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12 वर्षों से इंतजार, नहीं मिला पुरस्कार

Wed, 28 Aug 2013 12:16 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 28 Aug 2013 12:16 PM IST
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प्रदेश

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में चित्रकला और मूर्तिकला के फनकारों का भी सम्मान पिछले 12 वर्षों से नहीं हुआ है।

चूंकि, इन फनकारों को पुरस्कृत करने की जिम्मेदारी राज्य ललित कला अकादमी की है और यहां अंतिम बार वर्ष 2001 में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ था।

इसके बाद न तो यहां समारोह कराया गया न ही किसी ने इसे कराने का प्रयास किया। राज्य ललित कला अकादमी की ओर से प्रति वर्ष चित्रकला, मूर्तिकला और व्यवहारिक कला जैसी श्रेणियों में एक सम्मान देने की योजना है।

इस ‘अकादमी अधिसदस्यता’ सम्मान पाने वाले कलाकार को 25 हजार रुपये, अंगवस्त्र और प्रमाणपत्र दिया जाता है। पिछली बार वर्ष 2001 में जब अनुराधा गोयल अकादमी की सचिव थीं, तब सम्मान समारोह कराया गया था।

इस वर्ष जयकृष्ण अग्रवाल को यह सम्मान मिला था। जबकि इससे पूर्व के वर्षों में अवतार सिंह पवार (मूर्तिकला), पद्मश्री रणवीर सिंह बिष्ट (चित्रकला), एसजी श्रीखण्डे (मूर्तिकला), एपी गज्जर (व्यवहारिक कला) और रामचंद्र शुक्ल (चित्रकला) को यह सम्मान मिल चुका है।

अकादमी की सचिव वीना विद्यार्थी ने बताया कि अभी हाल ही में मैंने अकादमी की जिम्मेदारी संभाली है। पुरस्कार वितरण के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर पुरस्कार रुके हैं तो उनके लिए बजट का प्रस्ताव भेजा जाएगा।


उर्दू अकादमी, अवॉर्ड पर अब तक निर्णय नहीं

पुरस्कार वितरण के मामले में उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी की लेटलतीफी भी कम नहीं है। यहां गत वर्ष के पुरस्कारों के बारे में अभी निर्णय नहीं हुआ है। इससे पूर्व सम्मानित हो चुके विद्वानों के पुरस्कार भी नहीं पहुंचे हैं।

दरअसल उर्दू अकादमी में न तो उपाध्यक्ष हैं, न ही कमेटी गठित है। अकादमी सचिव एस रिजवान कहते हैं कि निर्णय तो अकादमी के उपाध्यक्ष व कमेटी को ही करना है। ऐसे में योजनाएं प्रभावित तो होंगी ही।

उन्होंने बताया कि अकादमी की ओर से सर्वोच्च पुरस्कार ‘अबुल कलाम आजाद’ (5 लाख रुपये) दिया जाता है। इसके अलावा साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए ही अमीर खुसरो पुरस्कार (डेढ़ लाख रुपये), प्रेमचंद पुरस्कार (एक लाख रुपये) दिया जाता है।

उर्दू शायरी, फिक्शन, पत्रकारिता, लेखन, कैलीग्राफी और प्रकाशन आदि की श्रेणियों में तमाम पुरस्कार दिए जाते हैं, जिन पर करीब 24 लाख रुपये का खर्च आता है। नए सत्र की योजनाओं के लिए आवेदन आ चुके हैं, लेकिन अब तक उन पर काम शुरू नहीं हुआ है।

सबसे बड़ी योजना उर्दू अकादमी अवार्ड व उर्दू अदब से जुड़े शायर व अदीब की सहायता राशि भी उन तक नहीं पहुंच रही है। अकादमी में उर्दू शायर अदीब की पुरस्कार योजनाएं, उर्दू पत्र-पुस्तकों का प्रकाशन, उर्दू सेंटर योजना, उर्दू पुस्तक मेला योजना, उर्दू भाषा की शिक्षा विकास छात्रवृत्ति योजनाएं भी लंबित हैं।

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