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विराजखंड में लावारिस हालत में पड़े 32 फ्लैट व 33 दुकानों को बेचेगा एलडीए
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लखनऊ। गोमतीनगर के विराजखंड-2 में करीब नौ साल से बिना बिके लावारिस पड़े 32 फ्लैटों और 33 दुकानों को अब बेचा जाएगा। एलडीए सचिव पवन गंगवार ने खुद मौके पर जाकर इन संपत्तियों को देखा और हैरानी जताई कि इतनी अच्छी लोकेशन की इन संपत्तियों को अभी तक बिक्री में क्यों नहीं लगाया गया। फाइल डंप कर इन्हें बिकने नहीं देने की एलडीए के इंजीनियरों व अधिकारियों की करतूत भी उनके सामने आई है।
सचिव ने बताया कि बिना बिके पड़ी इन संपत्तियों की सूचना मिलने पर मौके पर ही इंजीनियर, संपत्ति के अधिकारी बुलाकर बिक्री में आ रही दिक्कतों की जानकारी ली है। दुकानों को तुरंत अगली नीलामी में लगाने के लिए कहा है। वहीं फ्लैटों के पंजीकरण खोलने के लिए संपत्ति विभाग से कहा है। अधिशासी अभियंता अजय पंवार खुद इन फ्लैटों और दुकानों की सफाई के अलावा अतिक्रमण हटवाने का काम करेंगे। वहीं नायब तहसीलदार स्निग्धा चतुर्वेदी को नीलामी और पंजीकरण खोलने की व्यवस्था को कहा है। इन संपत्तियों की लिखित में रिपोर्ट भी सचिव ने मांगी है, ताकि जरूरी कार्रवाई की जा सके।
फ्लैट व दुकानों पर मिले कब्जे
सचिव जब निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां तीन से चार फ्लैटों के अंदर बिना आवंटन लोग रहते मिले। इसी तरह कुछ दुकानों का भी उपयोग लोगों ने खुद कब्जा कर शुरू कर दिया था। इन कब्जों को हटवाने और सफाई कराने के लिए सचिव ने अधिशासी अभियंता को कहा है।
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दो वीसी नहीं करा पाए बिक्री
अभियंत्रण और नियोजन विभाग के बीच कागजी कार्रवाई के बीच इन 32 फ्लैटों की बिक्री पूर्व के दो वीसी नहीं करा पाए। पूर्व वीसी प्रभु एन सिंह ने इन फ्लैटों की कीमत की गणना तक करा दी थी। वहीं उनके बाद आए शिवाकांत द्विवेदी ने भी नंबर प्लान बना फ्लैट और दुकानें बिकवाने का प्रयास किया। अब मौजूदा वीसी अभिषेक प्रकाश के सामने अपने ही अधिकारियों और इंजीनियरों के कारनामा से निबटते हुए इनकी बिक्री कराने की चुनौती है।
करीब 15 करोड़ रुपये की संपत्ति
एलडीए ने 2011 में विराजखंड में स्प्रिंग डेल स्कूल के पास मुख्य सड़क पर आवासीय व व्यावसायिक कैंपस बनाया था। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत यहां चार मंजिला अपार्टमेंट बनाया गया। इसमें 400 वर्ग फीट के 32 फ्लैट बने। इनके निर्माण पर एलडीए ने 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए। एमआई बिल्डर ने अपार्टमेंट का निर्माण कराया। इसके अलावा 33 दुकानें भी यहां बनीं। इनकी कुल कीमत करीब 15 करोड़ रुपये मानी जा रही है।
विनम्रखंड में भी देखी जमीनें
एलडीए सचिव ने विनम्रखंड में भी बिना उपयोग के पड़ी जमीनों को देखा। मुख्य सड़क पर मौजूद कीमती जमीन पर यहां भूखंड ही विकसित नहीं हुए थे। इस जमीन का नियोजन करने के लिए सचिव ने आदेश दिया है। इसके बाद इस व्यावसायिक जमीन को नीलामी में लगाया जाएगा।
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सचिव ने बताया कि बिना बिके पड़ी इन संपत्तियों की सूचना मिलने पर मौके पर ही इंजीनियर, संपत्ति के अधिकारी बुलाकर बिक्री में आ रही दिक्कतों की जानकारी ली है। दुकानों को तुरंत अगली नीलामी में लगाने के लिए कहा है। वहीं फ्लैटों के पंजीकरण खोलने के लिए संपत्ति विभाग से कहा है। अधिशासी अभियंता अजय पंवार खुद इन फ्लैटों और दुकानों की सफाई के अलावा अतिक्रमण हटवाने का काम करेंगे। वहीं नायब तहसीलदार स्निग्धा चतुर्वेदी को नीलामी और पंजीकरण खोलने की व्यवस्था को कहा है। इन संपत्तियों की लिखित में रिपोर्ट भी सचिव ने मांगी है, ताकि जरूरी कार्रवाई की जा सके।
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फ्लैट व दुकानों पर मिले कब्जे
सचिव जब निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां तीन से चार फ्लैटों के अंदर बिना आवंटन लोग रहते मिले। इसी तरह कुछ दुकानों का भी उपयोग लोगों ने खुद कब्जा कर शुरू कर दिया था। इन कब्जों को हटवाने और सफाई कराने के लिए सचिव ने अधिशासी अभियंता को कहा है।
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दो वीसी नहीं करा पाए बिक्री
अभियंत्रण और नियोजन विभाग के बीच कागजी कार्रवाई के बीच इन 32 फ्लैटों की बिक्री पूर्व के दो वीसी नहीं करा पाए। पूर्व वीसी प्रभु एन सिंह ने इन फ्लैटों की कीमत की गणना तक करा दी थी। वहीं उनके बाद आए शिवाकांत द्विवेदी ने भी नंबर प्लान बना फ्लैट और दुकानें बिकवाने का प्रयास किया। अब मौजूदा वीसी अभिषेक प्रकाश के सामने अपने ही अधिकारियों और इंजीनियरों के कारनामा से निबटते हुए इनकी बिक्री कराने की चुनौती है।
करीब 15 करोड़ रुपये की संपत्ति
एलडीए ने 2011 में विराजखंड में स्प्रिंग डेल स्कूल के पास मुख्य सड़क पर आवासीय व व्यावसायिक कैंपस बनाया था। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत यहां चार मंजिला अपार्टमेंट बनाया गया। इसमें 400 वर्ग फीट के 32 फ्लैट बने। इनके निर्माण पर एलडीए ने 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए। एमआई बिल्डर ने अपार्टमेंट का निर्माण कराया। इसके अलावा 33 दुकानें भी यहां बनीं। इनकी कुल कीमत करीब 15 करोड़ रुपये मानी जा रही है।
विनम्रखंड में भी देखी जमीनें
एलडीए सचिव ने विनम्रखंड में भी बिना उपयोग के पड़ी जमीनों को देखा। मुख्य सड़क पर मौजूद कीमती जमीन पर यहां भूखंड ही विकसित नहीं हुए थे। इस जमीन का नियोजन करने के लिए सचिव ने आदेश दिया है। इसके बाद इस व्यावसायिक जमीन को नीलामी में लगाया जाएगा।