बुजुर्गों के साथ युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही दिल की बीमारी, एसी कमरे में रहने वालों पर खतरा ज्यादा
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जीवनशैली में आए बदलाव की वजह से हृदय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अकेले केजीएमयू की ओपीडी में रोजाना सात से आठ सौ मरीज आ रहे हैं। इसमें 25 से 40 मरीजों को तत्काल भर्ती करने की जरूरत होती है।
दिल के ज्यादातर मरीज धूम्रपान, तनाव और गलत खानपान से खुद को अलग नहीं कर पा रहे हैं। अब यह बीमारी बुजुर्गों में नहीं बल्कि युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। महिलाओं से लेकर बच्चों में भी ये बीमारी तेजी से बढ़ी है।
लगातार एसी और बंद कमरे में बैठने वाले खुली हवा की अपेक्षा 25 फीसदी अधिक प्रदूषण के शिकार होते हैं। आर्टिफिशियल लाइट में बैठने वाले तनावग्रस्त होते हैं। इसमें हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा अधिक होता है। पेश है केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. वीएस नारायण से बातचीत के प्रमुख अंश...
शरीर में हृदय का क्या योगदान है ?
हृदय छाती के बीच होता है। यह दाएं, बाएं दो हिस्से में होता है। दोनों में दो-दो वॉल्व होते हैं। यह एक दिन में लगभग एक लाख बार धड़कता है। शरीर में रक्त को पम्प करता है। इसे खून के जरिये पोषण मिलता है। इसमें दाहिना भाग शरीर से दूषित रक्त प्राप्त करता है और उसे फेफड़ों में पम्प करता है। यहां से खून शोधित होकर हृदय के बाएं भाग में जाता है और फिर पूरे शरीर में जाता है। इससे शरीर को शुद्ध और ऑक्सीजनयुक्त रक्त मिलता रहता है।
हृदय संबंधी बीमारियों की प्रमुख वजह क्या है?
शराब, धूम्रपान, वजन बढ़ना, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज हृदय रोग के प्रमुख कारण हैं। कुछ लोगों में अनुवांशिक कारण भी माना जाता है। इसमें कोरोनरी आर्टरी में कोलेस्ट्रॉल जम जाता है। यह खून के बहाव को रोकता है। धमनियों में रुकावट आने से हृदय की मांसपेशियों को रक्त प्राप्त नहीं होता है और वे मर भी जाती हैं। हालांकि, हार्ट अटैक का असर इस बात पर निर्भर करता है कि हृदय की मांसपेशियों को कितना नुकसान हुआ है। पम्पिंग कितना प्रभावित हुआ है।
जानें- कैसे पहचाने कि दिल का दौरा पड़ा है
कैसे पहचाना जाए कि दिल का दौरा पड़ा है?
इसकी पहचान आसान है। मुठ्ठी बांधकर सीने पर जहां दर्द हो वहां रखें। जहां मुट्ठी रखी है, उसके पूरे हिस्से में दर्द हो रहा है और छाती से गर्दन या बाएं हाथ की ओर बढ़ रहा है। यह दर्द 20 मिनट से ज्यादा वक्त रह रहा है तो हार्ट अटैक होने की आशंका अधिक रहती है। यह कई बार बैठे-बैठे होता है तो कई बार चलने पर। इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत, पैरों में पसीना आना, चक्कर व बेहोशी महसूस होना भी इसके लक्षण हैं।
टहलते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बातचीत करते हुए चार-पांच किलोमीटर तक धीरे-धीरे पैदल चल रहे हैं तो हृदय के मामले में यह बेमतलब है। तेज चलें, जिससे तेज सांस लें और छोड़ें। इससे हार्ट की पंपिंग होता है। पसीना होने लगता है। 30 मिनट एक बार में नहीं चल पाते हैं तो 15-15 मिनट में बांट दें। 15 मिनट सुबह और 15 मिनट शाम को टहलने का प्लान कर सकते हैं। साइकिल चलाना भी फायदेमंद है। योग, ध्यान भी कारगर है।
प्रदूषण फेफड़े के जरिए हार्ट को करता है प्रभावित
हृदय रोग के लिए प्रदूषण कितना जिम्मेदार है?
पर्यावरण के प्रदूषण से खुद को बचाने के लिए साइकिल चलाना होगा। एक घंटे की साइकिलिंग के जरिये हम हार्ट की बीमारी को दूर भगा सकते हैं। पहले हृदय संबंधी बीमारी गद्दी पर बैठने वाले साहूकारों को होती थी, लेकिन अब रिक्शेवाले, जरदोजी कारीगर, खेत मजदूर को भी हो रही है। प्रदूषण हर स्तर पर बढ़ा है। यह फेफड़े के जरिये हार्ट को प्रभावित कर रहा है। ओपीडी में आए दिन इस तरह के केस आते हैं, जिन्हें पहले फेफड़े की बीमारी हुई और फिर दिल की। इतना ही नहीं सूर्य की रोशनी के बजाय लगातार कृत्रिम रोशनी में रहने वाले 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा डिप्रेशन के शिकार होते हैं। इससे इम्युनिटी के साथ नर्वस सिस्टम कमजोर होता है।
क्या नाइट शिफ्ट वालों को दिल की बीमारियों का ज्यादा खतरा रहता है?
खतरा होने की वजह है नींद पूरी न होना। छह घंटे की एक बार में नींद ले रहे हैं तो यह खतरा कम हो जाता है। दूसरी बड़ी वजह है कि नाइट शिफ्ट की वजह से लोग खानपान का ध्यान नहीं रखते हैं। इससे डायबिटीज और मोटापा बढ़ने लगता है। यह हृदय को प्रभावित करता है।
हो सकता है दिल की बीमारी का इलाज
मरीज किन बातों का ध्यान रखें?
चिकित्सक की बताई गई दवाएं दें। मरीज को खुश रखें। आमतौर पर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक पड़ता है तो पूरा परिवार दुखी हो जाता है। यह समझना होगा कि अन्य बीमारियों की तरह ही दिल की बीमारी का इलाज हो सकता है। परिवारीजन और रिश्तेदार बार-बार उसकी बीमारी के बारे में न पूछें। मरीज के प्रति बेचारगी जताकर हम उसके दोबारा अटैक की आशंका को 20 फीसदी बढ़ा देते हैं। जितनी बार बेचारगी दिखाएंगे, मरीज को उतना ही अधिक तनाव होगा। फिर तनाव हार्ट अटैक का कारण बनेगा।