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बेरहम सिस्टम : न्याय नहीं दिया, बुढ़ापे में छत भी छीन ली, 23 साल से नेहरू एंक्लेव में रह रहे बुजुर्ग दंपती को किया बेघर
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लखनऊ। एलडीए ने मंगलवार को वरिष्ठ नागरिक समाधान दिवस में फरियाद करने वाले बुजुर्ग दंपती राजीव मोहन (70) व रंजना श्रीवास्तव (68) को न्याय देने के बजाय घर से बेघर कर दिया। नेहरू एंक्लेव के पुष्पयान ब्लॉक के 112 नंबर के मकान रहने वाले बुजुर्ग दंपती अब उसी के सामने की सड़क पर गृहस्थी के साथ पड़े हैं।
राजीव मोहन ने वर्ष 1993 की दिवाली में एलडीए की सेल में यह मकान 10 माह में चार किस्त में पूरा भुगतान (4.50 लाख रुपये) करने की शर्त पर खरीदा था। राजीव ये किस्तें 16 माह में चुका पाए। एलडीए के जिम्मेदारों ने राजीव मोहन को इस सिलसिले में कोई रजिस्टर्ड नोटिस भी नहीं भेजा और सीधे आवंटन निरस्त कर दिया। राजीव मोहन ने जनवरी के समाधान दिवस में अर्जी देकर ब्याज माफ करने की गुहार लगाई थी, लेकिन एलडीए ने यह मकान आरसी निगम को बेच दिया।
राजीव मोहन रक्षामंत्री के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी के पास गए तो उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में ब्याज माफ किया गया है। उन्होंने न्याय का भरोसा भी दिलाया था, लेकिन इससे पहले ही मंगलवार दोपहर 12:30 बजे एलडीए की टीम बुजुर्ग के घर पहुंच गई और पूरी गृहस्थी सड़क पर रखकर मकान में ताला लगा दिया।
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4.50 लाख का मकान, 40 लाख ब्याज
राजीव मोहन ने बताया कि 3.30 लाख रुपये का मकान 4.50 लाख रुपये का 1993 में खरीदा था। आर्मी से विवाद हो गया तो 2001 में कब्जा मिल सका। एलडीए छह माह देर से किस्त चुकाने का 40 लाख रुपये ब्याज मांग रहा है। ब्याज न भरने के कारण मकान आरसी निगम को मकान बेच दिया।
सड़क पर गृहस्थी, कोई मददगार नहीं
बुजुर्ग दंपती ने कहा कि बिना गलती के सजा दी जा रही है। पति की पूना एवं मुंबई में तैनाती के दौरान किस्त में देरी होने पर डिफरेंस ब्याज चुकाने का नोटिस नहीं दिया गया। मंगलवार से खुले आसमान के नीचे सड़क पर गृहस्थी है। तिरपाल के नीचे दो बेड पर मच्छरदानी लगाकर रात काट रहे हैं। बच्चे हैं नहीं। नेहरू एंक्लेव आरडब्ल्यूए का कोई पदाधिकारी भी मदद नहीं कर रहा है।
सात घरों से अवैध कब्जे हटाए
एलडीए जोन-1 के अधिशासी अभियंता केके बंसला ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर नेहरू एंक्लेव में बिना आवंटन के ही सात घरों में जो लोग रह रहे थे, उनसे मकान खाली कराया गया है। इन घरों में ताला लगा दिया गया है।
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राजीव मोहन ने वर्ष 1993 की दिवाली में एलडीए की सेल में यह मकान 10 माह में चार किस्त में पूरा भुगतान (4.50 लाख रुपये) करने की शर्त पर खरीदा था। राजीव ये किस्तें 16 माह में चुका पाए। एलडीए के जिम्मेदारों ने राजीव मोहन को इस सिलसिले में कोई रजिस्टर्ड नोटिस भी नहीं भेजा और सीधे आवंटन निरस्त कर दिया। राजीव मोहन ने जनवरी के समाधान दिवस में अर्जी देकर ब्याज माफ करने की गुहार लगाई थी, लेकिन एलडीए ने यह मकान आरसी निगम को बेच दिया।
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राजीव मोहन रक्षामंत्री के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी के पास गए तो उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में ब्याज माफ किया गया है। उन्होंने न्याय का भरोसा भी दिलाया था, लेकिन इससे पहले ही मंगलवार दोपहर 12:30 बजे एलडीए की टीम बुजुर्ग के घर पहुंच गई और पूरी गृहस्थी सड़क पर रखकर मकान में ताला लगा दिया।
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4.50 लाख का मकान, 40 लाख ब्याज
राजीव मोहन ने बताया कि 3.30 लाख रुपये का मकान 4.50 लाख रुपये का 1993 में खरीदा था। आर्मी से विवाद हो गया तो 2001 में कब्जा मिल सका। एलडीए छह माह देर से किस्त चुकाने का 40 लाख रुपये ब्याज मांग रहा है। ब्याज न भरने के कारण मकान आरसी निगम को मकान बेच दिया।
सड़क पर गृहस्थी, कोई मददगार नहीं
बुजुर्ग दंपती ने कहा कि बिना गलती के सजा दी जा रही है। पति की पूना एवं मुंबई में तैनाती के दौरान किस्त में देरी होने पर डिफरेंस ब्याज चुकाने का नोटिस नहीं दिया गया। मंगलवार से खुले आसमान के नीचे सड़क पर गृहस्थी है। तिरपाल के नीचे दो बेड पर मच्छरदानी लगाकर रात काट रहे हैं। बच्चे हैं नहीं। नेहरू एंक्लेव आरडब्ल्यूए का कोई पदाधिकारी भी मदद नहीं कर रहा है।
सात घरों से अवैध कब्जे हटाए
एलडीए जोन-1 के अधिशासी अभियंता केके बंसला ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर नेहरू एंक्लेव में बिना आवंटन के ही सात घरों में जो लोग रह रहे थे, उनसे मकान खाली कराया गया है। इन घरों में ताला लगा दिया गया है।