अटल के घर में राजनाथ से कहीं कांग्रेस के प्रमोद लड़े तो कहीं पूनम सिन्हा, लखनऊ ने ऐसे किया वोट
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पांचवें चरण के मतदान में राजधानी के वोटर तीन खेमों में दिखे और इलाके के हिसाब से इनके वोट भी अपनी-अपनी पसंद के उम्मीदवारों को गए। अटल के गढ़ में मोदी लहर पर सवार भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह को समर्थन मिला तो अंतिम समय में मन बदलने वालों का भी भरपूर साथ मिला। नतीजा यह हुआ कि राजनाथ के साथ कहीं कांग्रेस के प्रमोद कृष्णम लड़े तो कहीं पूनम सिन्हा।
मुस्लिम मन ने भाजपा को रोकने के नाम पर कहीं गठबंधन का साथ दिया तो कहीं उसने दिल्ली में भाजपा का विकल्प बनने की क्षमता का आकलन करते हुए कांग्रेस को वोट देना मुनासिब समझा। वोटों का यह बंटवारा हुसैनाबाद, चौपटिया, विक्टोरिया स्ट्रीट और कश्मीरी मोहल्ला जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में राजनाथ को आगे निकाल ले गया।
राजधानी में तापमान बढ़ने और घटने के साथ ही बूथों पर मतदाता बढ़ते-घटते रहे। अलग-अलग इलाकों में राजनीतिक रुझान भी बदलता रहा। विकासनगर, अलीगंज, इंदिरानगर, जानकीपुरम, गोमतीनगर, हजरतगंज, आलमबाग, सिंगारनगर जैसे इलाकों में लोग भाजपा के राजनाथ और प्रमोद कृष्णम को जिताते-हराते नजर आए तो इन्हीं कालोनियों के बीच खुर्रमनगर, चौधरी टोला, शादाब कॉलोनी और उजरियांव जैसे इलाकों में भाजपा की जीत का रास्ता रोकने के लिए कहीं गठबंधन तो कहीं कांग्रेस को वोट मिलता दिखा।
समीकरणों का खेल: इन इलाकों में ये रहा हाल
अशर्रफाबाद के गिरधारी सिंह इंदर कुंवर इंटर कॉलेज में सतीश चौरसिया को भाजपा की गठबंधन से लड़ाई दिख रही है तो हसन अब्बास को राजनाथ और प्रमोद कृष्णम में मुकाबला दिखता है। खाने-खिलाने के मामले में सबसे अव्वल माना जाने वाला चौक इलाका सियासी चटखारे के लिए भी जाना जाता है।
यहां कालीचरण कॉलेज में विपुल रस्तोगी ने बताया कि 70 प्रतिशत पर राजनाथ का कब्जा और 30 प्रतिशत पर बाकी सब हैं। पारा क्षेत्र में बुद्घेश्वर और आसपास के इलाके में यादव मतदाता अच्छी संख्या में रहते है। यहां लोगों का रुझान गठबंधन की तरफ दिखता है। पर, मुस्लिम मतदाताओं में यहां भी बंटवारा नजर आया। हालांकि यहां भी लोगों को मुकाबला राजनाथ सिंह से ही दिखता है।
अमीनाबाद में महिला डिग्री कॉलेज और अमीनाबाद इंटर कॉलेज के आसपास बड़ी संख्या में मुस्लिम रहते हैं। यहां मो. तालिब लड़ाई गठबंधन और कांग्रेस के बीच बताते हैं और राजनाथ को आगे जाते हुए देखते हैं।
इन जगहों पर हुई साइकिल और कमल की लड़ाई
महमूदल हसन की मानें तो महिला डिग्री कॉलेज में साइकिल और कमल की लड़ाई हुई है पर, महिला कॉलेज में ही वोट डालने आए नवीन रस्तोगी भाजपा को भारी बताते हैं। सदर के हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज में रिजवान, इरफान और मोअज्जम कांग्रेस और भाजपा में टक्कर बताते हैं।
वहीं, 40 वर्षीय रामदुलारी साइकिल और कमल के फूल में मुकाबला देखती है। वंदना सिंह पूरे कैंट में कांग्रेस और भाजपा के बीच लड़ाई देखती हैं। वंदना की बात ने सुबह सेक्टर 14 इंदिरानगर के पास मिले राजेंद्र तिवारी की याद दिला दी।
राजेंद्र तिवारी ने बताया था, ‘ध्यान रखिए इस बार लखनऊ में किसी प्रमुख दल से कोई मुस्लिम प्रत्याशी न होने से मुस्लिम मतदाता गठबंधन और कांग्रेस के बीच बंट रहा है। राजधानी में पहाड़ के रहने वाले लोगों के भी लगभग दो लाख वोट हैं। इनका रुझान भाजपा के पक्ष में हैं।
बातों के पीछे क्या है....
विकासनगर में रानीलक्ष्मी बाई स्कूल के पास मिले एक मोबाइल कंपनी में काम करने वाले अभिनव बताते हैं, ‘यहां एक तरफ मोदी हैं और दूसरी तरफ कांग्रेस लड़ रही है। पर, राजनाथ से काफी पीछे।’ उनके पास ही खड़े मो. शारिक भी उनकी हां में हां मिलाते हुए कहते हैं, ‘गठबंधन दिल्ली में सरकार तो बना नहीं पाएगा, इसलिए कांग्रेस को वोट दे रहे हैं।’
कॉलोनियों से पुराने लखनऊ पहुंचे। यहां हुसैनाबाद के यूनिटी कॉलेज मतदान केंद्र दोपहर में भी मतदाताओं से गुलजार रहे। यहां युवा बाकर कहते हैं, ‘लड़ाई कमल और कांग्रेस के बीच है।’ पर, आशीष श्रीवास्तव बताते हैं ‘सपा और भाजपा के बीच वोट जा रहे हैं।’ बुनियादबाग, यतीम खाने और नूर बाड़ी में मतदान केंद्रों पर सुबह से लंबी कतारें दिखीं। इस इलाके का मिजाज नाजिम ने बताया, बोले ‘यहां साइकिल और पंजे’ की लड़ाई है।
पुल गुलाम हुसैन पर मतदान केंद्र के 200 मीटर की दूरी पर एक चबूतरे पर बैठे अब्दुल सिद्दीकी वोट देने जा रहे लोगों के मोबाइल जमा कर रहे थे। नाजिम की बात से इत्तफाक नहीं रखते। बताते हैं, ‘सुबह कुछ कंफ्यूजन था लेकिन 12 बजे के बाद मुस्लिम कांग्रेस के साथ जा रहा है।