यूपी में पूरी हुई विपक्ष के मन की मुराद!
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विधानमंडल सत्र के प्रारम्भ से ही जिस मौके का इंतजार विपक्षी दल कर रहे थे, वह उन्हें मिल गया है। जिसके साथ ही अखिलेश सरकार संकट में आ गई है।
गौरतलब है कि विधानमंडल सत्र के पहले ही दिन से विपक्षी दल सदन में कानून-व्यवस्था पर चर्चा की मांग कर रहे थे।
इसी मांग को लेकर आज विपक्ष ने सदन में हंगामा किया जिसके कारण सभापति गणेश शंकर पांडेय को सदन की कार्यवाही 25 मिनट स्थगित करनी पड़ी।
हालांकि सभापति ने कानून-व्यवस्था पर एक घंटा की चर्चा स्वीकार कर ली, जिससे विपक्ष को मौका मिल गया है कि वह सरकार को घेर सके।
लगातार सरकार पर निशाना
विधान परिषद में भी संपूर्ण विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला किया। यहां तक कहा कि सुरक्षा नहीं दे सकते तो सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है।
सरकार की तरफ से जवाब दे रहे नेता सदन के उत्तर से असंतुष्ट भाजपा सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया तो बसपा के सदस्यों ने वेल में आकर नारेबाजी की।
इसी मुद्दे पर ही शिक्षक दल के नेता ओमप्रकाश शर्मा और भाजपा के विनोद पांडेय ने गौतमबुद्धनगर में विजय पंडित की हत्या की सीबीआई जांच कराने की मांग भी उठाई।
शून्य प्रहर में नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बसपा के लोकेश प्रजापति एवं आरएस कुशवाहा ने 12 जून 2014 को ग्राम भुआलपुर थाना करछना जनपद इलाहाबाद में दलितों पर हुए अत्याचार की घटना का जिक्र करते हुए प्रदेश में कानूून-व्यवस्था के खस्ताहाल होने का मामला उठाया।
ये भी बन सकता है एक मुद्दा
सभापति ने बसपा की इस सूचना के साथ भाजपा के हृदय नारायण दीक्षित, डॉ. यज्ञदत्त शर्मा, डॉ. महेंद्र कुमार सिंह और विनोद पांडेय, कांग्रेस के नसीब पठान, रालोद के चौधरी मुश्ताक की ओर से दी गई बढ़ रही बलात्कार की घटनाओं की सूचनाओं को, शिक्षक दल के ओम प्रकाश शर्मा, जगवीर किशोर जैन, हेम सिंह पुंडीर की दादरी में विजय पंडित की हत्या पर दी गई कार्यस्थगन सूचनाओं को संबद्ध कर दिया।
उल्लेखनीय है कि बजट सत्र में भी विपक्षियों ने सिर्फ इसलिए सदन से वाकआउट कर दिया था क्योंकि वह कानून व्यवस्था पर चर्चा की मांग कर रहे थे।
अब उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर चर्चा के बाद अब सदन की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि चर्चा के लिए इतना कम समय देना भी हंगामे का एक मुद्दा बन सकता है।