन
लखनऊ विश्वविद्यालय
विस्तार
लखनऊ विश्वविद्यालय के संविदा शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने भविष्य निधि (पीएफ) की रकम जमा न होने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का दावा है कि वेतन से करीब 84 माह तक पीएफ की कटौती हुई, लेकिन ईपीएफ खातों में सिर्फ 22 माह की राशि ही जमा की गई। उनका कहना है कि 30 लाख रुपये से अधिक की रकम अभी बकाया है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच और बकाया राशि ब्याज सहित जमा कराने की मांग की है। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी अपील की है।
विज्ञापन
कर्मचारियों के मुताबिक उनकी नियुक्ति 2017 में हुई थी। जुलाई 2019 से वेतन से 10 प्रतिशत कर्मचारी अंशदान के रूप में सीपीएफ की कटौती शुरू हुई। मई 2022 में कुलसचिव ने सीपीएफ के स्थान पर ईपीएफ लागू करने का आदेश दिया। इसके बाद अगस्त 2023 से 12 प्रतिशत की दर से ईपीएफ की कटौती होने लगी। आरोप है कि वेतन से नियमित कटौती के बावजूद ईपीएफ खातों में पूरी रकम जमा नहीं की गई।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - यूपी: गुरुवार से पूरे प्रदेश में मानसूनी बारिश का अलर्ट, वाराणसी सहित इन 20 जिलों में भारी बरसात की चेतावनी
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - अयोध्या: ट्रस्ट ने शुरू की CEO चुनने की प्रक्रिया, आस्था के साथ धार्मिक नजरिए पर पूछे गए सवाल; पूर्व डीएम भी आवेदक
कई बार पत्राचार, फिर भी समाधान नहीं
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने वित्त अधिकारी, कुलसचिव समेत संबंधित अधिकारियों से कई बार पत्राचार किया। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। मामले की शिकायत ईपीएफओ और मानवाधिकार आयोग में भी की गई है। कर्मचारियों ने जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
15 हजार से अधिक वेतन वालों की कटौती पर रोक
कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा ने बताया कि 15 हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए नियोक्ता अंशदान अनिवार्य नहीं है। ऐसे कर्मचारियों के वेतन से भविष्य में ईपीएफ की कटौती नहीं होगी। उन्होंने बताया कि जिन कर्मचारियों का यूएएन नहीं बना है, उनकी काटी गई ईपीएफ राशि वापस की जाएगी। कुलसचिव के मुताबिक विश्वविद्यालय का ईपीएफ पंजीकरण चार अप्रैल 2023 को हुआ था। इसके बाद संविदा कर्मचारियों के यूएएन बनाए गए। यूएएन बनने से पहले की गई कटौती भी वापस की जाएगी। 23 जून की वित्त समिति के निर्णय को 27 जुलाई को कार्य परिषद ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। यह व्यवस्था वर्तमान में कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों पर लागू होगी।