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निर्दलीयों की तरह राजनीतिक दलों के आरक्षित चुनाव चिन्ह बदलने की याचिका पर चुनाव आयोग से किया जवाब तलब
Wed, 17 Feb 2021 07:37 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 17 Feb 2021 07:37 PM IST
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लखनऊ हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लोक सभा व विधानसभा चुनावों में हर बार निर्दलीय प्रत्याशियों की तरह राजनीतिक दलों के आरक्षित चुनाव चिन्ह भी बदलने के आग्रह वाली जनहित याचिका पर केंद्रीय निर्वाचन आयोग से तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश अधिवक्ता श्रद्धा त्रिपाठी की जनहित याचिका पर दिया। याची का कहना था कि जिस तरह हर बार आम चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशियों का चुनाव चिन्ह बदल दिया जाता है उसी तरह वर्ष 1961 के संबंधित चुनाव नियमों के तहत राजनीतिक दलों के आरक्षित चुनाव चिन्ह भी हर बार चुनाव में बदले जाने चाहिए। उधर चुनाव आयोग की तरफ से अधिवक्ता ने याचिका को सुनवाई लायक होने (ग्राह्यता) के मुद्दे पर आपत्तियां उठाईं।
कोर्ट ने चुनाव आयोग को याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को तीन हफ्ते का समय दिया। इसके बाद याची की तरफ से सप्ताह भर में प्रति उत्तर दाखिल किया जा सकेगा। इसके बाद अदालत ने इस याचिका को पहले की एक अन्य याचिका के साथ ग्राह्यता के बिन्दु पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
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न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश अधिवक्ता श्रद्धा त्रिपाठी की जनहित याचिका पर दिया। याची का कहना था कि जिस तरह हर बार आम चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशियों का चुनाव चिन्ह बदल दिया जाता है उसी तरह वर्ष 1961 के संबंधित चुनाव नियमों के तहत राजनीतिक दलों के आरक्षित चुनाव चिन्ह भी हर बार चुनाव में बदले जाने चाहिए। उधर चुनाव आयोग की तरफ से अधिवक्ता ने याचिका को सुनवाई लायक होने (ग्राह्यता) के मुद्दे पर आपत्तियां उठाईं।
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कोर्ट ने चुनाव आयोग को याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को तीन हफ्ते का समय दिया। इसके बाद याची की तरफ से सप्ताह भर में प्रति उत्तर दाखिल किया जा सकेगा। इसके बाद अदालत ने इस याचिका को पहले की एक अन्य याचिका के साथ ग्राह्यता के बिन्दु पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
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