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अमित शाह और सीएम योगी की देर रात तक चली बैठक, अवध की 16 सीटों पर हुआ मंथन

Tue, 09 Apr 2019 10:17 AM IST
रचना शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रचना शर्मा Updated Tue, 09 Apr 2019 10:17 AM IST
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lok sabha elections 2019 Amit Shah meeting in Lucknow
लखनऊ में अमित शाह - फोटो : अमर उजाला
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार रात यहां अवध क्षेत्र में चुनाव प्रबंधन से जुड़े लोगों को जीत का मंत्र देने के साथ ही असंतुष्टों को साधने पर जोर दिया। उन्होंने समझाया कि दिल्ली के ताज के लिए अवध की 16 सीटों पर भाजपा का परचम फहराना जरूरी है।
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उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश प्रभारी जेपी नड्डा, महामंत्री संगठन सुनील बंसल और अवध क्षेत्र के प्रभारी जेपीएस राठौर के  साथ देर रात बैठक कर सभी 16 सीटों के प्रभारियों, संचालक, जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारियों के साथ चुनाव प्रबंधन पर बात की।
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अवध क्षेत्र में लखनऊ, मोहनलालगंज, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर, धौरहरा, लखीमपुर, हरदोई, मिश्रिख, फैजाबाद, बाराबंकी, अंबेडकरनगर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच और कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र हैं। भाजपा ने अवध की 16 सीटों को सीतापुर, अयोध्या, गोंडा और लखनऊ क्लस्टर में बांटा है। इस बार अवध क्षेत्र में कई नए चेहरे हैं।
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छह लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा ने नये उम्मीदवार उतारे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में अवध क्षेत्र की 16 सीटों में रायबरेली को छोड़कर 15 पर भाजपा जीती थी। रायबरेली में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चुनाव जीता था।

भाजपा ने इस बार रायबरेली भी कांग्रेस से छीनकर अवध की सभी 16 सीटों पर भगवा परचम फहराने की रणनीति बनाई है। अंबेडकरनगर के अलावा सभी सीटों के प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।

सोमवार रात 11 बजे लखनऊ पहुंचे अमित शाह ने पहले सीतापुर, गोंडा, अयोध्या और लखनऊ क्लस्टर की लोकसभा सीटों के प्रभारी और संचालकों के साथ बैठक की। इसके बाद एक-एक लोकसभा क्षेत्र के बारे में जानकारी ली।

शाह ने पूछा कि भाजपा प्रत्याशी के मुकाबले सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस का उम्मीदवार कौन है? वहां की जातीय स्थिति क्या है, गठबंधन और कांग्रेस में भाजपा का मुकाबला किससे होने की संभावना है, विरोधियों की ताकत और कमजोरी क्या है? भाजपा उम्मीदवार की स्थिति क्या है और किन तरीकों से भाजपा की स्थिति को और मजबूत बनाया जा सकता है?

शाह ने यह भी समझा कि कौन-कौन से ऐसे चेहरे हैं, जिन्हें साथ लेकर भाजपा की स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है। जिन सांसदों का टिकट काटा गया है, उनकी और उनके समर्थकों की चुनाव में भूमिका की जानकारी भी ली।

वोटों के ध्रुवीकरण की स्थिति समझी

अवध क्षेत्र में ही फैजाबाद लोकसभा सीट भी है जहां अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि स्थल है। शाह ने मंदिर मुद्दे पर माहौल की स्थिति को भी समझा। खासतौर से अवध क्षेत्र की कई सीटों पर मुस्लिम-यादव और अनुसूचित जाति की काफी आबादी को देखते हुए उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं का रुझान और अनुसूचित जाति तथा यादव वोटों के गठजोड़ की जमीनी सच्चाई को भी समझने की कोशिश की।

यह भी जाना कि कार्यकर्ताओं के बीच उम्मीदवारों को लेकर कहीं कोई नाराजगी या विरोध जैसी परिस्थितियां तो नहीं हैं। उन्होंने चुनाव प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों को अपने वोट बैंक को जोड़े रखने के साथ उन्हें बूथों पर पहुंचाने पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने भाजपा के संकल्प पत्र और लोगों के लिए चलाई गई योजनाओं की जानकारी देने पर भी जोर दिया।

साथ ही समझाया कि भाजपा कार्यकर्ता जनता को संकल्प पत्र का हवाला देते हुए आश्वस्त करें कि भाजपा मंदिर पर गंभीर है। समान नागरिक संहिता, तीन तलाक जैसे मुद्दों को लोगों के बीच रखकर समझाएं कि भाजपा राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है, जबकि दूसरे दल अलगाववादियों का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में अलगाववादियों पर प्रहार करें, तुष्टीकरण को समाप्त करें। इसलिए इस बार फिर मोदी सरकार की बात लोगों को समझाएं।

बैठक में सह प्रभारी गोवर्धन भाई झडपिया, क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रद्युम्न कुमार, क्षेत्रीय अध्यक्ष सुरेश तिवारी भी मौजूद रहे। उधर, बांदा के सांसद भैरो मिश्रा के समर्थक उनके टिकट कटने पर नारेबाजी कर रहे थे। और भी कई प्रमुख लोग आये थे जो शाह से मिलने के लिए प्रयासरत थे लेकिन, संपर्क नहीं हो सका।

बची सीटों के उम्मीदवारों पर मंथन

भाजपा ने अभी गोरखपुर, देवरिया, संतकबीरनगर, अंबेडकरनगर, प्रतापगढ़, जौनपुर, घोसी और भदोही में अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। शाह ने इन क्षेत्रों की संभावना और दावेदारों की स्थिति पर चर्चा की। संकेत मिले हैं कि एक-दो दिन में इन सभी क्षेत्रों के उम्मीदवार घोषित कर दिए जाएंगे।

निषाद और राजभर पर जल्द होगा फैसला
सपा-बसपा गठबंधन छोड़कर भाजपा में शामिल हुए गोरखपुर के सपा सांसद प्रवीण निषाद और उनके पिता डॉ. संजय निषाद की पार्टी निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) तथा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर की मांगों पर भी शाह के समक्ष चर्चा हुई। इनका समायोजन कहां होगा, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ लेकिन, संकेत यही है कि एक-दो दिन में इन पर भी फैसला हो जाएगा।
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