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Loksabha Election 2024: श्रावस्ती के सियासी समर पर 'विदेशी नजर', कई देशों में है यहां के चुनाव की चर्चा

Mon, 22 Apr 2024 05:03 PM IST
ishwar ashish संजय तिवारी, अमर उजाला, बलरामपुर
संजय तिवारी, अमर उजाला, बलरामपुर Published by: ishwar ashish Updated Mon, 22 Apr 2024 05:03 PM IST
सार

श्रावस्ती के सियासी रुझान की जानकारी कई देश ले रहे हैं। यह भगवान बुद्ध की तपोस्थली है। वहीं, नेपाल की सीमा भी जिले से लगती है। कई विदेशी नागरिक को यहीं पर आकर बस गए हैं।

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Loksabha Election 2024: Three countries have an eye on election in Shravasti.
श्रावस्ती में स्थित कच्ची कुटी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

भारतीय लोकतंत्र की धमक पूरे विश्व में कायम है। वैसे तो संसदीय चुनाव पर अन्य देशों की नजर रहती है, लेकिन श्रावस्ती संसदीय सीट सबसे अलग ही नहीं खास भी है। यहां से नेपाल, श्रीलंका, तिब्बत समेत कई देशों की आस्था जुड़ी है। भगवान बुद्ध की तपोस्थली के साथ ही डेढ़ सौ से अधिक गांवों में उनकी चारिका स्थली (भ्रमण क्षेत्र) है, जहां बुद्ध के अनुयायी आते हैं। कुछ तो यहीं रच बस भी गए हैं। उनकी भी निगाहें श्रावस्ती के सियासी संग्राम पर टिकी है। बुद्ध तपोस्थली का नेतृत्व कैसा होगा और अभी क्या चल रहा है, इसकी जानकारी भी कर रहे हैं। उन्हें यहां के विकास के लिए राजनीतिज्ञों से बड़ी उम्मीद है।

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श्रावस्ती संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभाएं हैं, जिनमें दो श्रावस्ती जनपद की हैं। वहां बुद्ध को मानने वालों की बहुतायत है और बलरामपुर की तीन विधानसभा क्षेत्रों में भी बुद्ध को मानने वालों की कमी नहीं है। बीते दिनों लालनगर में भगवान बुद्ध की चारिका स्थली पर बड़ा कार्यक्रम हुआ, जिसमें श्रीलंका, तिब्बत व वर्मा से श्रद्धालु पहुंचे। उन्हें चल रहे सियासी संग्राम की जानकारी भी हुई। यहां पर जहां भाजपा भगवा लहराने की कोशिश में जुटी है, वहीं सपा भी पीछे नहीं है। बसपा ने अभी पत्ते तो नहीं खोले हैं, लेकिन कई नामों की चर्चाएं हो रहीं हैं। इससे बन रहे समीकरण पर इन देशों के नागरिकों की निगाहें टिकी हैं।
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नेपाल का सीमावर्ती क्षेत्र : श्रावस्ती, बहराइच व बलरामपुर मिलाकर 247 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगी है। दोनों देशों में सौहार्द बनाए रखने में श्रावस्ती संसदीय क्षेत्र की अहम भूमिका है। ऐसे में श्रावस्ती की राजनीतिक गतिविधियों पर नेपाल की सीधी नजर है। नेपाल में सक्रिय होने के कारण चीन भी यहां के सियासी समीकरण पर निगाह गड़ाए है।

नेपाल में भी है यहां के लोगों की खेती
जिले के जरवा, पचपेड़वा, गैसड़ी क्षेत्रों के काफी लोगों की नेपाल में खेती है, जहां उनका रोज का आना-जाना रहता है। कई तो भारतीय मूल के हैं और नेपाल में भी नागरिकता है। दोहरी नागरिकता का मामला कई बार सामने भी आया। इससे लोग भी चाहते हैं कि इन मसलों से आने वाली दिक्कतों को दूर करने वाले हाथ में श्रावस्ती की सियासत हो।


जरवा क्षेत्र के विवेक कुमार कहते हैं कि नेपाल से मधुर संबंध रहने से दोनों देश के लोगों को फायदा है। यहां के नेतृत्व का वहां पर भी खासा असर रहता है। इसलिए नेतृत्व प्रभावशाली व्यक्ति के हाथ में होने  से स्थानीय लोगों को फायदा होगा।

दोनों देशों की अर्थव्यवस्था से जुड़ा श्रावस्ती
श्रावस्ती जनपद भले ही दो विधानसभाओं में सिमटा है, लेकिन बलरामपुर का साथ मिलने के बाद उसका आकर बढ़ जाता है। धार्मिक नगरी होने के कारण विदेशी पर्यटकों की आवाजाही देश की अर्थव्यवस्था के लिए मुफीद है, वहीं दोनों जिले नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए भी संजीवनी का काम करते हैं।
 
- नेपाल में भगवान शिव के पशुपति नाथ मंदिर में विशेष अवसरों पर लोगों का आना जाना रहता है, वहीं नेपाल से भी लोग जनकपुर स्थित मुक्तेश्वर नाथ मंदिर व तुलसीपुर के देवीपाटन मंदिर आते हैं। इससे दोनों देशों के बीच धार्मिक रिश्ते भी हैं, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। श्रावस्ती के जनप्रतिनिधि तय होने पर यह रिश्ते और गहरे होंगे। इससे भी नेपाल की निगाहें सियासी संग्राम पर टिकी हैं।

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