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एलडीए ने पहले से आवंटित मकान थमा दिया किसी और को
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Wed, 18 Dec 2013 02:20 AM IST
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हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद एलडीए कर्मचारियों द्वारा एक आवेदक को आवंटित मकान दूसरे को देने का नया मामला फिर सामने आया है।
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मकान से वंचित महिला की गुहार पर दूसरे व्यक्ति को आवंटन व कब्जा देने के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही एलडीए को निर्देश दिया है कि याची महिला को एक महीने के भीतर मकान पर कब्जा दिलवाएं। कोर्ट ने मामले के पक्षकारों से चार हफ्ते में जवाब-तलब भी किया है।
कोर्ट ने एलडीए को जवाबी हलफनामे दायर कर यह बताने को कहा है कि याची महिला को उसके हक से वंचित करने पर हर्जाना क्यों न लगाया जाए और मुआवजा क्यों न दिलाया जाए।
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न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को यह आदेश गुड्डी देवी की याचिका पर दिया।
गुड्डी देवी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2002 में जानकीपुरम, सेक्टर-जे के मकान संख्या 1/846 का आवंटन उसके पक्ष में हुआ था।
लेकिन इस मकान पर किसी अन्य ने अनाधिकृत कब्जा जमा रखा था। इसकी वजह से उसे मकान का कब्जा नहीं दिया गया। 17 नवंबर 2003 को मकान किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित कर याची को कहीं और मकान लेने को कहा गया।
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इसके बाद महिला मकान का कब्जा पाने को दौड़ती रही लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। हारकर महिला को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
अदालत ने चार दिसंबर के खंडपीठ के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बार फ्लैट व प्लाट का आवंटन होने के बाद आवंटी को इससे वंचित नहीं किया जा सकता।
किसी विशेष परिस्थिति में ही दूसरी जगह समायोजन किया जा सकता है। कोर्ट ने कहाकि इस मामले में एलडीए के एक कर्मचारी इरशाद हुसैन को दोषी पाया गया।
जिसने एक अन्य व्यक्ति के पक्ष में मकान का आवंटन कर दिया। जब पड़ताल में पाया गया कि यह मकान गैरकानूनी तरीके से दोबारा आवंटित किया गया तो एलडीए को उसे वैध करने का अधिकार नहीं था।
कोर्ट ने एसएसपी को निर्देश दिया है कि याची महिला को मकान का कब्जा दिलवाने के लिए जरूरी फोर्स उपलब्ध करवाई जाए।