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LU का हाल, 100 में से दे दिए 115 नंबर, अब फीस देकर स्टूडेंट्स करा रहे दुरुस्त
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 18 Dec 2017 04:55 PM IST
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लखनऊ विश्वविद्यालय में अंकपत्रों में गलतियां होना सामान्य समस्या बन चुकी है। आए दिन यहां पर अंकपत्रों में गड़बड़ियां हो रही हैं। विवि प्रशासन एक साल केे भीतर आवेदन करने पर स्टूडेंट्स से कोई फीस नहीं लेता।
इसके बाद आवेदन करने पर उसे पांच सौ रुपये का भुगतान करना होता है। विद्यार्थी के मौके पर चूकने की वजह से उसे अतिरिक्त फीस का भुगतान भी करना होता है। बार-बार अंकपत्र बनने पर विवि को भी अतिरिक्त खर्च करना होता है।
इस साल मास्टर ऑफ सोशल वर्क के लगभाग सारे अंकपत्रों में गड़बड़ी थी। विभागाध्यक्ष ने विद्यार्थियों को बंटवाये बिना ही ये अंकपत्र वापस कर दिए। वहीं जिन विभागों और कॉलेजों में अंकपत्र बांट दिए गए हैं, वहां के विद्यार्थियों को ही परेशान होना पड़ रहा है।
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छात्रों का कहना है ये माना जा सकता है छापते समय उसमें कुछ गलती हो जाए, लेकिन अंक चढ़ाने के बाद उसकी जांच भी की जाती है। जांच में भी इतनी बड़ी गलतियों पर ध्यान न देना सरासर लापरवाही है। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
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इसके बाद आवेदन करने पर उसे पांच सौ रुपये का भुगतान करना होता है। विद्यार्थी के मौके पर चूकने की वजह से उसे अतिरिक्त फीस का भुगतान भी करना होता है। बार-बार अंकपत्र बनने पर विवि को भी अतिरिक्त खर्च करना होता है।
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इस साल मास्टर ऑफ सोशल वर्क के लगभाग सारे अंकपत्रों में गड़बड़ी थी। विभागाध्यक्ष ने विद्यार्थियों को बंटवाये बिना ही ये अंकपत्र वापस कर दिए। वहीं जिन विभागों और कॉलेजों में अंकपत्र बांट दिए गए हैं, वहां के विद्यार्थियों को ही परेशान होना पड़ रहा है।
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छात्रों का कहना है ये माना जा सकता है छापते समय उसमें कुछ गलती हो जाए, लेकिन अंक चढ़ाने के बाद उसकी जांच भी की जाती है। जांच में भी इतनी बड़ी गलतियों पर ध्यान न देना सरासर लापरवाही है। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
ये हैं उदाहरण
छह महीने बाद भी नहीं मिला अंकपत्र
लखनऊ विश्वविद्यालय में एमएससी मैथ्समेटिक्स के चौथे सेमेस्टर के विद्यार्थी अब्दुल फैज अंसारी को फ्लुइड मैकेनिक्स-2 के प्रश्नपत्र में 100 में से 115 नंबर दे दिए गए। अगस्त में उन्हें अंकपत्र मिला। इसके बाद गलती सही करवाने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय में अपना अंकपत्र जमा कर दिया। इसके बाद छह महीने बीतने को हैं, लेकिन गलती दुरुस्त करके उन्हें अंकपत्र वापस नहीं मिला।
लखनऊ विश्वविद्यालय में एमएससी मैथ्समेटिक्स के चौथे सेमेस्टर के विद्यार्थी अब्दुल फैज अंसारी को फ्लुइड मैकेनिक्स-2 के प्रश्नपत्र में 100 में से 115 नंबर दे दिए गए। अगस्त में उन्हें अंकपत्र मिला। इसके बाद गलती सही करवाने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय में अपना अंकपत्र जमा कर दिया। इसके बाद छह महीने बीतने को हैं, लेकिन गलती दुरुस्त करके उन्हें अंकपत्र वापस नहीं मिला।
फेल को भी लिखा पास
लखनऊ विश्वविद्यालय के चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय बीकेटी के बीएससी एग्रीकल्चर चौथे सेमेस्टर के छात्र प्रशांत दीक्षित मशरूम कल्चर एंड एलीमेंट्री प्लांट नेमॉटोलॉजी के प्रश्नपत्र में 4.2 नंबर दिए गए हैं। विवि के नियमों के अनुसार पांच से कम क्रेटिड लाने पर पेपर क्लीयर नहीं होता है। इसके बावजूद छात्र के अंकपत्र पर पास लिखा हुुआ। छात्र का कहना है कि या तो उसके नंबर गलत चढ़े हैं या फिर रिजल्ट गलत लिखा है।
कई महीने बाद दुरुस्त हुई मार्कशीट
लखनऊ विश्वविद्यालय में एलएलबी ऑनर्स तृतीय सेमेस्टर के छात्र दिव्यांश सिंह के अंकपत्र पर सभी विषय एलएलबी थ्री इयर के पड़े हुए हैं। अंकपत्र की गड़बड़ी सुधरवाने के लिए तीन उन्होंने अपनी मार्क्सशीट जमा की। आखिरकार कई महीने बाद उन्हें दुरुस्त होकर अंकपत्र मिला।
लिपिकीय त्रुटि के कारण होता ऐसा
इस संबंध में लविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके शर्मा ने कहा कि जिन विद्यार्थियों के अंकपत्र में गड़बड़ी हो जाती है, उसे दुरुस्त करा दिया जाता है। एक साल के भीतर अंकपत्र दुरुस्त कराने पर कोई फीस भी नहीं देनी होती है। लिपिकीय त्रुटि की वजह से ऐसा हो जाता है।
लिपिकीय त्रुटि के कारण होता ऐसा
इस संबंध में लविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके शर्मा ने कहा कि जिन विद्यार्थियों के अंकपत्र में गड़बड़ी हो जाती है, उसे दुरुस्त करा दिया जाता है। एक साल के भीतर अंकपत्र दुरुस्त कराने पर कोई फीस भी नहीं देनी होती है। लिपिकीय त्रुटि की वजह से ऐसा हो जाता है।