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Lucknow News: खुद की लड़ाई नहीं लड़ पा रहे दूसरों को न्याय दिलाने वाले अधिवक्ता

Wed, 03 Dec 2025 02:26 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Dec 2025 02:26 AM IST
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Lawyers who are unable to fight their own battles and are providing justice to others
लखनऊ। न्यायालय के गलियारों में रोज किसी न किसी की आवाज को इंसाफ दिलाने वाले वकील खुद अपनी ही लड़ाई लड़ते दिखाई देते हैं। जो दूसरों के हक के लिए घंटों बहस करते हैं, वही अधिवक्ता बुनियादी सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान की कमी से जूझ रहे हैं।डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर मनाए जाने वाले अधिवक्ता दिवस पर संवाद रिपोर्टर ने वकीलों के संघर्ष, उपेक्षा और दृढ़ इच्छा-शक्ति की तस्वीर की पड़ताल की।
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इस पड़ताल में पता चला कि राजधानी की विभिन्न अदालतों में करीब 27 हजार वकील सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन बैठने के लिए समुचित स्थान तक उपलब्ध नहीं। जहां बड़े राज्यों और दिल्ली में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर बनाए गए हैं, वहीं राजधानी में अधिकांश वकील खुले में तख्त, चौकी या टिनशेड के नीचे बैठकर काम करने को मजबूर हैं। वकील की मृत्यु के बाद उनके परिवार को मिलने वाली आर्थिक सहायता भी सीमित है, जिससे कई परिवार संकट में आ जाते हैं। वकीलों का कहना है कि न्याय देने वाला वर्ग ही जब असुरक्षित हो, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है।
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कल्याणकारी योजनाएं अधूरी, इंश्योरेंस और सुरक्षा अब भी लंबित

बार काउंसिल के सदस्य जय नारायण पांडेय ने बताया कि वकीलों के कल्याण के लिए कई प्रस्ताव सरकार तक भेजे गए, लेकिन अधिकांश पर अमल नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि न्यासी समिति के 30 वर्ष पूर्ण होने पर मिलने वाली राशि 1.50 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। इसी तरह वकील की मृत्यु पर सहायता राशि 1.50 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है। इसके बावजूद वकीलों के लिए सबसे आवश्यक सुविधाएं हेल्थ इंश्योरेंस, सामाजिक सुरक्षा और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट अब भी अधर में हैं।
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राजधानी आईना है, लेकिन हम सुविधाओं से वंचित
सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने कहा कि राजधानी पूरे प्रदेश का आईना है, लेकिन यहां के वकील बुनियादी सुविधाओं के बिना काम कर रहे हैं। टिनशेड के नीचे मौसम की मार झेलकर भी वे न्याय के लिए लड़ने को तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता दिवस उन्हें यह प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी पीड़ितों को न्याय दिलाना है।

न्याय देने वाला सबसे उपेक्षित
सेंट्रल बार के पूर्व उपाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह ने कहा कि वकीलों के लिए योजनाएं तो हैं, लेकिन उनका सही क्रियान्वयन नहीं होता। उन्होंने कहा कि समाज को न्याय दिलाने वाला वकील समाज में सबसे ज्यादा उपेक्षित है। उन्हें कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती।
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