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एसजीपीजीआई में हर माह होंगे दो से तीन लिवर प्रत्यारोपण
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प्रदेश में लिवर प्रत्यारोपण को गति देने की तैयारी है। एसजीपीजीआई खुद हर माह दो से तीन मरीजों का लिवर प्रत्यारोपण करेगा। इसकी तैयारी कर ली गई है। प्रयास है कि ब्रेनडेड मरीजों के विभिन्न अंगों का दान कराकर दूसरे मरीजों में प्रत्यारोपित किया जाए। इसके लिए प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों की चेन बनाई जा रही है।
एसजीपीजीआई में तीन साल बाद फिर से लिवर प्रत्यारोपण शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख की सहायता मिली है। साथ ही अन्य सरकारी योजनाओं से भी मदद मिली है। ऐसे में यहां एक मरीज का लिवर प्रत्यारोपण करने के बाद शुक्रवार को डिस्चार्ज किया गया है। पांच अन्य मरीजों को भर्ती कर जरूरी जांचें कराई जा रही हैं। इनके डोनर भी तय कर लिए गए हैं। एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि हेपेटोलॉजी विभाग शुरू हो गया है। लिवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम को गति देने के लिए सरकार की ओर से भी हर स्तर पर सहयोग मिल रहा है। ऐसे में प्रयास है कि हर माह कम से कम दो से तीन मरीजों का प्रत्यारोपण किया जाए। लाइव रिलेविट डोनर कार्यक्रम डिजिज्ड लाइव ट्रांसपोर्ट प्रोग्राम भी शुरू करने की तैयारी है। इसके तहत विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में ब्रेनडेड मरीजों से लिवर व अन्य अंग डोनेट कराकर भी जरूरतमंद मरीजों को राहत देने का प्रयास है।
चिकित्सा संस्थानों को जोड़कर तैयार हो रहा नेटवर्क
एसजीपीजीआई में स्थापित राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटा) के प्रभारी प्रो. हर्षवर्धन ने बताया कि लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विभिन्न अस्पतालों में ब्रेनडेड होने वालों के परिवारीजनों की इच्छा एवं सहमति से संबंधित मरीज का अंगदान कराया जाता है। एसजीपीजीआई के अलावा लोहिया संस्थान, केजीएमयू के ट्रामा सेंटर को जोड़कर नेटवर्क तैयार किया गया है। जल्द ही प्रदेश केअन्य मेडिकल कॉलेजों और ट्रॉमा सेंटर को भी इस कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा।
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केजीएमयू व लोहिया संस्थान भी है तैयार
केजीएमयू में दो साल पहले लिवर प्रत्यारोपण शुरू हुआ। हर माह एक मरीज का प्रत्यारोपण किया गया। हालांकि कोविड के दौरान प्रत्यारोपण बंद रहा। अब तक यहां 14 मरीजों का प्रत्यारोपण किया जा चुका है। किडनी प्रत्यारोपण की तैयारी चल रही है। इसी तरह लोहिया संस्थान में किडनी प्रत्यारोपण चल रहा है, जबकि लिवर के लिए तैयारी चल रही है। वहीं राजधानी के एक निजी अस्पताल ने लिवर प्रत्यारोपण शुरू कर दिया है, जबकि दूसरे में तैयारी चल रही है।
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एसजीपीजीआई में तीन साल बाद फिर से लिवर प्रत्यारोपण शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख की सहायता मिली है। साथ ही अन्य सरकारी योजनाओं से भी मदद मिली है। ऐसे में यहां एक मरीज का लिवर प्रत्यारोपण करने के बाद शुक्रवार को डिस्चार्ज किया गया है। पांच अन्य मरीजों को भर्ती कर जरूरी जांचें कराई जा रही हैं। इनके डोनर भी तय कर लिए गए हैं। एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि हेपेटोलॉजी विभाग शुरू हो गया है। लिवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम को गति देने के लिए सरकार की ओर से भी हर स्तर पर सहयोग मिल रहा है। ऐसे में प्रयास है कि हर माह कम से कम दो से तीन मरीजों का प्रत्यारोपण किया जाए। लाइव रिलेविट डोनर कार्यक्रम डिजिज्ड लाइव ट्रांसपोर्ट प्रोग्राम भी शुरू करने की तैयारी है। इसके तहत विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में ब्रेनडेड मरीजों से लिवर व अन्य अंग डोनेट कराकर भी जरूरतमंद मरीजों को राहत देने का प्रयास है।
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चिकित्सा संस्थानों को जोड़कर तैयार हो रहा नेटवर्क
एसजीपीजीआई में स्थापित राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटा) के प्रभारी प्रो. हर्षवर्धन ने बताया कि लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विभिन्न अस्पतालों में ब्रेनडेड होने वालों के परिवारीजनों की इच्छा एवं सहमति से संबंधित मरीज का अंगदान कराया जाता है। एसजीपीजीआई के अलावा लोहिया संस्थान, केजीएमयू के ट्रामा सेंटर को जोड़कर नेटवर्क तैयार किया गया है। जल्द ही प्रदेश केअन्य मेडिकल कॉलेजों और ट्रॉमा सेंटर को भी इस कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा।
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केजीएमयू व लोहिया संस्थान भी है तैयार
केजीएमयू में दो साल पहले लिवर प्रत्यारोपण शुरू हुआ। हर माह एक मरीज का प्रत्यारोपण किया गया। हालांकि कोविड के दौरान प्रत्यारोपण बंद रहा। अब तक यहां 14 मरीजों का प्रत्यारोपण किया जा चुका है। किडनी प्रत्यारोपण की तैयारी चल रही है। इसी तरह लोहिया संस्थान में किडनी प्रत्यारोपण चल रहा है, जबकि लिवर के लिए तैयारी चल रही है। वहीं राजधानी के एक निजी अस्पताल ने लिवर प्रत्यारोपण शुरू कर दिया है, जबकि दूसरे में तैयारी चल रही है।