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अंतिम दो चरण : एनडीए-इंडिया लगातार बदल रहे रणनीति, भाजपा ने अलग-अलग समूहों को लगाया
Fri, 24 May 2024 01:28 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 24 May 2024 01:28 AM IST
सार
यूपी में अगले दो चरणों में पूर्वांचल की छह सीटों पर मतदान होना है। इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष लगातार अपनी रणनीति बदल रहे हैं। पूर्वांचल की 6 सीटों पर भाजपा ने 40 हजार से कम वोटों से जीत दर्ज की थी।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
पूर्वांचल की 27 सीटों पर अगले दो चरणों में चुनाव होने हैं। इनमें से छह सीटें ऐसी हैं, जिन्हें पिछली बार भाजपा ने 40 हजार से कम वोटों के अंतर से जीता था। इन पर सभी की निगाहें लगी हैं। इन सीटों पर एनडीए ही नहीं, इंडी गठबंधन भी एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। शह और मात देने के लिए वरिष्ठ नेताओं की जनसभाओं के साथ ही बूथ स्तर पर भी लगातार रणनीति बदली जा रही है।
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2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 40 सीटें 50 हजार से कम वोटों के अंतर से जीती थीं। इनमें उत्तर प्रदेश की 12 सीटें थीं, जिनमें छह सीटें पूर्वांचल की हैं। पूर्वांचल की इन सीटों पर हार-जीत का अंतर 40 हजार से भी कम रहा था। भाजपा ने बलिया में उम्मीदवार बदल दिया है, तो अन्य सीटों पर जीते हुए सांसदों पर दांव लगाया है। वहीं, सपा ने चार सीटों पर नए चेहरे उतारे हैं।
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चुनाव से ठीक पहले इन सीटों पर एनडीए और इंडी गठबंधन ने एक-एक वोट का हिसाब रखना शुरू कर दिया है। क्योंकि इतने कम अंतर से जीती गई सीट पर इस चुनाव में ज्यादा खतरा है।
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यही वजह है कि कम अंतर से जीती गई सीटों पर कोई भी नुकसान रोकने के लिए भाजपा ने स्थानीय नेताओं के साथ अलग-अलग समूहों के बीच बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। यही नहीं बूथवार कई अहम बदलाव भी किए हैं। बूथ पर मतदाताओं को जोड़ने के लिए जिला स्तरीय पदाधिकारियों को जिम्मा सौंपा है। वहीं सपा ने फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। उदाहरण के लिए पिछले चुनाव में देश भर में सबसे कम अंतर से (महज 181 वोट) भाजपा ने मछलीशहर सीट जीती थी। यहां की स्थिति देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीडी कॉलेज की जनसभा में मछलीशहर जिताने की बार-बार अपील की।
इसी तरह मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र के मड़ियाहूं में गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सभा कर चुके हैं। सपा के अन्य नेताओं के साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी दो सभाएं कर चुके हैं। यही स्थिति अन्य लोकसभा क्षेत्रों में भी है।
ये सीटें हैं अहम
मछलीशहर : सिर्फ 181 वोट से जीते बीपी सरोज पर भाजपा ने दोबारा दांव लगाया है, जबकि सपा और बसपा ने यहां से नए उम्मीदवार उतारे हैं। भाजपा को पिंडरा विधानसभा क्षेत्र से ज्यादा भरोसा है, तो सपा युवाओं का झुकाव मान रही है।
चंदौली : भाजपा ने 13,959 वोट से जीतने वाले महेंद्र नाथ पांडेय पर फिर दांव लगाया है, जबकि सपा ने इस बार संजय चौहान के बजाय वीरेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है। महेंद्र नाथ पांडेय भाजपा सरकार में कई बार मंत्री रहे, तो वीरेंद्र सिंह कांग्रेस और बसपा से विधायक रहे। कल्याण सिंह एवं मुलायम सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
सुल्तानपुर : भाजपा ने 14,526 वोट से जीतने वाली मेनका गांधी को फिर मौका दिया है, जबकि सपा ने बसपा सरकार में मंत्री रहे रामभुआल निषाद पर दांव लगाया है। भाजपा को मेनका के नाम और सरकार के काम पर भरोसा है, तो सपा जातिगत वोटबैंक के सहारे है।
बलिया : भाजपा ने 15,519 वोट से जीतने वाले वीरेंद्र सिंह मस्त के बजाय इस बार नीरज शेखर को मैदान में उतारा है, जबकि सपा ने सनातन पांडेय पर दोबारा दांव लगाया है। भाजपा केंद्र सरकार के काम से साथ ही प्रत्याशी की साफ-सुथरी छवि और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से भावनात्मक लगाव के सहारे है। सपा मुस्लिम और पिछड़े वर्ग की गोलबंदी के साथ ब्राह्मण वोटबैंक को अपना मान रही है।
बस्ती : भाजपा ने 30,354 वोट से जीतने वाले हरीश द्विवेदी पर दोबारा दांव लगाया है, जबकि सपा ने पिछली बार बसपा के टिकट पर मैदान में रहे राम प्रसाद चौधरी को मैदान में उतारा है। भाजपा परंपरागत वोटबैंक के साथ केंद्र और राज्य सरकार के कामकाज को अहम बता रही है, तो सपा कुर्मी व परंपरागत वोटबैंक के साथ दलितों में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
कौशांबी : भाजपा ने 38,722 वोट से जीतने वाले विनोद सोनकर को दोबारा मैदान में उतारा है, तो सपा ने इंद्रजीत सरोज के बजाय उनके बेटे पुष्पेंद्र सरोज पर दांव लगाया है। भाजपा परंपरागत वोटबैंक के साथ विकास कार्य को अहम मान रही है, तो सपा परंपरागत वोटबैंक के साथ युवाओं के झुकाव का दावा कर रही है।