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Lucknow News : एलडीए कब्जाधारक से भूखंड वापस लेकर वास्तविक आवंटी को वापस करे, या एक करोड़ हर्जाना दे
Fri, 14 Jul 2023 01:40 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 14 Jul 2023 01:40 PM IST
सार
लखनऊ विकास प्राधिकरण में स्थानीय निवासी प्रदीप कुमार टंडन ने एक भूखंड 16 मई 1985 को आवंटित कराया था। उनकी मृत्यु के बाद यह भूखंड उनकी पत्नी ऊषा प्रदीप को आवंटित हुआ। उनकी भी मृत्यु होने पर यह रिद्धि टंडन और सिद्धि टंडन के नाम आवंटित हो गया।
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लखनऊ विकास प्राधिकरण
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मूल आवंटी पर बकाया दिखाकर पहले उसका आवंटन निरस्त किया और फिर उसी भूखंड का आवंटन हाईकोर्ट के जज की पुत्री को कर दिया। राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण को आदेश दिया है कि वह मूल आवंटी को कब्जामुक्त कराकर भूखंड लौटाए। ऐसा न करने पर एक करोड़ रुपये आवंटी को ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा फर्जी क्रियाकलाप और धोखाधड़ी में भी वादी को 30 लाख रुपये अलग से हर्जाना अदा करने के आदेश दिए गए हैं। इस आदेश की प्रति को मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव के सामने रखने तथा न्यायालय को भी अवगत कराने को कहा है। आयोग ने माना कि एलडीए ने इस मामले में हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश को अनुग्रहीत किया।
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लखनऊ विकास प्राधिकरण में स्थानीय निवासी प्रदीप कुमार टंडन ने एक भूखंड 16 मई 1985 को आवंटित कराया था। उनकी मृत्यु के बाद यह भूखंड उनकी पत्नी ऊषा प्रदीप को आवंटित हुआ। उनकी भी मृत्यु होने पर यह रिद्धि टंडन और सिद्धि टंडन के नाम आवंटित हो गया। इस मामले में पाया गया कि ऊषा प्रदीप ने इस भूखंड की धनराशि वर्ष 1996 और 1997 में जमा कर दी थी। इसके बाद लखनऊ विकास प्रधिकरण (एलडीए) के तत्काल वीसी ने एक लाख रुपये से अधिक ब्याज में 50 प्रतिशत की छूट देते हुए उन्हें शेष 50,345 रुपये जमा करने का आदेश दिया। इस रकम को भी आवंटी ने 30 जुलाई 1997 को जमा करा दिया।
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अब प्राधिकरण ने एक नया खेल शुरू किया। 4 दिसंबर 2003 को आवंटी को एक पत्र भेजा कि वह अपना सारा बकाया जमा कर दें। आवंटी ने बताया कि वह तो सारा पैसा जमा कर चुके हैं पर एलडीए ने बात नहीं सुनी, जिस पर रिद्धि ने एक वाद जिला उपभोक्ता आयोग लखनऊ में किया। जिला आयोग ने यह वाद यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यदि परिवादी चाहे तो अपनी धनराशि वापस ले ले। इस निर्णय के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की गई। इसकी सुनवाई आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार एवं सदस्य राजेंद्र सिंह के समक्ष की गई। इसमें आयोग ने अपना निर्णय सुना दिया।
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आयोग ने कहा कि यूको बैंक में समय से पूर्ण राशि जमा करने के बावजूद यह आवंटन गलत तरीके से निरस्त किया गया। जिला आयोग के निर्णय के अध्ययन में यह भी पता चला कि आवंटन निरस्त करने के बाद वर्ष 2005 में यही भूखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कुदुशी की पुत्री के नाम आवंटित किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि एलडीए अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मिलीभगत कर गलत आधार पर पुराना आवंटन निरस्त किया और हाईकोर्ट के एक जज को अनुग्रहीत किया।
राज्य एलडीए कर्मियों से वसूली करने को स्वतंत्र
आयोग ने निर्णय सुनाया कि एलडीए भूखंड का कब्जा खाली कराकर मूल आवंटी को लौटाए। यदि ऐसा न संभव हो तो एक अगस्त 1998 से भुगतान की तिथि तक 7 दिन के भीतर 12 और उससे ज्यादा दिन में भुगतान करने पर 15 प्रतिशत ब्याज सहित एक करोड़ रुपये हर्जाना दे। 50000 मानसिक यंत्रणा में अदा करे। आयोग ने कहा कि इस प्रकरण को सीएम के सामने रखें तथा न्यायालय को अवगत कराए। इस धनराशि की वसूली उत्तरदायी प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी करने के लिए राज्य स्वतंत्र है।