अगले महीने से बनेंगे मेट्रो के कोच, जानिए क्या होंगी इसमें खूबियां
- फ्रांस में एलएमआरसी ने फाइनल किया डिजाइन
- एक कोच में 274 यात्रियों की क्षमता
- फ्रांस से लौटे एमडी कुमार केशव ने दी जानकारी
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लखनऊ में मेट्रो चलने के लिए एक और सफलता मिली है। एलएमआरसी के फ्रांस में डिजाइन फाइनल करने के बाद अगले 20-25 दिन यानी मई के मध्य में चेन्नई प्लांट में मेट्रो कोच का निर्माण शुरू हो जाएगा।
फ्रांस से लौटे एमडी कुमार केशव ने बताया कि डिजाइन फाइनल होने के बाद बंगलुरू स्थित कंपनी के सेंटर में वेंडरों के प्रजेंटेशन शुरू हो गए हैं।
दो दिन में वेंडरों के प्रजेंटेशन होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अब तक देश में चल रही मेट्रो की तुलना में इसमें डिस्क ब्रेक सिस्टम, कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम जैसी ज्यादा खूबियां होंगी।
कुमार केशव ने बताया कि कोच का निर्माण करने वाली अलस्टॉम कंपनी के फ्रांस स्थित डिजाइन सेंटर में पांच दिन का प्रजेंटेशन रहा। इस दौरान ट्रेन के कंट्रोल सिस्टम से लेकर दूसरी खूबियों का 3डी मॉक प्रजेंटेशन किया गया।
अक्टूबर में ट्रायल के लिए मिलेंगे चार कोच
इसके बाद डिजाइन को फाइनल कर दिया गया है। अब केवल निर्माण करने वाले वेंडरों के डिजाइन का प्रजेंटेशन कंपनी के एशिया के लिए बने बंगलुरू डिजाइन सेंटर में प्रजेंटेशन शुरू हुआ है। मई में चेन्नई के श्रीसिटी प्लांट में कोच बनना शुरू हो जाएंगे।
हमें उम्मीद है कि अक्टूबर में ट्रेन का पहला सेट यानी चार कोच हमें ट्रायल के लिए मिल जाएंगे। इन कोच का ट्रायल भी ट्रेक पर एक दिसंबर से शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अभी हम इस ट्रायल को समय से पहले कर देने पर कोई वायदा नहीं कर सकते। मेट्रो कोच की खूबियां बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे 274 यात्रियों की क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है।
यह पहली बार होगा कि किसी कोच में व्हीलचेयर पर कोई यात्री सफर कर सके। उसके लिए कोच को फ्रेंडली बनाते हुए व्हीलचेयर लॉक और डेडीकेटिड जगह दरवाजों के पास हर कोच में तय की गई है।
पहली बार किया गया डिस्क ब्रेक का उपयोग
व्हीलचेयर पर यात्री के नहीं होने पर इस जगह का उपयोग दूसरे यात्री कर सकेंगे। इसके अलावा कोच में पहली बार डिस्क ब्रेक का उपयोग किया गया है।
इससे ट्रेन के स्पीड पकड़ने और धीमे होने को आसान बनाया जा सकेगा। हाईस्पीड ट्रेनों की तरह कोच में कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम लगा होगा। इससे ट्रेन को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
एक तरफ जहां लखनवी पहचान कोच की दी जा रही है। वहीं तकनीकी रूप से भी देश की दूसरी मेट्रो से इसे बेहतर बनाया जा रहा है। एक बार में ज्यादा यात्री अपने गंतव्य को जा सकें।
इसका भी ख्याल रखा गया है। स्टेशनों की दूरी कम होने के चलते बैठने की व्यवस्था दिल्ली की सामान्य मेट्रो की तरह ही दीवारों की तरफ सीट वाली होगी।