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Amethi Loksabha Seat: अमेठी की जनता ने दो दलों पर लुटाया दिल, कांग्रेस व भाजपा के इर्द-गिर्द घूम रही सियासत

Fri, 05 Apr 2024 01:37 PM IST
ishwar ashish इरफान गाजी, अमर उजाला, अमेठी
इरफान गाजी, अमर उजाला, अमेठी Published by: ishwar ashish Updated Fri, 05 Apr 2024 01:37 PM IST
सार

अमेठी की सियासत सिर्फ कांग्रेस व भाजपा के इर्द-गिर्द घूम रही है। यहां पर पहली जीत कांग्रेस ने दर्ज की। गांधी परिवार का लंबे समय तक दबदबा रहा। हालांकि, 2019 के चुनाव में राहुल गांधी को हार मिली।

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Loksabha Election 2024: Politics of Amethi is revolving around BJP and Congress.
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी व कांग्रेस नेता राहुल गांधी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कहते हैं कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है। जनता के मन को जो भाया, उसको उसने सर आखों पर बिठा लिया। कुछ ऐसा ही हाल अमेठी का भी है। वर्ष 1967 में वजूद में आई अमेठी की सियासत सिर्फ दो दलों के बीच ही घूम रही है। यहां की अवाम ने अब तक सिर्फ दो दलों पर ही दिल लुटाया है। पहले कांग्रेस व अब भाजपा, दो ही ऐसे दल हैं जिन्होंने अब तक अमेठी में चुनावी जीत का परचम लहराया है। एक बार 1977 में जनता पार्टी एक बार आई। यहां से बसपा के संस्थापक कांशीराम और आप से डॉ. कुमार विश्वास जैसी कई नामचीन शख्सियतों ने भी अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन यहां की सियासत की बड़ी सोच रखने वाली जनता ने उन्हें भी भाव नहीं दिया। सपा ने भी दो बार यहां से उम्मीदवार उतारे, लेकिन वह भी जनता का भरोसा नहीं जीत पाई।

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237 निर्दलियों ने भी आजमाई किस्मत
अमेठी लोकसभा भले ही कांग्रेस व भाजपा के खात में रही हो, लेकिन यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत के लिए खूब जोर लगाया। यहां अब तक तकरीबन 237 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है। 1996 व 1989 के रण में 42-42 निर्दलीय तक चुनाव मैदान में रहे। अमेठी में तकरीबन हर लोकसभा चुनाव में निर्दलियों ने भी किस्मत आजमाई, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। 1971 के चुनाव में एक भी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतरा।
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पहली जीत कांग्रेस की
- यहां पहली जीत कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी को मिली थी। वह 1967 व 1971 में अमेठी के सांसद रहे। इसके बाद यह सीट जनता पार्टी के खाते में चली गई। 1977 के चुनाव में जनता दल के रवींद्र प्रताप ने संजय गांधी को हराया था। उसके बाद 1980 से 1996 तक इस सीट पर लगातार कांग्रेस का कब्जा रहा। 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से संजय सिंह ने जीत दर्ज की, लेकिन अगले ही 1999 के चुनाव में यह सीट फिर कांग्रेस के खाते में चली गई।

- 1999 से 2014 तक फिर तकरीबन 20 साल यह सीट कांग्रेस के खाते में रही। इसके बाद 2019 के चुनाव में इस सीट पर तीसरी बार भाजपा ने कब्जा कर लिया। इस लिहाज से लोकसभा चुनाव अमेठी की सियासत मात्र दो ही बड़े दलों कांग्रेस व भाजपा के ईद-गिर्द घूमती रही। इसके आगे अब जनता तय करेगी कि यहां किसका परचम लहराएगा।

237 निर्दलियों ने भी आजमाई किस्मत
अमेठी लोकसभा भले ही कांग्रेस व भाजपा के खाते में रही हो, लेकिन यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत के लिए खूब जोर लगाया। यहां अब तक तकरीबन 237 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है। 1996 व 1989 के रण में 42-42 निर्दलीय तक चुनाव मैदान में रहे। अमेठी में तकरीबन हर लोकसभा चुनाव में निर्दलियों ने भी किस्मत आजमाई, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। 1971 के चुनाव में एक भी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतरा।

कुल मतदाता -- 17,86,125
पुरुष मतदाता -- 9,37,147
महिला मतदाता -- 8,48, 878
थर्ड जेंडर -- 100

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