{"_id":"5bcef7f9bdec2242912048c9","slug":"ladies-shared-memories-of-karwa-chauth","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं ने साझा कीं करवाचौथ की यादें, बोलीं- 'वो कहने लगे, तुम खा लो मैं किसी को नहीं बताऊंगा'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं ने साझा कीं करवाचौथ की यादें, बोलीं- 'वो कहने लगे, तुम खा लो मैं किसी को नहीं बताऊंगा'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 23 Oct 2018 04:01 PM IST
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पति अकुंश के साथ शिखा सूरी
- फोटो : amar ujala
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फैशन डिजाइनर शिखा सूरी बताती है कि अब से 15 साल पहले मेरी और अंकुश की लव मैरिज हुई। शादी के तीसरे दिन ही करवाचौथ था। मां-दादी को व्रत रखते शुरू से देखा था, पर अब मेरी रखने की बारी थी, जिसे सोच-सोच मैं परेशान थी। दरअसल मैं ज्यादा तो नहीं खाती, लेकिन ज्यादा देर तक भूखे भी नहीं रह सकती थी।
इसी सोच में मेरी घबराहट बढ़ गई थी। खैर, किसी तरह मैंने हिम्मत बटोरी और शुरू हुआ व्रत। सुबह से ही मेरा चेहरा उतरने लग गया। मेरा उतरा चेहरा देख अंकुश का चेहरा उतरने लगा और मेरे से ज्यादा चांद का इंतजार उन्हें होने लगा। फैशन डिजाइनर शिखा कहती हैं कि शादी के 15 साल बीत चुके हैं, हर साल करवा चौथ पर व्रत रहती हूं, लेकिन पहला करवाचौथ हमेशा याद रहता है, जैसे यह कल की ही बात हो।
अंकुश बहुत ही केयरिंग हसबैंड हैं। शादी के बाद उनका प्यार और जिम्मेदारी और बढ़ गई। पहले करवा चौथ का जितना मुझे उत्साह था, अंकुश को मेरी उतनी ही फिक्र थी। दोपहर होते-होते वो मेरे पास आए और कहने लगे कि ‘तुम खाना खा लो मैं किसी से नहीं बताऊंगा’।
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हालांकि आज भी वो मेरी इतनी ही फिक्र करते हैं। अंकुश ने मुझे तोहफे में गुलाब का फूल दिया था। आज भी हर करवा चौथ वो मुझे गुलाब का फूल ही गिफ्ट करते हैं। उस साल आयोजन हमारे घर किया गया था, वहां सारी महिलाएं आई थीं। हम सबने एक साथ पूजा कर व्रत खोला था। वह अनुभव ताउम्र याद रहेगा।
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इसी सोच में मेरी घबराहट बढ़ गई थी। खैर, किसी तरह मैंने हिम्मत बटोरी और शुरू हुआ व्रत। सुबह से ही मेरा चेहरा उतरने लग गया। मेरा उतरा चेहरा देख अंकुश का चेहरा उतरने लगा और मेरे से ज्यादा चांद का इंतजार उन्हें होने लगा। फैशन डिजाइनर शिखा कहती हैं कि शादी के 15 साल बीत चुके हैं, हर साल करवा चौथ पर व्रत रहती हूं, लेकिन पहला करवाचौथ हमेशा याद रहता है, जैसे यह कल की ही बात हो।
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अंकुश बहुत ही केयरिंग हसबैंड हैं। शादी के बाद उनका प्यार और जिम्मेदारी और बढ़ गई। पहले करवा चौथ का जितना मुझे उत्साह था, अंकुश को मेरी उतनी ही फिक्र थी। दोपहर होते-होते वो मेरे पास आए और कहने लगे कि ‘तुम खाना खा लो मैं किसी से नहीं बताऊंगा’।
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हालांकि आज भी वो मेरी इतनी ही फिक्र करते हैं। अंकुश ने मुझे तोहफे में गुलाब का फूल दिया था। आज भी हर करवा चौथ वो मुझे गुलाब का फूल ही गिफ्ट करते हैं। उस साल आयोजन हमारे घर किया गया था, वहां सारी महिलाएं आई थीं। हम सबने एक साथ पूजा कर व्रत खोला था। वह अनुभव ताउम्र याद रहेगा।
हमने शिप पर मनाया था पहला करवाचौथ
कैप्टन रूपेश के साथ ज्योत्सना वालिया
- फोटो : amar ujala
कैप्टन रूपेश वालिया की पत्नी ज्योत्सना वालिया बताती है कि शादी के बाद जब पहला करवा चौथ पड़ा तब मैं पति के साथ शिप में थी। अचानक पता चला कि सुबह करवाचौथ है। शिप पर पति कैप्टन रूपेश वालिया और उनके स्टाफ के अलावा मैं अकेली महिला थी। व्रत के लिए कोई इंतजाम भी नहीं था। लेकिन व्रत तो रखना ही था।
मेरा साथ देने के लिए पति रूपेश ने भी व्रत रखा। वहां न तो परिवार से कोई रीति-रिवाज समझाने के लिए था। न ही तैयारी के लिए किसी तरह का सामान। पूजा तक के लिए कोई सामान नहीं था। पूजा के लिए कुक ने किसी तरह किचन से ही हल्दी और कुछ चीजें दीं।
चांद देखने के लिए बड़ी छन्नी नहीं थी मैने किचन में इस्तेमाल होने वाली छोटी सी छन्नी इस्तेमाल कर ली। शाम हुई, शिप में थे इस बात का अंदाजा भी नहीं लग पा रहा था कि चांद निकला है या नहीं। अपने पहले करवा चौथ की कुछ ऐसी ही अनोखी यादें साझा कीं कैप्टन रूपेश वालिया की पत्नी ज्योत्सना वालिया ने। सेलर पति के साथ अपना पहला करवा चौथ उन्हें घर के बजाए शिप में मनाना पड़ा था।
हर थोड़ी देर पर मां को कर रही थी फोन
अब मेरी शादी के 18 साल हो चुके हैं। लेकिन उस समय मुझे रीति-रिवाजों की इतनी जानकारी नहीं थी। उसके बाद पहले ही व्रत में मैं अकेली पड़ गई। ऐसे में मैं हर थोड़ी देर पर मां को फोन कर छोटी-छोटी बात पूछ रही थी। मैं और वो दोनों लोग व्रत थे। दिन गुजरा, शाम हुई, हमने स्टाफ की मदद से पूजा के लिए कुछ सामान इकट्ठा किया। हमारी ऑयल टैंकर शिप थी, इसलिए दीपक या कैंडल कुछ भी नहीं जला सकती थी। रात हुई, पूजा की, समय होने के बाद मैने अंदाजे से व्रत खोला। मुझे वो बिना रीति-रिवाज का अपना पहला करवा चौथ हमेशा याद रहेगा।
मेरा साथ देने के लिए पति रूपेश ने भी व्रत रखा। वहां न तो परिवार से कोई रीति-रिवाज समझाने के लिए था। न ही तैयारी के लिए किसी तरह का सामान। पूजा तक के लिए कोई सामान नहीं था। पूजा के लिए कुक ने किसी तरह किचन से ही हल्दी और कुछ चीजें दीं।
चांद देखने के लिए बड़ी छन्नी नहीं थी मैने किचन में इस्तेमाल होने वाली छोटी सी छन्नी इस्तेमाल कर ली। शाम हुई, शिप में थे इस बात का अंदाजा भी नहीं लग पा रहा था कि चांद निकला है या नहीं। अपने पहले करवा चौथ की कुछ ऐसी ही अनोखी यादें साझा कीं कैप्टन रूपेश वालिया की पत्नी ज्योत्सना वालिया ने। सेलर पति के साथ अपना पहला करवा चौथ उन्हें घर के बजाए शिप में मनाना पड़ा था।
हर थोड़ी देर पर मां को कर रही थी फोन
अब मेरी शादी के 18 साल हो चुके हैं। लेकिन उस समय मुझे रीति-रिवाजों की इतनी जानकारी नहीं थी। उसके बाद पहले ही व्रत में मैं अकेली पड़ गई। ऐसे में मैं हर थोड़ी देर पर मां को फोन कर छोटी-छोटी बात पूछ रही थी। मैं और वो दोनों लोग व्रत थे। दिन गुजरा, शाम हुई, हमने स्टाफ की मदद से पूजा के लिए कुछ सामान इकट्ठा किया। हमारी ऑयल टैंकर शिप थी, इसलिए दीपक या कैंडल कुछ भी नहीं जला सकती थी। रात हुई, पूजा की, समय होने के बाद मैने अंदाजे से व्रत खोला। मुझे वो बिना रीति-रिवाज का अपना पहला करवा चौथ हमेशा याद रहेगा।
उन्होंने अपने हाथों से बनाई थीं डिशेज
पति प्रबोध संग वैज्ञानिक रितु त्रिवेदी
- फोटो : amar ujala
सीडीआरआई में वैज्ञानिक रितु त्रिवेदी अपने पहले करवाचौथ की याद करते हुए कहती हैं कि शादी के बाद भी पढ़ाई चल रही थी। हम दोनों ही पढ़ाई में इतना व्यस्त रहते थे कि परंपराओं और धार्मिक कार्यों के लिए समय ही नहीं निकल पाता था। लेकिन करवा चौथ का व्रत हर लड़की का सपना होता है।
खासकर पहले करवा चौथ की तो बात ही अलग होती है। 1997 में मेरी शादी हुई थी तब मैं एसजीपीजीआई से पढ़ाई ही कर रही थी। मैं इंस्टीट्यूट के बाद सीधे मायके चली जाती थी। उसके बाद वो मुझे यहां से घर ले जाते थे। हमारा रोज का यही रूटीन था। करवा चौथ हुआ मैने भी बड़े शौक से व्रत रखा।
मैं हर रोज की तरह कॉलेज के बाद मायके चली गई। शाम तक पति प्रबोध लेने नहीं आए, पता चला कि उनकी गाड़ी खराब हो गई। बहुत कोशिशों के बावजूद मुझे मायके में ही रुकना पड़ा। अगले दिन जब मैं घर गई तब पता चला कि उन्होंने छुट्टी लेकर पूरा दिन मेरे लिए मेरे फेवरेट गुलाबजामुन के साथ और डिशेज भी तैयार की थीं। सीडीआरआई में वैज्ञानिक रितु त्रिवेदी ने अपने पहले करवा चौथ की सुनहरी यादें साझा कीं।
ससुराल में रीति रिवाजों की थी गहरी आस्था
रितु ने बताया कि मेरी शादी के 21 साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन पढ़ाई और फिर काम के सिलसिले में धार्मिक कार्यों के लिए समय नहीं मिल पाता। लेकिन सिर्फ करवा चौथ का ही व्रत है जो मैं हर साल बहुत खुशी-खुशी रखती हूं। ससुराल से भी मुझे पहली बार से ही इसके लिए खासतौर पर कहा गया था। आज भी मैं यह व्रत बहुत उत्साह से रखती हूं और बहुत इंतजार भी रहता है।