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एलडीए के सामने धर्म संकट, खुद ही के काम को कैसे कह दें अवैध

Sun, 30 Nov 2014 03:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 30 Nov 2014 03:48 PM IST
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lda engineers are now in confusion to submit illegal list.

जिन्होंने एक-एक छत डलवाने के लिए वसूली की, अवैध निर्माण होने दिया, अब वे किस तरह से इनकी सूची सौपेंगे, यह बड़ा सवाल बन गया है। एलडीए के कुल 13 जोन में से जोन-1 और 2 ने अवैध बिल्डिंगों की सूची सौंपी है।

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यह 48 बिल्डिंगों की सूची हाईकोर्ट को सौंप दी गई है। पर इसके बाद अवैध बिल्डिंगों की सूची देने से अभियंता कतरा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल बड़ा हो जाता है कि आखिर कैसे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई होगी?
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हाईकोर्ट को 48 बिल्डिंगों की सूची दिए जाने के बाद अवैध इमारतों की कोई भी सूची देने में अभियंता कतरा रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट में केवल अवैध निर्माण विरोधी कार्रवाई की रूपरेखा दिए जाने की तैयारी है।
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एलडीए ने अवैध निर्माण विरोधी शेड्यूल देने की कवायद शुरू भी कर दी है। एलडीए चार दिसंबर के बाद सबसे पहले 15 दिन का अवैध निर्माण विरोधी बड़ा अभियान चलाएगा।

...तो क्या फिर बख्श दिया जाएगा

lda engineers are now in confusion to submit illegal list.

इसको लेकर अपर सचिव सीमा सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को बैठक हुई थी। सीमा सिंह ने बताया कि सभी अधिशासी अभियंताओं से उनकी जोन का रिकॉर्ड मांग लिया गया है। उनसे सभी अवैध इमारतों की सूची मांगी गई है, ताकि शेड्यूल बनाने का काम शुरू कर दिया जा सके।

पर जिस हिसाब से अभियंताओं का रुख है उससे यह साफ लग रहा है कि अवैध निर्माण विरोधी शेड्यूल देने में वे केवल उन बिल्डिंगों की सूची देंगे, जिन पर अभियान के दौरान एक्शन किया जाएगा। इस तरह से प्राधिकरण के अभियंता जहां से कम वसूली हो रही है, उन्हीं इमारतों को ही निशाने पर लेंगे।

प्राधिकरण के अभियंताओं को कानपुर रोड पर एक भी अवैध निर्माण नहीं दिखा है। यहां सीलिंग और ध्वस्तीकरण के संबंध में कोई भी सूची अब तक अधिकारियों को नहीं दी है।

जबकि, चार दिसंबर को सूची हाईकोर्ट को भेजी जानी है। केवल जोन एक, दो, चार, पांच, सात, 12 और 13  से ही कुछ इमारतों की सूची दी गई है। जबकि बचे हुए छह जोन में एक भी इमारत की जानकारी नहीं दी जा रही है। जबकि, प्राधिकरण के पास जो भी अधिकारी हैं, उनमें से अधिकांश इस खेल का पहले से ही हिस्सा रह चुके हैं। जिसके चलते कोई बदलाव होता हुआ नहीं दिख रहा है।

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