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लखनऊ विश्वविद्यालय : दीक्षांत के इंतजार में बीता साल, विभागों में पड़े हैं मेडल और डिग्री
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अक्षय कुमार
लखनऊ। राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने हाल ही में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया है कि दीक्षांत समारोह के तुरंत बाद विद्यार्थियों को उनके पते पर डिग्री भेज दी जाए ताकि इसके लिए उनको भटकना न पड़े। लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह आयोजित हुए करीब आठ माह बाद भी अधिकतर विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल का ही इंतजार है। डिग्री और मेडल विभागों में रखे हैं और जिन विद्यार्थियों को जरूरत पड़ रही है वो ले जा रहे हैं। यह स्थिति तब है जब विश्वविद्यालय का डाक विभाग के साथ एमओयू है।
लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपना शताब्दी समारोह 21 नवंबर 2020 को मनाया है। इसी दौरान 63वे दीक्षांत समारोह का संक्षिप्त आयोजन भी किया गया, जिसमें राज्यपाल व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने 15 मेधावियों को चांसलर, वाइस चांसलर, चक्रवर्ती गोल्ड मेडल, चांसलर सिल्वर मेडल, चांसलर कांस्य पदक आदि वितरित किए। साथ ही यह निर्णय हुआ कि बचे हुए अन्य मेडल व डिग्री विभाग स्तर पर आयोजन कर किसी न किसी विशिष्ट अतिथि से विद्यार्थियों को दिलवाए जाएंगे। विश्वविद्यालय 194 मेधावियों को हर साल मेडल वितरित करता है। यानी 179 मेधावियों को मेडल व अन्य को डिग्री का वितरण स्थापना दिवस के बाद विभाग स्तर पर होना था, किंतु पूरा सत्र बीतने को है और एक लॉ विभाग को छोड़कर किसी ने इसका आयोजन नहीं किया गया।
नवंबर से आ गया जून, नहीं खत्म हुआ इंतजार
विश्वविद्यालय प्रशासन की हालत देखिए, नवंबर में शताब्दी समारोह का आयोजन हुआ। इसके बाद दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च तक विवि खुला, लेकिन कहीं कार्यक्रम नहीं हो सका। विवि प्रशासन का ध्यान भी इस तरफ नहीं गया। वहीं, अप्रैल से जून तक विवि के विभाग कोविड संक्रमण के कारण बंद हैं। न विद्यार्थी आ रहे हैं न शिक्षक, न ही कोई आयोजन हो रहा है।
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विभागों ने कहा कि सब बंडल में बंद है
जब विभागों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मेडल और डिग्री बंडल में बंद और सुरक्षित हैं। अब नए सत्र की शुरुआत हुई तो कुछ विद्यार्थी विभाग से डिग्री लेने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य समारोह में डिग्री व मेडल मिलने का अपना अलग ही उत्साह होता है। इस तरह से डिग्री विभाग से लेने का क्या मतलब? वहीं लविवि के प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना संक्रमण की वजह से विभाग स्तर पर आयोजन नहीं किए जा सके हैं। बीच में परीक्षा आदि का भी आयोजन हो रहा था। संभव हुआ तो विभाग स्तर पर इसका आयोजन होगा अन्यथा विद्यार्थियों की डिग्री और मेडल को उनके घर भिजवाने की व्यवस्था की जाएगी, जिन्हें जरूरत है वो डिग्री ले भी गए हैं।
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लखनऊ। राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने हाल ही में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया है कि दीक्षांत समारोह के तुरंत बाद विद्यार्थियों को उनके पते पर डिग्री भेज दी जाए ताकि इसके लिए उनको भटकना न पड़े। लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह आयोजित हुए करीब आठ माह बाद भी अधिकतर विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल का ही इंतजार है। डिग्री और मेडल विभागों में रखे हैं और जिन विद्यार्थियों को जरूरत पड़ रही है वो ले जा रहे हैं। यह स्थिति तब है जब विश्वविद्यालय का डाक विभाग के साथ एमओयू है।
लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपना शताब्दी समारोह 21 नवंबर 2020 को मनाया है। इसी दौरान 63वे दीक्षांत समारोह का संक्षिप्त आयोजन भी किया गया, जिसमें राज्यपाल व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने 15 मेधावियों को चांसलर, वाइस चांसलर, चक्रवर्ती गोल्ड मेडल, चांसलर सिल्वर मेडल, चांसलर कांस्य पदक आदि वितरित किए। साथ ही यह निर्णय हुआ कि बचे हुए अन्य मेडल व डिग्री विभाग स्तर पर आयोजन कर किसी न किसी विशिष्ट अतिथि से विद्यार्थियों को दिलवाए जाएंगे। विश्वविद्यालय 194 मेधावियों को हर साल मेडल वितरित करता है। यानी 179 मेधावियों को मेडल व अन्य को डिग्री का वितरण स्थापना दिवस के बाद विभाग स्तर पर होना था, किंतु पूरा सत्र बीतने को है और एक लॉ विभाग को छोड़कर किसी ने इसका आयोजन नहीं किया गया।
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नवंबर से आ गया जून, नहीं खत्म हुआ इंतजार
विश्वविद्यालय प्रशासन की हालत देखिए, नवंबर में शताब्दी समारोह का आयोजन हुआ। इसके बाद दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च तक विवि खुला, लेकिन कहीं कार्यक्रम नहीं हो सका। विवि प्रशासन का ध्यान भी इस तरफ नहीं गया। वहीं, अप्रैल से जून तक विवि के विभाग कोविड संक्रमण के कारण बंद हैं। न विद्यार्थी आ रहे हैं न शिक्षक, न ही कोई आयोजन हो रहा है।
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विभागों ने कहा कि सब बंडल में बंद है
जब विभागों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मेडल और डिग्री बंडल में बंद और सुरक्षित हैं। अब नए सत्र की शुरुआत हुई तो कुछ विद्यार्थी विभाग से डिग्री लेने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य समारोह में डिग्री व मेडल मिलने का अपना अलग ही उत्साह होता है। इस तरह से डिग्री विभाग से लेने का क्या मतलब? वहीं लविवि के प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना संक्रमण की वजह से विभाग स्तर पर आयोजन नहीं किए जा सके हैं। बीच में परीक्षा आदि का भी आयोजन हो रहा था। संभव हुआ तो विभाग स्तर पर इसका आयोजन होगा अन्यथा विद्यार्थियों की डिग्री और मेडल को उनके घर भिजवाने की व्यवस्था की जाएगी, जिन्हें जरूरत है वो डिग्री ले भी गए हैं।