KGMU से ग्रीन कोरिडोर बनाकर 23 मिनट में दिल्ली के लिए रवाना किया लिवर
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इससे पहले भी ग्रीन कोरिडर बनाकर लिवर दिल्ली भेजा जा चुका है तब एंबुलेंस को एयरपोर्ट पहुंचने में 27 मिनट लगे थे।
लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने मेडिकल इमरजेंसी के चलते रूट क्लीयर कराने व ट्रैफिक कर्मियों को अलर्ट रहने का मैसेज जारी कराया। इसके बाद चौराहों पर ट्रैफिक सिपाही व पुलिस सतर्क हो गई।
एंबुलेंस केजीएमयू से निकली तो उसके आगे 110 की रफ्तार से इंटरसेप्टर, एएसपी ट्रैफिक और एमसीआर की गाड़ियां सायरन बजाते हुए चल रही थीं।
क्या होता है ग्रीन कोरिडोर
कई बार आपने खबरों में देखा और पढ़ा होगा कि ग्रीन कोरिडोर बनाकर मरीज की जान बचाई गई।
दरअसल ग्रीन कोरिडोर उस स्थिति में बनाया जाता है जब किसी संवेदनशील अंग को ट्रांसप्लांट के लिए एक जगह से दूसरे जगह कम से कम समय पर पहुंचाना होता है।
ज्यादातर दिल, किडनी या लिवर जैसे संवेदनशील अंगों को पहुंचाने के लिए ग्रीन कोरिडोर बनाए जाते हैं। कई मरीज मृत्यु के बाद अपने अंग दान करते हैं और दूसरे अस्पताल में उन्हें कम से कम समय में पहुंचाना होता है तब ग्रीन कोरिडर बनाते हैं।