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केजीएमयू के ट्रॉमा में 12 घंटे तड़पता रहा लिवर का मरीज, रात में इलाज की सुविधा न होने से मौत

Fri, 31 Jan 2020 03:57 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 31 Jan 2020 03:57 PM IST
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liver patient died in trauma center of KGMU
डेमो - फोटो : डेमो
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित एक मरीज की मौत हो गई। उसके मुंह से लगातार खून आ रहा था। आरोप है कि उसे जिस तरह के इलाज की जरूरत थी, वह सिर्फ दिन में मिलता है, ऐसे में इलाज के अभाव में मरीज की रात में ही मौत हो गई।
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इससे पहले मरीज 15 घंटे तक जिंदगी के लिए जूझता रहा। पूरी रात जूनियर डॉक्टर दवाओं की मदद से मर्ज पर काबू करने की कोशिश करते रहे, लेकिन बचा नहीं सके। तीमारदार रामू शुक्ला के मुताबिक, डॉक्टरों ने ऑन कॉल किसी भी विशेषज्ञ को न लाकर एंडोस्कोपी प्रक्रिया के जरिये नसों की बाइंडिंग नहीं कराई।
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खून की उल्टियां अधिक होने की वजह से मरीज ने दम तोड़ दिया। मामले की शिकायत सीएम से हुई है। जहां से मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।  लखीमपुर धरौहरा के रहने वाले शशि मोहन मिश्रा (50) निजी फैक्ट्री में काम करते थे। बीती 26 जनवरी को तीमारदार खून की उल्टियां होने पर ट्रॉमा सेंटर लाए थे।  डॉक्टरों की काफी मिन्नतों बाद मरीज को उसे भर्ती कर लिया गया।
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रात के वक्त जूनियरों के हवाले ट्रॉमा सेंटर

liver patient died in trauma center of KGMU
प्रतीकात्मक तस्वीर
मरीज को ट्रॉमा सेंटर के दूसरे तल पर बने मेडिसिन विभाग में शिफ्ट करा दिया गया। इस दौरान 12 घंटे बीत गए। लिवर को खून की सप्लाई देने वाली नसें फूलने के साथ उसमें से खून निकल रहा था। अल्ट्रासाउंड में इसकी पुष्टि हुई। डॉक्टर तीमारदारों से खून मंगाकर उसे चढ़ाते रहे। रात करीब तीन बजे उसकी मौत हो गई।

केजीएमयू वीसी ने ट्रॉमा की निगरानी के लिए सीनियर डॉक्टरों की तैनाती कर रखी है। ये दिन के वक्त ही ट्रॉमा में रहते हैं। शाम होते ही ट्रॉमा जूनियर डॉक्टरों के हवाले रहता है। हालत ये है कि रात में आने वाले अति गंभीर मरीजों के इलाज के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों को जानकारी तक नहीं दी जा रही है।
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