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यूपी: 'कूल' असलहों ने एक साल में ली 720 जानें

Tue, 23 Sep 2014 11:44 AM IST
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 23 Sep 2014 11:44 AM IST
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licenced weapon a big prolem in UP.

आईआईएम लखनऊ की स्टडी में बहुत से लोगों ने असलहा

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रखना कूल माना, लेकिन शायद ही उनको पता हो कि इस 'कूल' हथियार से कितने घर बर्बाद हुए हैं।


यूपी में असलहों से खुद को रसूखदार दिखाने का जुनून हर साल सैकड़ों जानें ले रहा है। अकेले 2013 में प्रदेश के 720 लोगों की जान चली गई। यानी देश भर में कुल मौतों का 60 फीसदी अकेले यूपी में।

इस दौरान देश में 1203 लोगों की मौत हुई। ये मौतें तकनीकी रूप से हर्ष फायरिंग की वजह से ‘एक्सीडेंटल’ की श्रेणी में रखी जाती हैं, लेकिन सूबे में जिस स्तर पर हथियारों के लाइसेंस जारी किए गए हैं, उसे असली वजह मानने में संकोच नहीं होना चाहिए।
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हर्ष फायरिंग को लेकर कोर्ट चाहे जितनी सख्ती बरत ले, पर इस पर रोक लगती दिखाई नहीं दे रही है। जिन परिवारों के लोगों की हर्ष फायरिंग में मौत हुई, वह ऐसी हानि है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता।
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सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती भविष्य में मौतों को कम करना है। सूबे में रसूखदारों के पास पुलिस से पांच गुना से ज्यादा असलहे हैं।

हथियारों से नहीं होती सुरक्षा

licenced weapon a big prolem in UP.

आम लोगों में इतने हथियारों की मौजूदगी पर लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व समाजविज्ञान विभागाध्यक्ष व वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राजेश मिश्रा कहते हैं कि हथियारों से अगर सुरक्षा होती तो आज इराक में लोग सुरक्षित सो रहे होते। वे जानते हैं कि भले ही सिरहाने क्लाश्निकोव रखी हो, लेकिन कभी भी जान जा सकती है।

यूपी में भारी असलहा इसलिए जुटा रहे हैं क्योंकि यह रसूख का मामला बन चुका है। थोड़ा पैसा आते ही लोग असलहे के लाइसेंस के लिए आवेदन कर देते हैं। इतना असलहा उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए ही चाहिए, यह बात समझ से परे है।

दूसरी ओर यूनिवर्सिटी के ही समाज कार्य रीडर डीके सिंह के अनुसार हथियार रखना स्टेटस सिंबल बन चुका है। वे कहते हैं कि खुद उनके पास असलहे का लाइसेंस है, लेकिन वे जानते हैं कि जिनके पास यह है, उनमें से 99.99 प्रतिशत लोगों ने कभी आत्मरक्षा में इनका उपयोग तक नहीं किया होगा।

वे मानते हैं असलहे दिखाने की नहीं छिपाकर रखने की वस्तु है और जरूरत होने पर ही इन्हें किसी को दिया जाना चाहिए। वरना हर्ष फायरिंग में इनका उपयोग होता रहेगा और लोगों की जान जाती रहेगी।

आंकड़ों में हाल: असलहों से ‘एक्सीडेंट्स’

licenced weapon a big prolem in UP.

2013: देश की 60 प्रतिशत मौतें यूपी
-720 यूपी के लोगों जान गंवाई, इनमें 595 पुरुष थे और 125 महिलाएं
-306 लोग जख्मी

-1203 मौतें देश भर में हुई थीं, इनमें 1018 पुरुष और 185 महिलाएं
-1,413 थी जख्मी होने वालों की संख्या

हर्ष फायरिंग में सबसे ज्यादा मौतें मेरठ में
मेरठ 143
इलाहाबाद 27
आगरा 18
कानपुर 16
गाजियाबाद 7
(स्रोत एनसीआरबी, राजधानी के रिकॉर्ड दर्ज नहीं)

मामले हैं कि रुकते नहीं

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केस 1: 10 मई 2014
डांस की मस्ती जान पर बन आई
राजधानी के नगराम के इस्मालइनगर गांव में एक रिटायर्ड मेजर की पत्नी माया शादी समारोह के दौरान डांस फ्लोर पर डांस करते हुए अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से कई राउंड फायरिंग की। रिवॉल्वर खाली हो गई तो अपने हैंड बैंग से और गोलियां निकाल रिलोड किया और फायरिंग करती रहीं। इसी दौरान यहां आए दसवीं के छात्र शुभम की जांघ में गोली लग गई। उसे गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बड़ी मुश्किल से उसकी जान बचाई।

केस 2: 4 मार्च 2014
गोली लगने से मौत, संबंधी छोड़कर भागे
राजधानी में एक बर्थ डे पार्टी में शान दिखाने के लिए चलाई जा रही गोलियों की चपेट में आने से 11 साल के निखिल की मौत हो गई। घटना का दुखद पहलू यह था कि गोली लगने के बाद जब निखिल गिर पड़ा तो अधिकतर लोग उसे वहीं छोड़कर निकल भागे ताकि पुलिसिया पूछताछ से बचा जा सके।

केस 3: 11 जून 2014
नशे में धुत फायरिंग ने ले ली जान
इलाहाबाद के बहरिया के शिवपुर गांव में शादी के दौरान खुशियां दिखाने के लिए लोग शराब पीकर लगातार हर्ष फायरिंग कर रहे थे। तभी एक गोली शादी से जुड़ी रस्में पूरी करवाने के लिए आई पेशे से नाई 35 साल की ऊषा की छाती में जा लगी। वह लहूलुहान होकर गिर पड़ी और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

हर्ष फायरिंग में इस तरह गई जिंदगी

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केस 4: 10 फरवरी 2014
गम में बदला खुशी का माहौल
देवरिया के गौरीबाजार क्षेत्र में एक परिवार में द्वारपूजा का मौका था। इस दौरान बारात में आए लोग हवाई फायरिंग करने लगे। पास ही खड़े राहुल राय को एक गोली लगी और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। लोग उसे अस्पताल लेकर भागे लेकिन बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों के अनुसार उसकी मौत गोली लगते ही हो गई थी।

केस 5: 12 दिसंबर 2013
लखनऊ के युवक की देवरिया में मौत
देवरिया में ही हर्ष फायरिंग का शिकार लखनऊ का एक युवक राजेंद्र दुबे बना। वह खामपार के पिपराबघेल गांव में लखनऊ से गई बारात का हिस्सा बनकर शादी में गया था। यहां द्वार पूजा के दौरान फायरिंग की गई। राजेंद्र को भी इनमें से एक गोली लगी और वह मारा गया। राजेंद्र राजधानी के गोमतीनगर का रहने वाला था, पुलिस ने हादसे के बाद कार्रवाई, लेकिन मृतक को लौटाना अब किसी के बस में नहीं था।

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