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ओम प्रकाश राजभर बोले-13 को ही दे दिया था इस्तीफा, मगर भाजपा स्वीकार नहीं कर रही

Mon, 06 May 2019 08:11 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 06 May 2019 08:11 PM IST
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lok sabha election 2019 : op rajbhar release big statement says resigned on 13
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर - फोटो : amar ujala
प्रदेश सरकार में भाजपा की सहयोगी सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को दावा किया है कि 13 अप्रैल को ही वह योगी कैबिनेट से इस्तीफा दे चुके हैं। 
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साथ ही राजभर ने यह भी खुलासा किया है कि उनके अलावा पार्टी के महासचिव अरविंद राजभर का लघु उद्योग विकास निगम और प्रवक्ता राना अजित सिंह का बीज विकास निगम के अध्यक्ष पद से इस्तीफा हो चुका है। अब मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है कि वह सबका इस्तीफा स्वीकार करें। 
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उन्होंने कहा कि इस्तीफा देने के बाद भाजपा से उनका कोई लेना-देना नहीं हैं, फिर भी भाजपा के लोग चुनाव में फायदा लेने के लिए उनकी पार्टी के झंडा व उनके फोटो का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसकी शिकायत उन्होंने चुनाव आयोग में दर्ज करा दी है। 
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सोशल मीडिया पर चल रही इससे संबंधित खबरों की पुष्टि करते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राजभर ने कहा कि लोकसभा सीट के बंटवारे के मुद्दे पर 13 अप्रैल की रात को मुख्यमंत्री के बुलावे पर वह सीएम आवास पहुंचे थे। जहां पर उनपर एक सीट देकर भाजपा के ही सिंबल पर चुनाव लड़ने का दबाव डाला जा रहा था।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की पेशकश को उन्होंने ठुकरा कर घर लौट आए थे। उन्होंने बताया कि घर पर ही मैने इस्तीफा टाइप कराया और उसी रात को 3 बजे फिर से सीएम आवास पहुंचा तो बताया गया कि मुख्यमंत्री सोने चले गए हैं। 

इसपर हमने सीएम के एक ओएसडी को त्यागपत्र की कॉपी दिया तो उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर का मामला बताकर इस्तीफा लेने से इंकार कर दिया। लिहाजा इस्तीफे की एक कॉपी वहीं छोड़ कर चला आया।

राजभर ने बताया कि अपने साथ वह पार्टी के दो दायित्वधारी अरविंद राजभर और राना अजीत सिंह का त्यागपत्र भी सीएम को दे आए हैं। अरविंद ओमप्रकाश के बेटे हैं। इन दोनों को हाल में भाजपा ने दायित्व सौंपा था।

राजभर ने कहा कि अब तक मुख्यमंत्री के यहां से इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बारे में उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन के भारी मतो से विजयी होने का भी दावा किया है।

चुनाव आयोग पर भी लगाया मिलीभगत का आरोप  

राजभर ने चुनाव आयोग पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहना है कि चुनाव में फायदा लेने के लिए मुख्यमंत्री जहां मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहे हैं, वहीं भाजपा प्रत्याशियों द्वारा मेरी पार्टी का झंडा और फोटो का उपयोग अपने प्रचार में किया जा रहा है। 

जबकि सुभासपा भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ रही है और भाजपा से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसकी लिखित शिकायत उन्होंने चुनाव आयोग से किया है, फिर भी आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं किया। इससे स्पष्ट है कि आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है।
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