जानें- वह घटना जिससे बिगड़े यूपी के पूर्व सीएम और इंदिरा गांधी के रिश्ते
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हेमवती नंदन बहुगुणा प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वह आपातकाल के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से आपातकाल का विरोध भी व्यक्त किया था। पर, इंदिरा नहीं मानीं। इससे बहुगुणा काफी खिन्न हो गए। उधर, केंद्र सरकार के इशारे पर बहुगुणा के कई शुभचिंतकों और मित्रों को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन पर ‘मीसा’ लगा दिया गया। बहुगुणा अधिकारियों से पूछते तो उन्हें जवाब मिलता कि केंद्र से सीधे निर्देश आया था। यह सुनकर वह कसमसा कर रह जाते। मुख्यमंत्री होने के नाते इन गिरफ्तारियों को लेकर निशाना उन पर साधा जा रहा था।
बहुगुणा पर लिखी पुस्तक के एक संस्मरण से पता चलता है, ‘बड़े समाजवादी नेता रामनरेश कुशवाहा को भी गिरफ्तार करा लिया गया। उन्हें जेल भेज दिया गया। कुशवाहा और बहुगुणा करीबी मित्र थे। बहुगुणा को पता चला तो उनका गुस्सा चरम पर पहुंच गया।
कुशवाहा की पुत्रियों को खर्च के लिए भेजे पैसे
अधिकारियों से पूछा तो वही जवाब, ‘दिल्ली का निर्देश है।’ कुशवाहा को जेल में सूचना मिली कि इलाहाबाद में सीटी ट्रेनिंग कर रही उनकी दो पुत्रियों की फीस जमा न होने से पढ़ाई बंद होने की कगार पर है। खेती भी चौपट हो गई है। जीविका का कोई साधन न होने से घर की हालत भी बिगड़ गई है।
उन्होंने बहुगुणा को पत्र लिखा। पत्र मिलते ही बहुगुणा ने उनकी पुत्रियों को खर्च के लिए पैसे भेजे। फीस का पैसा भेजा और अधिकारियों से कहा कि भविष्य में फीस के कारण पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।’ ऐसा करना कम साहस का काम नहीं था। इंदिरा गांधी इस काम से उनसे और नाराज हो गईं।