जानिए एक बार में कितने लोगों को ले जाएगी लखनऊ मेट्रो
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लखनऊ मेट्रो से एक फेरे में कितने लोगों को ले जाएगी साथ ही इसकी स्पीड क्या होगी इन दोनों बातों का खुलासा हो गया है। लखनऊ मेट्रो के एक फेरे में करीब 1200 यात्री सफर सकेंगे। एलस्टॉम से आने वाले कोच की क्षमता 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने की होगी।
हालांकि मेट्रो की औसत स्पीड 30-35 किमी प्रतिघंटा ही आती है। एलएमआरसी का आकलन है कि चारबाग से आलमबाग मेट्रो स्टेशन के बीच की दूरी करीब एक किमी होगी। ऐसे में इस स्पीड से चारबाग से आलमबाग दो मिनट में तय किया जा सकेगा।
लखनऊ मेट्रो को मिलने वाले एलस्टॉम के एक कोच के संचालन पर करीब 13.5 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसमें मेंटेनेंस और सिग्नलिंग भी शामिल है। एलएमआरसी के निदेशक कुमार केशव का कहना है कि लखनऊ में चलने वाली मेट्रो केलिए एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन की कम दूरी एक विशेषता है।
एलएमआरसी के ट्रेनों की तकनीक और डिजाइन का चयन भी इसी खासियत का फायदा उठाने केलिए किया जा रहा है। यात्रियों को चढ़ने में सुविधा से लेकर यात्रा को भी सुविधाजनक बनाया जाएगा।
स्टेनलेस स्टील से बने कोच में पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम से लेकर माइक्रोप्रोसेसर आधारित ट्रेन कंट्रोल सिस्टम और निगरानी के लिए लाइव सीसीटीवी कैमरे भी लगे होंगे। चार कोच की एक ट्रेन की क्षमता 1200 यात्रियों को एक बार में ले जाने की होगी।
एलस्टॉम को मेट्रो कोच का ठेका देने पर उठे सवाल
लखनऊ मेट्रो के कोच की आपूर्ति के लिए सोमवार को एलस्टॉम को दिए गए टेंडर पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल इस बात को लेकर है कि आखिर दागी कंपनी को क्यों कॉन्ट्रैक्ट दिया गया। फ्रांसीसी कंपनी दिल्ली मेट्रो में कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए 30 करोड़ रुपये रिश्वत देने की आरोपी है।
हालांकि लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) के अफसरों का कहना है कि उनका अनुबंध एलस्टॉम की भारतीय कंपनी से हुआ है। कॉन्ट्रैक्ट के लिए पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया।
एलस्टॉम लखनऊ मेट्रो को 1070 करोड़ रुपये में 20 ट्रेन (80 कोच) के रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति करेगी। एलस्टॉम पर यूके के सीरियस फ्रॉड ऑफिस (एसएफओ) ने भारत में अधिकारियों को 30 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का आरोपी पाया।
आरोप है कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) में यह रिश्वत एक सिग्नल कॉन्ट्रैक्ट को पाने के लिए दिया गया। इस मामले में एसएफओ और दिल्ली सरकार दोनों ने ही सीबीआई से भी जांच करने की मांग की थी।
2014 में सामने आए मामले की लगातार जांच चल रही है। इस बीच ही एलएमआरसी ने भी अपने फेज-1ए प्रोजेक्ट के लिए 20 ट्रेनों की आपूर्ति के साथ ही ट्रेन कंट्रोल और सिग्नलिंग के लिए कॉन्ट्रैक्ट एलस्टॉम को दे दिए। हालांकि तर्क दिया जा रहा है कि एलस्टॉम की भारतीय कंपनी चेन्नई में ट्रेन का निर्माण करेगी। वहीं एलस्टॉम एसए फ्रांस ट्रेन कंट्रोल और सिग्नलिंग की आपूर्ति करेगी।
एलएमआरसी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि एलस्टॉम को उसकेकाम की वजह से चुना गया है। कंपनी ने इसी साल चेन्नई मेट्रो को रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति की है। टेंडर की पूरी प्रक्रिया जिसमें तकनीकी और वित्तीय बिड का मूल्यांकन शामिल है।
इसको पूरा करने के बाद ही निदेशक मंडल की स्वीकृति से ही कंपनी का चयन किया गया। इस निविदा में तीन अंतरराष्ट्रीय फ र्मों ने भाग लिया था। यह निविदाएं एलएमआरसी को 21 अप्रेल 2015 को मिलीं।