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मायावती के लिए चुनौती बने चंद्रशेखर के सवाल, बढ़ सकती हैं बसपा की मुश्किलें

Tue, 02 Apr 2019 12:52 PM IST
ishwar ashish महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 02 Apr 2019 12:52 PM IST
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lok sabha elections 2019 chandrashekhar's question put challenges against mayawati.
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर व मायावती। - फोटो : amar ujala

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को कभी कांग्रेस और कभी भाजपा का एजेंट बताकर मोर्चा खोला तो चंद्रशेखर ने मायावती पर कड़े पलटवार में देरी नहीं लगाई। अनुसूचित जाति के वोट बैंक को लेकर छिड़े इस घमासान में जुबानी जंग केवल मायावती व चंद्रशेखर के बीच ही नहीं चल रही है, दोनों के समर्थक भी सोशल मीडिया पर भिड़े हुए हैं। आम चुनाव के बीच चंद्रशेखर ने जो सवाल उठाए हैं, वे बसपा के लिए चिंता का सबब बन सकते हैं।

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दरअसल, चंद्रशेखर ने दो अहम सवाल उठाए हैं। पहला, बसपा संस्थापक कांशीराम के समय के लोग पार्टी क्यों छोड़ गए। दूसरा, जिन सवर्णों को टिकट दिया जा रहा है, उनका बहुजन मूवमेंट में क्या योगदान है?
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ये दोनों ही सवाल पहले भी उठते रहे हैं। बसपा में आज न तो कांशीराम के जमाने के बड़े नेता बचे हैं और न ही बामसेफ के पुराने साथी। एक-एक कर उन्हें या तो निकाल दिया गया या उन्हें खुद ही पार्टी छोड़कर जाने की नौबत आ गई।
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कांशीराम के समय के राज बहादुर, जंग बहादुर पटेल, बरखूराम वर्मा, डॉ. मसूद, आरकेचौधरी, स्वामी प्रसाद मौर्य, नसीमुद्दीन सिद्दीकी और इंद्रजीत सरोज सहित तमाम नेताओं की लंबी लाइन है जो आज बसपा से बाहर हैं। इसके अलावा इस लोकसभा चुनाव में भी कई बाहरियों, अवसरवादियों को स्थानीय काडर पर तरजीह दी गई है।

मायावती को बताया मनुवादी

lok sabha elections 2019 chandrashekhar's question put challenges against mayawati.
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala

इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच बात मायावती को ही मनुवादी बताने तक पहुंच गई है। चंद्रशेखर ने अपने एक फॉलोअर के ऐसे गंभीर आरोप को रीट्वीट कर सरगर्मी बढ़ा दी है। गठबंधन कर पार्टी का वोट शेयर बढ़ाने की लड़ाई में जुटी बसपा के लिए ऐसे सवाल चुनौती बन सकते हैं।

मायावती ने किए ये वार
- देश में एससी व ओबीसी वर्ग के अधिकतर संगठन व छोटी-छोटी पार्टियां चुनाव में बसपा को नुकसान पहुंचाने व एससी-ओबीसी विरोधी पार्टियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनी हैं। भाजपा जैसे दल ऐसी पार्टियों का अपने-अपने हिसाब से इस्तेमाल करते रहे हैं।

- दलितों का वोट बांटकर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए ही बीजेपी भीम आर्मी के चंद्रशेखर को वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़वा रही है।

- भीम आर्मी को भाजपा ने ही षड्यंत्र के तहत बनवाया है और इसकी आड़ में भी अपनी अनुसूचित जाति विरोधी मानसिकता वाली घिनौनी राजनीति कर रही है।

- बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए एक-एक वोट बहुत कीमती है। इसे किसी हाल में बर्बाद न होने दें।

चंद्रशेखर ने किया ये पलटवार

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- मैंने 16 महीने रासुका में जेल किस पार्टी से दुश्मनी के तहत काटी? किस मुख्यमंत्री के विरोध के कारण आज भी मुझ पर 53 मुकदमे दर्ज हैं? कभी कहती हैं कांग्रेस का एजेंट है, कभी बीजेपी एजेंट बताती हैं। आपके ऐसे बयान बहुजन समाज को आपस में बांट ही रहे हैं।

- बहुजन विरोधी मनुवादी सवर्णों को टिकट दिए जा रहे हैं और मिशनरी कार्यकर्ताओं को एजेंट बताया जा रहा है। जिन सवर्णों को टिकट मिला है, उनका बहुजन मिशन में क्या योगदान है?

- कांशीराम की टीम के साथियों को एक-एक कर बसपा से निकलवा दिया। आज इतने बड़े विरोध के बावजूद ब्राह्मणवादी, संविधान विरोधी लोगों को टिकट देकर संसद में भेजने की तैयारी चल रही है।

मायावती इसलिए मान रहीं चंद्रशेखर को चुनौती

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- यूपी में अनुसूचित जातियों की आबादी करीब 21 फीसदी है। मायावती अर्से से इस वर्ग की सर्वमान्य नेता मानी जाती रही हैं।

- पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस वोट बैंक में सेंध लगाई है और मौजूदा लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ कांग्रेस की भी इस पर नजर है।

- भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने अनुसूचित जाति के युवा नेता के तौर पर तेजी से पहचान बनाई है और अपनी गतिविधियों का केंद्र पश्चिमी यूपी तक सीमित न कर पूर्वांचल तक बढ़ाया है। दिल्ली और राजस्थान तक सक्रियता बढ़ाई है।

- चंद्रशेखर का वाराणसी से चुनाव लड़ने का एलान उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि पीएम नरेंद्र मोदी के सामने चुनाव लड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जाति के उभरते चेहरे के रूप में पहचान मिलने की संभावना।

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