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आईआईएम के प्रोफेसरों ने सीएम योगी आदित्यनाथ के मंत्रियों को पढ़ाया कुशल प्रबंधन का पाठ
Mon, 09 Sep 2019 12:09 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 09 Sep 2019 12:09 PM IST
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आईआईएम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
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भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रियों ने बेहतर विजन व कार्यशैली विकसित करने और निर्णयों को कुशल प्रबंधन के माध्यम से जमीन पर उतारने का पाठ पढ़ा। आईआईएम के प्रोफेसरों ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के सामने सवाल भी रखे।
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मंत्रियों से कहा कि यूपी की अर्थव्यवस्था को 10 खरब डॉलर की बनाने के लिए प्राथमिकता के 10 सेक्टर क्रमबद्ध ढंग से लिखकर दें। प्राथमिकता निर्धारण, आर्थिक मामलों के अध्ययन के तरीकों और कुशल राजनीतिक नेतृत्व के बारे में भी उनके साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया।
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आईआईएम में रविवार को दिन भर कुल छह सेशन चले। पहला सत्र ‘प्राथमिकता निर्धारण के लिए सुगम पूर्वाभ्यास’ विषय पर था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश का सामाजिक-आर्थिक संदर्भ, समूह परिचर्चा, प्राथमिकताओं पर प्रस्तुति व प्रतिभागियों के सवाल-जवाब, शीर्ष चार राज्यों से यूपी की तुलना, दृष्टि क्षेत्र विस्तार, नीतिपरक राजनीतिक नेतृत्व और भविष्य की दिशा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सबसे खास बात यह रही कि मंत्रियों को कुल आठ समूहों में रखा गया।
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उसके बाद प्रदेश को आगे बढ़ाने, राजनीतिक विजन, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर उनकी राय भी जानी गई। आईआईएम की ओर से अलग-अलग सत्रों में प्रो. अर्चना शुक्ला, प्रो. पुष्पेंद्र प्रियदर्शी, प्रो. निशांत उप्पल, प्रो. संजय सिंह और प्रो. सुशील कुमार ने मंत्रियों के साथ विचार साझा किए।
नेता में कल्पना शक्ति की अपार क्षमता जरूरी
इन प्रोफेसरों ने मंत्रियों को बताया कि लीडर में कल्पना शक्ति की अपार क्षमता होनी चाहिए। प्रो. सुशील कुमार ने जोर देते हुए कहा कि लीडर का पहला गुण विनम्रता होना चाहिए। वह अगर विनम्र होगा तो मातहत काम करने वाले लोग बिना झिझके उसके साथ अपने सुझाव साझा कर सकेंगे। इससे लीडर बेहतर परिणाम देने की स्थिति में होंगे।