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पढ़ाई के साथ समाज में बदलाव लाने में जुटी हैं साइमा, मिल चुका है सर्वश्रेष्ठ स्टूडेंट का अवार्ड
Fri, 22 Mar 2019 11:32 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 22 Mar 2019 11:32 AM IST
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साइमा नसीम
- फोटो : amar ujala
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राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़ने के बाद साइमा नसीम की जिंदगी में ऐसा बदलाव आया कि अब वह सामाजिक सरोकारों से खुद को अलग नहीं कर पा रही है। टीम के अलावा वह स्वतंत्र रूप से भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए निकल पड़ती है। साइमा का मानना है कि हर किसी को किसी न किसी रूप में समाज के हित में अपना योगदान देना चाहिए। इसी तरह से ही हम समाज में बदलाव ला सकते हैं।
साइमा नसीम हीरालाल यादव बालिका डिग्री कॉलेज की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा है। ज्यादा समय नहीं हुआ। बात करीब एक साल पहले की ही है जब वह राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़ी, उसके बाद उसकी जिंदगी के मायने ही बदल गए। राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत टीम के साथ उसने कई शिविरों में भाग लिया और लोगों को जागरूक करने का काम किया।
अब वह स्वतंत्र रूप से भी काम करती है। पढ़ाई के साथ वह स्कूली बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है। उसकी कक्षा में कई ऐसे बच्चे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और ट्यूशन की फीस का खर्चा वहन नहीं कर पाते उन्हें निशुल्क पढ़ाती है। उसकी इसी भावना की वजह से वह बच्चों के बीच लोकप्रिय हो चुकी है।
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इसके अलावा वह बालिकाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी काम करती है। बस्ति व मोहल्लों जाकर बालिका विवाह, बालिका शिक्षा, दहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करती है। वह लोगों को बालिकाओं को पढ़ाने पर बल देती है। बेटी पढ़ेगी तो पूरा समाज बदलेगा, परिवार समृद्ध होगा। जेंडर सेंसीटाइजेशन पर भी वह कई कार्यशाला कर चुकी है। बालक हो या बालिका दोनों को एक समान अवसर मिले, इसी बात पर बल देती है।
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साइमा नसीम हीरालाल यादव बालिका डिग्री कॉलेज की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा है। ज्यादा समय नहीं हुआ। बात करीब एक साल पहले की ही है जब वह राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़ी, उसके बाद उसकी जिंदगी के मायने ही बदल गए। राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत टीम के साथ उसने कई शिविरों में भाग लिया और लोगों को जागरूक करने का काम किया।
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अब वह स्वतंत्र रूप से भी काम करती है। पढ़ाई के साथ वह स्कूली बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है। उसकी कक्षा में कई ऐसे बच्चे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और ट्यूशन की फीस का खर्चा वहन नहीं कर पाते उन्हें निशुल्क पढ़ाती है। उसकी इसी भावना की वजह से वह बच्चों के बीच लोकप्रिय हो चुकी है।
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इसके अलावा वह बालिकाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी काम करती है। बस्ति व मोहल्लों जाकर बालिका विवाह, बालिका शिक्षा, दहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करती है। वह लोगों को बालिकाओं को पढ़ाने पर बल देती है। बेटी पढ़ेगी तो पूरा समाज बदलेगा, परिवार समृद्ध होगा। जेंडर सेंसीटाइजेशन पर भी वह कई कार्यशाला कर चुकी है। बालक हो या बालिका दोनों को एक समान अवसर मिले, इसी बात पर बल देती है।
नुक्कड़ नाटक को बनाया हथियार
साइमा नसीम
- फोटो : amar ujala
साइमा ने जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक और पोस्टर अभियान को सशक्त हथियार बना लिया है। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए कई नुक्कड़ नाटक कर चुकी है। पौधारोपण अभियान में भी हिस्सा लिया और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
बंथरा स्थित अपने गांव में उसने अकेले ही पोस्टर अभियान चलाकर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। खुद ने गांव में 600 से ज्यादा पोस्टर चस्पा किए और लोगों तक अपनी बात पहुंचाई। उसके इस प्रयास को काफी सराहना मिली। प्लास्टिक और पॉलीथीन इस्तेमाल न करने को लेकर उसने अभियान छेड़ रखा है।
लोगों को इसे प्रतिबंधित करने के साथ पेपर बैग भी वितरित करती है। सामाजिक कार्यों में साइमा के इसी प्रयास की बदौलत उसे कॉलेज की तरफ से सर्वश्रेष्ठ छात्रा अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी रखने के साथ वह पढ़ाई में भी टॉपर है। अपने विषय में वह टॉप कर चुकी है।
बंथरा स्थित अपने गांव में उसने अकेले ही पोस्टर अभियान चलाकर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। खुद ने गांव में 600 से ज्यादा पोस्टर चस्पा किए और लोगों तक अपनी बात पहुंचाई। उसके इस प्रयास को काफी सराहना मिली। प्लास्टिक और पॉलीथीन इस्तेमाल न करने को लेकर उसने अभियान छेड़ रखा है।
लोगों को इसे प्रतिबंधित करने के साथ पेपर बैग भी वितरित करती है। सामाजिक कार्यों में साइमा के इसी प्रयास की बदौलत उसे कॉलेज की तरफ से सर्वश्रेष्ठ छात्रा अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी रखने के साथ वह पढ़ाई में भी टॉपर है। अपने विषय में वह टॉप कर चुकी है।