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फेंफडे के कैंसर का लास्ट स्टेज में भी होगा इलाज

Thu, 30 Oct 2014 11:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 30 Oct 2014 11:54 AM IST
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last stage of cancer is now curable.

टारगेट थेरेपी ने अंतिम अवस्था के फेफड़े के कैंसर का भी इलाज संभव बना दिया है। फिश टेस्ट (फ्लोरेसेंस इन सिटू हाइब्रिडाइजेशन) से उस जीन की पहचान करना संभव हो गया, जो कैंसर पैदा होने का कारण बनती है।

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जीन का पता लगाने के बाद उसे विशेष दवाओं से खत्म कर दिया गया। इससे कैंसर कोशिकाएं बनने की प्रक्रिया बंद हो जाती है।

डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) के पैथोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित यूपीपैथकॉन-2014 में ये जानकारी अमेरिका से आए डॉ. अशरफ खान ने दी।
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यूनिवर्सिटी ऑफ मैसचुसेट्स यूएसए के निदेशक सर्जिकल पैथोलॉजी डॉ. अशरफ खान ने बताया कि फिश टेस्ट की वजह से हम कैंसर को खत्म करने वाले टारगेट को ढूंढ सकते हैं।
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इससे कैंसर को खत्म करने का सटीक इलाज करना संभव है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से अभी स्तन कैंसर और फेफड़ों के कई तरह के कैंसर की जीन की पहचान हो जाती है।

सही समय पर हो कैंसर की स्क्रीनिंग

last stage of cancer is now curable.

इसके बाद उस मरीज के कैंसर को टारगेट थेरेपी से खत्म किया जा सकता है। डॉ. अशरफ ने कहा कि जांच और इलाज की सुविधाओं के साथ ये जरूरी है कि कैंसर की स्क्रीनिंग (पहचान) सही समय पर हो।

यदि किसी महिला के परिवार में पहले स्तन कैंसर हो चुका होता है तो उसे 30 वर्ष की उम्र से ही हर साल मेमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। हर महिला को 40 वर्ष के बाद मेमोग्राफी कराना अनिवार्य है। इससे शुरुआत में ही स्तन कैंसर का पता चल जाता है।

वहीं टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से आए डॉ. सुमित गुजराल ने बताया कि लिम्फोमा एक तरह का कैंसर जो लिम्फनोड, प्लीहा और शरीर किसी भी हिस्से में हो सकता है।

इस कैंसर का पता इम्यूनोहिस्टोकेमेस्ट्री, हिस्टोपैथोलॉजी, फ्लोसायटोमेटरी टेस्ट से लगाया जा सकता है। एसजीपीजीआई के प्रो. राकेश पांडेय ने बताया कि सिलियक डिजीज की पहचान एक ब्लड टेस्ट से करने की तकनीक की जानकारी दी।

इस बीमारी लंबे समय तक डायरिया, अपच, असहनीय पेट दर्द, ऐंठन, पेट फूलना, अनिश्चित वजन घटना, लंबे समय तक थकान और खून की कमी हो सकती है।

फिश टेस्ट को भी प्रदेश में करेंगे मुफ्त- अहमद हसन

last stage of cancer is now curable.

चिकित्सा स्वास्‍थय एवं परिवार कल्याण मंत्री अहमद हसन ने इस कान्फ्रेंस का उद्घाटन करने के साथ्‍ा ही कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की।  

उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) अपनी विश्व स्तरीय पैथोलॉजी सेवाओं का फायदा सभी सरकारी अस्पतालों के मरीजों को दे।

उन्होंने बताया कि पैथोलॉजी जांचें प्रदेश में फ्री कर दी गई हैं। फिश टेस्ट जैसी महंगी जांच भी लोहिया इंस्टीट्यूट में शुरू हो रही है। जरूरत पड़ने पर उसे भी फ्री कर दिया जाएगा।

सरकार गरीबों की जांच के लिए पूरी मदद करेगी। उन्होंने लोहिया इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ. नुजहत हुसैन से कहा कि वो ऐसी तकनीक खोजें कि मरीजों की बीमारी खून की जांच से हो जाए।

 अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचों के लिए उसे बार-बार भटकना न पड़े।

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