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लखनऊ विश्वविद्यालय : वेबसाइट पर फीस की गड़बड़ी दूर हुई तो आवेदन शुरू
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर बीएससी बायो व मैथ्स की फीस में गड़बड़ी मंगलवार को ठीक कर दी गई है। इसके साथ ही ऑनलाइन आवेदन भी शुरू कर दिए गए हैं। विश्वविद्यालय में सोमवार को विद्यार्थियों द्वारा नए सत्र की फीस जमा की जा रही थी, जिसमें बीएससी चौथे सेमेस्टर की फीस 4,227 की बजाय वेबसाइट पर 10,227 दिख रही थी। विद्यार्थियों ने ट्वीट कर इसकी शिकायत कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय से की। प्रो. राय ने इसका संज्ञान लेते हुए विद्यार्थियों को जल्द इस समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। इस क्रम में विश्वविद्यालय के यूडीआरसी की ओर से मंगलवार को इस समस्या को ठीक किया गया। जानकारी के अनुसार फीस की गलत फीडिंग के कारण दो कोर्स में यह दिक्कत आई। विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि फीस की गड़बड़ी को दूर कर लिया गया है। विद्यार्थियों द्वारा आवेदन शुरू कर दिए गए हैं।
देश के स्मारकों की दी जानकारी
लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज और परामर्श और मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के सहयोग से छात्रों के लिए कॅरियर डवलपमेंट पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। अतिथि वक्ता डॉ. शमा महमूद विभागाध्यक्ष मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास विभाग ने बताया कि कैसे छात्र उद्योग के लिए तैयार हो और कौशल विकास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास और पर्यटन के विषय निकटता से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पर्यटकों को स्मारकों को समझाते समय उनसे जुड़ी सही शब्दावली का उपयोग करने के महत्व पर जोर दिया। प्रो. मधुरिमा प्रधान निदेशक परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ ने कहा कि सीजीसी छात्रों के लिए लगातार ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज की समन्वयक डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में एसएमएच रिजवी, डॉ. अमर तिवारी, डॉ. सुयश यादव, डॉ. मनीषा आदि शामिल हुए।
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देश के स्मारकों की दी जानकारी
लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज और परामर्श और मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के सहयोग से छात्रों के लिए कॅरियर डवलपमेंट पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। अतिथि वक्ता डॉ. शमा महमूद विभागाध्यक्ष मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास विभाग ने बताया कि कैसे छात्र उद्योग के लिए तैयार हो और कौशल विकास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास और पर्यटन के विषय निकटता से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पर्यटकों को स्मारकों को समझाते समय उनसे जुड़ी सही शब्दावली का उपयोग करने के महत्व पर जोर दिया। प्रो. मधुरिमा प्रधान निदेशक परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ ने कहा कि सीजीसी छात्रों के लिए लगातार ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज की समन्वयक डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में एसएमएच रिजवी, डॉ. अमर तिवारी, डॉ. सुयश यादव, डॉ. मनीषा आदि शामिल हुए।
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