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Lucknow News: हड़ताल स्थगित करने पर दो फाड़ हुए वकील
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लखनऊ। पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद वकीलों की हड़ताल मामले में नया मोड़ आ गया है। हड़ताल के समर्थन व खिलाफ में वकील दो फाड़ हो गए हैं। आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बाद जहां सेंट्रल बार और लखनऊ बार के कुछ पदाधिकारियों ने संतुष्टि जताते हुए हड़ताल स्थगित कर दी है। वहीं, आम सभा के बिना हुए इस फैसले पर कुछ पदाधिकारियों में नाराजगी है। बुधवार को भी आरोपी पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग कर सैकड़ों वकीलों ने हड़ताल जारी रखने का एलान किया।
लखनऊ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश प्रसाद तिवारी, महामंत्री बृजभान सिंह व सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री अमरेश पाल सिंह ने संयुक्त बैठक के बाद प्रस्ताव जारी कर कहा कि पुलिस प्रशासन ने दोषी पांच पुलिसकर्मियों का पुलिस लाइन में स्थानांतरण किया है। इसलिए हड़ताल स्थगित की जाती है और निष्पक्ष जांच कराए जाने के लिए हाईकोर्ट में एक याचिका दी जाएगी।
उधर, सेंट्रल बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने प्रस्ताव का खंडन करते हुए कहा कि दोनों बार एसोसिएशनों की संयुक्त बैठकों में निर्णय लेकर मांग की गई थी कि वकीलों के विरुद्ध दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट निरस्त की जाए एवं पुलिसकर्मियों का तत्काल निलंबन हो, लेकिन पुलिस ने आश्वासन देने के बाद भी कोई वादा नहीं निभाया।
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वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह व उपाध्यक्ष मध्य आशुतोष सिंह चौहान की अगुवाई में वकीलों के एक धड़े ने स्वास्थ्य भवन चौराहे पर नारेबाजी कर हड़ताल स्थगित करने का विरोध किया। वह अधिवक्ता भी विरोध जता रहे थे, जिनसे पुलिस ने 14 मार्च की रात में मारपीट एवं अभद्रता की थी। खंडन प्रस्ताव में कहा गया है कि संयुक्त बैठक में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों व कार्यकारिणी को विश्वास में लिए बिना बगैर चर्चा के प्रस्ताव पारित किया गया है। इसलिए इस प्रस्ताव की आपत्ति की जाती है और प्रस्ताव को खंडित किया जाता है।
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लखनऊ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश प्रसाद तिवारी, महामंत्री बृजभान सिंह व सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री अमरेश पाल सिंह ने संयुक्त बैठक के बाद प्रस्ताव जारी कर कहा कि पुलिस प्रशासन ने दोषी पांच पुलिसकर्मियों का पुलिस लाइन में स्थानांतरण किया है। इसलिए हड़ताल स्थगित की जाती है और निष्पक्ष जांच कराए जाने के लिए हाईकोर्ट में एक याचिका दी जाएगी।
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उधर, सेंट्रल बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने प्रस्ताव का खंडन करते हुए कहा कि दोनों बार एसोसिएशनों की संयुक्त बैठकों में निर्णय लेकर मांग की गई थी कि वकीलों के विरुद्ध दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट निरस्त की जाए एवं पुलिसकर्मियों का तत्काल निलंबन हो, लेकिन पुलिस ने आश्वासन देने के बाद भी कोई वादा नहीं निभाया।
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वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह व उपाध्यक्ष मध्य आशुतोष सिंह चौहान की अगुवाई में वकीलों के एक धड़े ने स्वास्थ्य भवन चौराहे पर नारेबाजी कर हड़ताल स्थगित करने का विरोध किया। वह अधिवक्ता भी विरोध जता रहे थे, जिनसे पुलिस ने 14 मार्च की रात में मारपीट एवं अभद्रता की थी। खंडन प्रस्ताव में कहा गया है कि संयुक्त बैठक में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों व कार्यकारिणी को विश्वास में लिए बिना बगैर चर्चा के प्रस्ताव पारित किया गया है। इसलिए इस प्रस्ताव की आपत्ति की जाती है और प्रस्ताव को खंडित किया जाता है।