किसी को खाना, कपड़ा और जरूरत के सामान देना उसकी अस्थायी मदद होती है, लेकिन किसी को उसकी बुरी आदत से मुक्त करा दिया जाए तो उसकी जिंदगी संवर जाती है। उसके साथ उसके परिवार में खुशियां लौट आती है। इसी उद्देश्य के साथ लखनऊ की दो बेटियां शक्ति स्वरूपा बनकर नशे के खिलाफ जंग लड़ रही है, लोगों को जागरूक कर रही है ताकि दूसरों के घरों में खुशहाली आ सके। ये बेटियां है शुभि और शिवि, जो दोनों बहनें हैं।
दोनों ने नशे के खिलाफ जंग छेड़ रखी है, जिसके नतीजे भी आने लगे हैं। इसके अलावा इन्होंने उन महिलाओं में नेतृत्व क्षमता को बाहर लाने की कोशिश की है, जो कहने को तो कॉरपोरेट दुनिया का हिस्सा हैं, लेकिन अपने अधिकारों के लिए बोल नहीं पाती हैं।
शुभि ने बिट्स गोवा से बीटेक किया है। एमएससी मैथ ऑनर्स में पूरा किया। अब यूएस से एमएस करने की तैयारी है। वहीं, शिवि बीटेक, एमबीए करने के बाद वर्तमान में बंगलूरू में यूएस की एक कंपनी में काम कर रही हैं। दोनों ने बराबर से अपना वक्त दिया है और एक वादा जो बचपन में किया, उसे निभा रही हैं।
शुभि कहती हैं कि स्कूली दिनों से ही ठान रखा था कि नशे के खिलाफ कुछ करना है। अब बड़े हुए तो इस मुहिम में जुट गए। शुभि कहती हैं कि छोटे-छोटे ग्रुपों में हम बच्चों से जुड़े हैं। स्कूल स्टाफ की मदद से काम करते हैं। अब तक हम लोग 25-20 हजार बच्चों से सीधा संवाद कर चुके हैं।
शिवी कहती हैं कि मैं पहली बार नौकरी करने गई तो महसूस हुआ कि कॉरपोरेट वर्ल्ड में महिलाएं जितना सशक्त दिखती हैं, उतना अपने अधिकारों को लेकर चुप रह जाती हैं। इसी लिए हमने हाईटेक लीडरशिप प्रोग्राम पर काम किया। इसमें हम महिलाओं में नेतृत्व क्षमता के विकास पर काम कर रहे हैं। इसमें तमाम गतिविधियों और सवाल-जवाब व संवाद के जरिए बदलाव लाने की कोशिश है।