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लोहिया संस्थान : कैंसर व दिल का होगा आधुनिक इलाज, बोन मैरो प्रत्यारोपण भी होगा शुरू
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लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान कैंसर के साथ ही दिल बीमारियों के आधुनिक इलाज का प्रमुख केंद्र बनेगा। संस्थान को कुल 1085 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ है। इसमें 250 करोड़ रुपये मशीन-उपकरण और 200 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों के लिए हैं।
संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने बताया कि मशीन और उपकरण मद में मिलने वाली धनराशि में से 20 करोड़ रुपये से यह एडवांस्ड रोबोटिक सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इससे कैंसर की जटिल सर्जरी हो सकेंगी। इसके साथ ही 4.5 करोड़ रुपये से कार्डियक लेजर एंजियोप्लास्टी (सीएलए) की खरीद होगी। यह एक न्यूनतम इनवेसिव तकनीक है जो कैथेटर के माध्यम से पराबैंगनी प्रकाश का उपयोग करके कोरोनरी धमनियों में जटिल, कैल्शियमयुक्त या दीर्घकालिक रुकावट को वाष्पीकृत करके इलाज करती है। इससे स्टेंट के संक्रमण होने की आशंका भी कम रहती है।
स्थापित होगी प्रत्यारोपण इकाई
संस्थान में एक करोड़ रुपये से एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) प्रत्यारोपण इकाई की स्थापना होगी। इससे यहां अंग और बोन मैरो प्रत्यारोपण करने में आसान होगी। इसके साथ ही संस्थान में 4.5 करोड़ रुपये से रोबोटिक ऊपरी अंग कार्यात्मक चिकित्सा उपकरण लाया जाएगा। यह मशीन स्ट्रोक या रीढ़ की हड्डी की चोट के मामलों में मशीन और सॉफ्टवेयर का उपयोग करके मरीज को जल्द रिकवर करने में मदद करती है। इसी तरह एक करोड़ रुपये की लागत से सर्जरी के मामले में सर्जन की मदद के लिए थ्रीडी प्रिंटर लिया जाएगा। इससे सर्जरी से पहले सर्जरी की थ्रीडी इमेज तैयार की जा सकेगी। 1.2 करोड़ रुपये से रीढ़, घुटने, टखने की इमेजिंग के लिए भार वहन करने वाली स्थायी चुंबक एमआरआई मशीन आएगी। 15 करोड़ रुपये से आने वाला ड्यूल एनर्जी सीटी (डीईसीटी) स्कैनर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस होगा। इससे मरीजों की जांच और विश्लेषण का काम जल्दी होगा।
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संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने बताया कि मशीन और उपकरण मद में मिलने वाली धनराशि में से 20 करोड़ रुपये से यह एडवांस्ड रोबोटिक सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इससे कैंसर की जटिल सर्जरी हो सकेंगी। इसके साथ ही 4.5 करोड़ रुपये से कार्डियक लेजर एंजियोप्लास्टी (सीएलए) की खरीद होगी। यह एक न्यूनतम इनवेसिव तकनीक है जो कैथेटर के माध्यम से पराबैंगनी प्रकाश का उपयोग करके कोरोनरी धमनियों में जटिल, कैल्शियमयुक्त या दीर्घकालिक रुकावट को वाष्पीकृत करके इलाज करती है। इससे स्टेंट के संक्रमण होने की आशंका भी कम रहती है।
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स्थापित होगी प्रत्यारोपण इकाई
संस्थान में एक करोड़ रुपये से एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) प्रत्यारोपण इकाई की स्थापना होगी। इससे यहां अंग और बोन मैरो प्रत्यारोपण करने में आसान होगी। इसके साथ ही संस्थान में 4.5 करोड़ रुपये से रोबोटिक ऊपरी अंग कार्यात्मक चिकित्सा उपकरण लाया जाएगा। यह मशीन स्ट्रोक या रीढ़ की हड्डी की चोट के मामलों में मशीन और सॉफ्टवेयर का उपयोग करके मरीज को जल्द रिकवर करने में मदद करती है। इसी तरह एक करोड़ रुपये की लागत से सर्जरी के मामले में सर्जन की मदद के लिए थ्रीडी प्रिंटर लिया जाएगा। इससे सर्जरी से पहले सर्जरी की थ्रीडी इमेज तैयार की जा सकेगी। 1.2 करोड़ रुपये से रीढ़, घुटने, टखने की इमेजिंग के लिए भार वहन करने वाली स्थायी चुंबक एमआरआई मशीन आएगी। 15 करोड़ रुपये से आने वाला ड्यूल एनर्जी सीटी (डीईसीटी) स्कैनर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस होगा। इससे मरीजों की जांच और विश्लेषण का काम जल्दी होगा।
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