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पुराने प्रत्याशियों पर भारी पड़ेगा
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भारी पड़ सकता है पिछले चुनाव खर्च का हिसाब न देना
पंचायत चुनाव : पिछले चुनाव में हिसाब न देने वालों के चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे पुराने प्रत्याशियों को चुनावी खर्च का हिसाब न देना भारी पड़ सकता है। निर्वाचन आयोग ऐसे डिफॉल्टरों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोक सकता है। वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में हिस्सेदारी करने वाले 50 फीसदी से अधिक प्रत्याशियों ने अब तक चुनावी खर्चे का ब्योरा नहीं दिया है। ऐसे प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर रोक को लेकर प्रशासन ने राज्य निर्वाचन आयोग से दिशा-निर्देश मांगा है।
पंचायत चुनाव में भी खर्च का हिसाब परिणाम की घोषणा के छह माह की अवधि में प्रत्याशियों को देना होता है। वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव में जिला पंचायत, बीडीसी व पंचायत सदस्य के लिए 17 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने हिस्सेदारी की थी। एडीओ पंचायत बताते हैं कि उम्मीदवारों ने चुनाव खत्म हो जाने के पांच साल बाद भी आयोग के नोटिस का जवाब देना तक मुनासिब नहीं समझा। इनमें काफी संख्या में विजयी प्रत्याशी भी शामिल हैं।
30 से 75 हजार तक थी खर्च सीमा
वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्य के लिए पांच हजार, ग्राम प्रधान के लिए 30 हजार, क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 25 हजार और जिला पंचायत सदस्य के लिए 75 हजार तक की चुनाव खर्च सीमा तय थी। इस दौरान बड़ी संख्या में तय सीमा से काफी ज्यादा चुनावी खर्च के मामलों की शिकायत भी सामने आई थी। पिछले चुनाव के इन डिफॉल्टर प्रत्याशियों की सूची बनने लगी है।
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पंचायत चुनाव : पिछले चुनाव में हिसाब न देने वालों के चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे पुराने प्रत्याशियों को चुनावी खर्च का हिसाब न देना भारी पड़ सकता है। निर्वाचन आयोग ऐसे डिफॉल्टरों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोक सकता है। वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में हिस्सेदारी करने वाले 50 फीसदी से अधिक प्रत्याशियों ने अब तक चुनावी खर्चे का ब्योरा नहीं दिया है। ऐसे प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर रोक को लेकर प्रशासन ने राज्य निर्वाचन आयोग से दिशा-निर्देश मांगा है।
पंचायत चुनाव में भी खर्च का हिसाब परिणाम की घोषणा के छह माह की अवधि में प्रत्याशियों को देना होता है। वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव में जिला पंचायत, बीडीसी व पंचायत सदस्य के लिए 17 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने हिस्सेदारी की थी। एडीओ पंचायत बताते हैं कि उम्मीदवारों ने चुनाव खत्म हो जाने के पांच साल बाद भी आयोग के नोटिस का जवाब देना तक मुनासिब नहीं समझा। इनमें काफी संख्या में विजयी प्रत्याशी भी शामिल हैं।
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30 से 75 हजार तक थी खर्च सीमा
वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्य के लिए पांच हजार, ग्राम प्रधान के लिए 30 हजार, क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 25 हजार और जिला पंचायत सदस्य के लिए 75 हजार तक की चुनाव खर्च सीमा तय थी। इस दौरान बड़ी संख्या में तय सीमा से काफी ज्यादा चुनावी खर्च के मामलों की शिकायत भी सामने आई थी। पिछले चुनाव के इन डिफॉल्टर प्रत्याशियों की सूची बनने लगी है।
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