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Lucknow News: हिंदी संस्थान से खरीद सकेंगे साहित्य की पुस्तकें, शुरू होगा विक्रय केंद्र
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लखनऊ। साहित्य प्रेमी अब हिंदी संस्थान से साहित्य की बेहतरीन पुस्तकें खरीद सकेंगे। संस्थान परिसर में फिर से पुस्तक विक्रय केंद्र शुरू होने वाला है। इसके उद्घाटन की तैयारियां चल रही हैं।
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ ही न सिर्फ उत्कृष्ट कार्य करने वाले लेखकों को हर वर्ष पुरस्कृत करता है, बल्कि पुस्तक प्रकाशन व वितरण के साथ पत्र-पत्रिकाओं का भी प्रकाशन करता है। साहित्यिक समारोहों, गोष्ठियों का आयोजन, साहित्यकारों के लिए कल्याण कोष व शोध कार्यों में सहायता भी करता है। संस्थान में पुस्तक विक्रय केंद्र भी चल रहा था, लेकिन विगत काफी समय से इसमें अवरोध आ गया था। अब इसे फिर से संस्थान के मुख्य द्वार के पास ही दाहिनी ओर शुरू किया जा रहा है।
यहां मैथिलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा, दिनकर, बच्चन, अयोध्या प्रसाद हरिऔध, श्रीलाल शुक्ल, निराला, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचंद, सुमित्रानंदन पंत समेत देश के अन्य प्रतिष्ठित साहित्यकारों व लखनऊ के लेखकों के साहित्य हैं। यहां विक्रय के लिए करीब एक हजार पुस्तकें मौजूद हैं, साथ ही संस्थान से प्रकाशित होने वाली पत्रिकाएं भी मौजूद हैं। यहां जिन पुस्तकों का विक्रय किया जाएगा, उनमें न सिर्फ साहित्यिक पुस्तकें बल्कि चिकित्सा विज्ञान, तकनीकी और अन्य भारतीय भाषाओं की प्रमुख कृतियां भी शामिल होंगी।
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उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ ही न सिर्फ उत्कृष्ट कार्य करने वाले लेखकों को हर वर्ष पुरस्कृत करता है, बल्कि पुस्तक प्रकाशन व वितरण के साथ पत्र-पत्रिकाओं का भी प्रकाशन करता है। साहित्यिक समारोहों, गोष्ठियों का आयोजन, साहित्यकारों के लिए कल्याण कोष व शोध कार्यों में सहायता भी करता है। संस्थान में पुस्तक विक्रय केंद्र भी चल रहा था, लेकिन विगत काफी समय से इसमें अवरोध आ गया था। अब इसे फिर से संस्थान के मुख्य द्वार के पास ही दाहिनी ओर शुरू किया जा रहा है।
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यहां मैथिलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा, दिनकर, बच्चन, अयोध्या प्रसाद हरिऔध, श्रीलाल शुक्ल, निराला, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचंद, सुमित्रानंदन पंत समेत देश के अन्य प्रतिष्ठित साहित्यकारों व लखनऊ के लेखकों के साहित्य हैं। यहां विक्रय के लिए करीब एक हजार पुस्तकें मौजूद हैं, साथ ही संस्थान से प्रकाशित होने वाली पत्रिकाएं भी मौजूद हैं। यहां जिन पुस्तकों का विक्रय किया जाएगा, उनमें न सिर्फ साहित्यिक पुस्तकें बल्कि चिकित्सा विज्ञान, तकनीकी और अन्य भारतीय भाषाओं की प्रमुख कृतियां भी शामिल होंगी।
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