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नहीं निकला नतीजा, लोकायुक्त की नियुक्ति पर फिर फंसा पेंच

Mon, 28 Sep 2015 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 28 Sep 2015 12:23 AM IST
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Lokayukta appointment to be delayed.

प्रदेश में लोकायुक्त के चयन के लिए रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक बेनतीजा रही। बैठक में इस मसले पर कानूनी राय लेने को लेकर सहमति बनी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य भी इस बैठक में शामिल हुए।

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चीफ जस्टिस ने लोकायुक्त चयन के लिए राज्य विधानमंडल से नया नियम बनवाने के बाद पुराने नियम से चयन के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने सुझाव दिया कि इस बिंदु पर कानूनी राय ली जानी चाहिए। इसके बाद ही आगे की कार्यवाही पर विचार होना चाहिए।
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इसके बाद समिति के बीच किसी वरिष्ठ अधिवक्ता से विधिक राय लेने के बाद इसी सप्ताह किसी दिन अगली बैठक करने पर सहमति जताई गई।

राज्यपाल राम नाईक द्वारा लोकायुक्त के लिए जस्टिस रविंद्र सिंह का नाम खारिज करने के बाद राज्य सरकार ने एक बार फिर पुराने नियम के अनुसार ही लोकायुक्त चयन के लिए बैठक बुलाई थी। इससे पहले 17 सितंबर को चयन समिति की बैठक रखी गई थी लेकिन व्यस्तता के कारण चीफ जस्टिस नहीं आ सके थे और बैठक स्थगित हो गई थी।

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पुराने नियम से नियुक्ति की वैधता पर उठाए सवाल

Lokayukta appointment to be delayed.

रविवार को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर चयन समिति की बैठक हुई। सूत्रों ने बताया कि लोकायुक्त चयन के लिए सरकार ने एक पैनल भी तैयार किया था लेकिन बैठक की शुरुआत में ही मुख्य न्यायाधीश ने पुराने नियम से नियुक्ति की वैधता का सवाल उठा दिया। ऐसे में पैनल पर चर्चा की नौबत ही नहीं आई।

संकेत है कि सरकार जल्द से जल्द विधिक राय लेकर इसी सप्ताह चयन समिति की अगली बैठक बुला सकती है।

बैठक पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा‘मुख्य न्यायाधीश से अच्छी बात हुई है। बैठक में यह मुद्दा उठा कि लोकायुक्त के चयन में जब संशोधन प्रक्रिया चल रही है, तो क्यों न इस संबंध में विधिक राय ले ली जाए। अब विधिक राय लेने के बाद लोकायुक्त चयन संबंधी अगली बैठक बुलाई जाएगी। लोकायुक्त का चयन संविधान के दायरे में होगा। इसमें कुछ वक्त लग सकता है।’

अब तक का घटनाक्रम

Lokayukta appointment to be delayed.

- लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों में मुख्यमंत्री, चीफ जस्टिस व नेता प्रतिपक्ष द्वारा आपसी विचार-विमर्श से लोकायुक्त का नाम तय कर राज्यपाल को भेजने की व्यवस्था है।

- मौजूदा प्रक्रिया में पहले चीफ जस्टिस और बाद में राज्यपाल द्वारा लोकायुक्त के लिए जस्टिस रविंद्र सिंह का नाम खारिज कर देने के बाद सरकार ने विधानमंडल से उ.प्र. लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त संशोधन विधेयक पास कराकर चयन प्रक्रिया में चीफ जस्टिस की भूमिका ही समाप्त कर दी।

- संपूर्ण विपक्ष के विरोध के बावजूद विधानमंडल से बहुमत के बल पर इस विधेयक को पारित कराने पर सरकार को चारों ओर कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी। इसके बाद सरकार ने लोकायुक्त के मुद्दे पर टकराव टालने के लिए लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार नए सिरे से लोकायुक्त का नाम तय करने की पहल की।

- विधानमंडल से नया अधिनियम पारित होने के बाद मौजूदा प्रावधानों के अनुसार पहली बैठक 17 सितंबर को बुलाई गई थी। तब चीफ जस्टिस की व्यस्तता की वजह से यह बैठक नहीं हो पाई थी।

- रविवार को दूसरी बैठक हुई। इसमें चयन प्रक्रिया पर विचार विमर्श हुआ और विधिक राय लेने के बाद अगली बैठक पर सहमति बनी।

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