बीटेक के साथ ही पुलिस मैनेजमेंट में एमबीए हैं लखनऊ के नए एसएसपी, ये हैं उनकी बड़ी चुनौतियां
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राजधानी लखनऊ के नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसपी) कलानिधि नैथानी बेहतर कानून व्यवस्था, जन सुनवाई की प्राथमिकता के साथ कार्यभार संभालेंगे। पांच जिलों में कप्तानी कर चुके 2010 बैच के आईपीएस नैथानी ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक के साथ पुलिस प्रबंधन में एमबीए किया है।
‘अमर उजाला’ से फोन पर बातचीत में कहा कि कानून हाथ में लेने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। नागरिकों को समस्या बताने के लिए किसी से सिफारिश नहीं करानी होगी। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के मूल निवासी कलानिधि नैथानी ने बताया कि उनकी मां देहरादून कॉलेज में प्रधानाचार्या और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हैं। पिता गढ़वाल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और पत्नी इलाहाबाद में आयकर विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर हैं। बड़े भाई सेना में लेफ्टीनेंट कर्नल हैं।
नैथानी ने पौड़ी गढ़वाल से हाईस्कूल और मथुरा में आर्मी स्कूल से इंटरमीडिएट के बाद पंतनगर से बीटेक किया। हैदराबाद के उस्मानिया विवि के पुलिस प्रबंधन में एमबीए के बाद भामा एटॉमिक अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक अधिकारी, भारत सरकार के सी डॉट सेंटर फॉर डवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स में पांच साल बंगलूरू और दिल्ली में अनुसंधान अभियंता रहे।
वर्ष 2010 में आईपीएस में चयन के बाद कलानिधि नैथानी पीलीभीत, बरेली, कुंभमेला, सहारनपुर में सहायक पुलिस अधीक्षक, पीएसी की 38वीं और नौवीं वाहिनी में सेनानायक, पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद में पुलिस अधीक्षक, कन्नौज, फतेहपुर, मिर्जापुर और पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक के बाद बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर रहे।
ये हैं नैथानी के सामने चुनौतियां
वर्ष 2010 बैच के आईपीएस कलानिधि नैथानी को राजधानी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का कार्यभार संभालने के साथ लविवि प्रकरण के साथ संस्कृति राय हत्याकांड के साथ अनेक अनसुलझी वारदातों का सामना करना पड़ेगा। कानून व्यवस्था और यातायात व्यवस्था पटरी पर लाना भी उनके लिए चुनौती होगी।
पॉलीटेक्निक छात्रा संस्कृति राय हत्याकांड के दो हफ्ते बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। घटना से आक्रोशित पॉलीटेक्निक छात्र चौराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन कर चुके हैं और अनेक स्वयंसेवी संगठनों ने भी प्रदर्शन कर कातिलों की गिरफ्तारी की मांग की है।
पुलिस ने सैकड़ों से पूछताछ के साथ अनेक मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली। करीबी लोगों पर हत्या का अंदेशा जताने के साथ बलिया जाकर संस्कृति के परिवारीजनों से तहकीकात की। तीन संदिग्ध व्यक्तियों के ब्रेनमैपिंग व नारको टेस्ट के लिए अदालत से अनुमित मांगी है। फिलहाल कातिल का कोई सुराग नहीं लगा। ऐसे में हत्याकांड का खुलासा नए कप्तान के लिए चुनौती होगी।
इन वारदातों के अलावा यातायात व्यवस्था भी कड़ी चुनौती
इसके अलावा जानकीपुरम में दवा व्यवसायी मुकेश मिश्रा और गोमतीनगर में मुन्ना बजरंगी के करीबी ठेकेदार तारिक की हत्या का खुलासा भी चुनौती बना हुआ है। तालकटोरा में युवक की हत्या कर नाले में धड़ फेंककर फरार बदमाशों का कोई सुराग नहीं लगा है और न मारे गए युवक की शिनाख्त हुई है। पारा क्षेत्र का राजकुमार चौरसिया हत्याकांड अनसुलझा है। इसके अलावा चेन-पर्स लुटेरों और वाहन चोरों पर अंकुश लगाना भी चुनौती है।
उधर, तमाम प्रयासों के बाद भी यातायात व्यवस्था बेपटरी है। अतिक्रमण और सड़क पर गाड़ियां खड़ी होने से लोग रोजाना प्रमुख मार्गों पर जाम से जूझते हैं। वहीं, शहर की कानून व्यवस्था भी नए कप्तान के लिए चुनौती होगी।
विश्वविद्यालय में उपद्रव को लेकर शासन व हाईकोर्ट में पुलिस की फजीहत का सामना करते हुए हालात काबू में करने होंगे। शहर में आए दिन धरना-प्रदर्शन के साथ पुराने शहर की कानून व्यवस्था जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा।