डीएम की बुलाई मीटिंग में नहीं पहुंचे एलडीए उपाध्यक्ष समेत कई अधिकारी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बावजूद सरकारी जमीनों पर अवैध तरीके से कब्जा जमाए लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर जिम्मेदार विभाग उदासीन हैं।
इसके चलते शनिवार को डीएम की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की बैठक में आधा दर्जन से अधिक प्रमुख विभागों के आला अफसर बिना किसी सूचना के गैरहाजिर रहे। यह स्थिति तब थी जब बैठक की जानकारी पहले से दे दी गई थी।
इससे नाराज डीएम कौशल राज शर्मा ने एलडीए उपाध्यक्ष पीएन सिंह, नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी, सीएमओ नरेंद्र अग्रवाल, बीएसए, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग, मुख्य अभियंता लेसा, जिला पंचायत राज अधिकारी व मुख्य अभियंता आरईएस को सरकार की प्राथमिकता से जुड़े कार्यों में रुचि न लेने संबंधी नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही चेताया कि भविष्य में ऐसी अहम बैठक में मातहत को भेजने की औपचारिकता पूरी न कर स्वयं उपस्थित हों।
आला अधिकारियों के बैठक में न आने से ही चिह्नित दबंग कब्जेदारों को भू-माफिया घोषित करने की अंतिम सूची का निर्धारण भी नहीं हो सका। डीएम ने मौजूद अधिकारियों को चेताया कि भविष्य में बैठक में संबंधित विषय से जुड़ी पूरी जानकारी व पत्रावली लेकर ही पहुंचें। इसमें ढिलाई बरतने वाले विभागों के जिम्मेदारों को कड़ी कार्रवाई के लिए सीधे शासन को पत्र भेज संस्तुति की जाएगी।
पुराने कब्जेदारों के खिलाफ तेज करें कार्रवाई
डीएम ने निर्देश दिया कि पूर्व में जिन अवैध कब्जेदारों को भू-माफिया घोषित किया था, उनके खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाई जाए। सभी विभाग अवैध कब्जेदारी में फंसी सरकारी स्वामित्व की जमीन चिह्नित कर कब्जा हटाने की कार्रवाई की विडियो क्लीपिंग या फोटोग्राफी कर स्थलीय सत्यापन रिपोर्ट सीधे डीएम कार्यालय 20 नवंबर तक सौंपे।
इसके आधार पर दीपावली बाद होने वाली जिला स्तरीय बैठक में चिह्नित भू-माफियाओं के नाम की नई सूची को कार्रवाई के लिए जारी किया जाएगा। इसमें शिथिलता बरतने वालों के खिलाफ सीधे शासन से कार्रवाई की संस्तुति होगी। डीएम ने आउट रिंग रोड प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में तेजी लाने को जमीन का अधिग्रहण मुआवजा निस्तारित कर करने का निर्देश भी एडीएम एलए व संबंधित एसडीएम को दिया।
2017 में घोषित हुई थी भू-माफियाओं की पहली सूची
सीएम के निर्देश पर गठित एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की जिला स्तरीय कमेटी ने अगस्त 2017 में डीएम व एसएसपी के संयुक्त हस्ताक्षर से चिह्नित भू-माफियाओं के नाम की पहली सूची प्रकाशित की थी। इसमें एक से अधिक जगह पर सरकारी स्वामित्व की खाली जमीन को हथियाने वाले बिल्डर व प्रापर्टी डीलिंग से जुड़े संचालकों के नाम थे। सूची घोषित होने के एक साल से ज्यादा का समय बीतने के बावजूद अधिकारियों ने ढिलाई बरती। इस कारण न तो सूची में नए नाम जुड़वाएं जा सके और न ही घोषित भू-माफियाओं के खिलाफ गुंडा एक्ट संग रिकवरी की कार्रवाई शुरू हो सकी।