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21 किमी. लंबा ग्रीन कॉरिडोर एलडीए अब खुद बनाएगा
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एलडीए ही करेगा ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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गोमती किनारे चार लेन के ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण अब एलडीए खुद कराएगा। इसके लिए पीपीपी मॉडल पर ग्रीन कॉरिडोर को बनाए जाने के लिए रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी निर्देश दिया है कि नदी कि नारे वाली जमीनों का अर्जन कर एलडीए उनका व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित कराए। इनसे होने वाली आय से ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया जाए।
सोमवार को मुख्यमंत्री ने ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन लिया। बजट की उपलब्धता के सवाल पर अधिकारी उनको उचित जवाब नहीं दे सके।
इसकी वजह यह रही कि अभी तक तीनों ही विभाग बजट को लेकर जरूरी फैसला नहीं ले सके हैं। पूर्व में ग्रीन कॉरिडोर के लिए जमीन का अर्जन एलडीए, बंधा बनाने का काम सिंचाई विभाग और सड़क व एलीवेटेड सेक्शन का काम पीडब्ल्यूडी को अपने खर्च पर करना था।
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आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अब यह आदेश किया है कि एलडीए खुद ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण कराए। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर के आसपास मौजूद जमीनों को एलडीए को दिया जाएगा।
शासन ने अब एलडीए अधिकारियों से पूछा है कि क्या ग्रीन कॉरिडोर के आसपास की जमीनों का विकास पीपीपी मॉडल पर किया जा सकता है? एलडीए अब 10 दिन में अपनी रिपोर्ट शासन को तैयार कर भेजेगा जिससे जरूरी अनुमोदन लिया जा सके।
10 हजार करोड़ रुपये की आय संभावित
एलडीए के वर्तमान आकलन के मुताबिक, गोमती बैराज पर यूपी डेस्को व सिंचाई विभाग की जमीन सहित करीब 11 पॉकेट में व्यावसायिक हब विकसित किए जा सकते हैं। यहां कुल 111 एकड़ जमीन अभी मिलना संभावित है। यह जमीनें नगर निगम, सिंचाई विभाग, कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज, जीआईसी, ग्रामसभा, एलडीए के पास मौजूद हैं। सभी जमीनें अब विकसित कर बेचे जाने के लिए एलडीए को हैंडओवर होंगीं।
पांच महीने में नहीं बना सके सहमति
अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री बजट की प्रगति पर इसलिए नाराज हुए। क्योंकि, पांच महीने बाद भी बजट की व्यवस्था नहीं की जा सकी। इससे ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण प्रभावित हो रहा है। पहले चरण के भाग-1 में दीपावली तक नदी के दाएं तट पर आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज के बीच बसंतकुंज योजना के समानांतर काम शुरू किया जाना था। अभी तक केवल कैटल कॉलोनी में ही 140 मीटर सेक्शन में अधूरा बंधा बनाने का काम ही शुरू हो सका है। इसके लिए भी बजट एलडीए ने दिया है। पीडब्ल्यूडी को गऊ घाट पर एलीवेटेड सेक्शन पर काम करना था जोकि शुरू नहीं हो सका।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी निर्देश दिया है कि नदी कि नारे वाली जमीनों का अर्जन कर एलडीए उनका व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित कराए। इनसे होने वाली आय से ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया जाए।
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सोमवार को मुख्यमंत्री ने ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन लिया। बजट की उपलब्धता के सवाल पर अधिकारी उनको उचित जवाब नहीं दे सके।
इसकी वजह यह रही कि अभी तक तीनों ही विभाग बजट को लेकर जरूरी फैसला नहीं ले सके हैं। पूर्व में ग्रीन कॉरिडोर के लिए जमीन का अर्जन एलडीए, बंधा बनाने का काम सिंचाई विभाग और सड़क व एलीवेटेड सेक्शन का काम पीडब्ल्यूडी को अपने खर्च पर करना था।
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आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अब यह आदेश किया है कि एलडीए खुद ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण कराए। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर के आसपास मौजूद जमीनों को एलडीए को दिया जाएगा।
शासन ने अब एलडीए अधिकारियों से पूछा है कि क्या ग्रीन कॉरिडोर के आसपास की जमीनों का विकास पीपीपी मॉडल पर किया जा सकता है? एलडीए अब 10 दिन में अपनी रिपोर्ट शासन को तैयार कर भेजेगा जिससे जरूरी अनुमोदन लिया जा सके।
10 हजार करोड़ रुपये की आय संभावित
एलडीए के वर्तमान आकलन के मुताबिक, गोमती बैराज पर यूपी डेस्को व सिंचाई विभाग की जमीन सहित करीब 11 पॉकेट में व्यावसायिक हब विकसित किए जा सकते हैं। यहां कुल 111 एकड़ जमीन अभी मिलना संभावित है। यह जमीनें नगर निगम, सिंचाई विभाग, कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज, जीआईसी, ग्रामसभा, एलडीए के पास मौजूद हैं। सभी जमीनें अब विकसित कर बेचे जाने के लिए एलडीए को हैंडओवर होंगीं।
पांच महीने में नहीं बना सके सहमति
अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री बजट की प्रगति पर इसलिए नाराज हुए। क्योंकि, पांच महीने बाद भी बजट की व्यवस्था नहीं की जा सकी। इससे ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण प्रभावित हो रहा है। पहले चरण के भाग-1 में दीपावली तक नदी के दाएं तट पर आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज के बीच बसंतकुंज योजना के समानांतर काम शुरू किया जाना था। अभी तक केवल कैटल कॉलोनी में ही 140 मीटर सेक्शन में अधूरा बंधा बनाने का काम ही शुरू हो सका है। इसके लिए भी बजट एलडीए ने दिया है। पीडब्ल्यूडी को गऊ घाट पर एलीवेटेड सेक्शन पर काम करना था जोकि शुरू नहीं हो सका।