ब्लड प्रेशर का गिरना जानलेवा भी हो सकता है, जानिए कैसे?
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सांस तेज चलने, दिमागी हालत ठीक न होने के लक्षण दिखें तो ये ‘शॉक ’ हो सकता है। ब्लड प्रेशर लो होने के कारण होने वाली इस दिक्कत के कारण 50 से 70 फीसदी मरीजों की मौत हो सकती है। इसलिए चिकित्सकों को चाहिए वह मरीजों की स्थिति पर नजर रखें जिससे जान बचाई जा सके।
‘मैनेजमेंट ऑफ शॉक इन ट्रॉमा: रीसेंट ट्रेंड’ विषय पर एक स्थानीय होटल में शनिवार को आयोजित सतत् चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में ये जानकारी केजीएमयू के ऑर्थोपैडिक सर्जन प्रो. अजय सिंह ने दी।
प्रो. अजय सिंह ने बताया कि शॉक का मतलब ब्लड प्रेशर कम हो जाना है। इससे शरीर के अंगों को ऑक्सीजन कम मिलने लगती है। इसकी वजह से मरीज को उलझन होने लगती है।
छह घंटे के अंदर इलाज ना मिले तो हो सकती है मौत
सांस तेज, शरीर ठंडा पड़ने लगे तो यह लक्षण शॉक के होते हैं। इन परिस्थितियों में मरीज को छह घंटे के अंदर इलाज न मिले तो उसकी मौत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा होने पर बच्चों में ब्लड प्रेशर तो सामान्य लगता है लेकिन इसके बावजूद लक्षण शॉक के होते हैं तो तुरंत जरूरी दवाएं शुरू कर देनी चाहिए।
जिससे मरीज का ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाए। इलाज में जितनी भी देर होगी, उतना ही मरीज को नुकसान होता जाएगा। एरा मेडिकल कॉलेज के डॉ. विकास शर्मा ने कहा कि शॉक होने पर मरीज को ब्लड प्रेशर बढ़ाने की दवा और फ्ल्यूड चढ़ाना चाहिए।
मुंबई से आए डॉ. रोहिता शेट्टी ने बताया कि शॉक के शिकार मरीज के इलाज के नई दवाएं भी बाजार में उपलब्ध हैं। यह दवाएं बहुत महंगी नहीं हैं और आसानी से अस्पतालों में उपलब्ध हैं।